सीरिया के फ़ुआ व कफ़रिया नामक क़सबों के हज़ारों लोग वर्षों तक परिवेष्टन में रहने के बाद स्वतंत्र हो गए हैं।

नुस्रा फ़्रंट और जैशुल फ़तह के आतंकियों ने 29 मार्च 2015 को इदलिब पर क़ब्ज़े के बाद तुर्की की सीमा से सटे इन दोनों क़स्बों पर भी क़ब्ज़े की बहुत कोशिश की लेकिन यहां रहने वाले लोगों ने कड़े प्रतिरोध का प्रदर्शन किया और आतंकी तीन साल तक इन क़स्बों में पानी, बिजली, गैस और खाद्य सामग्री की सप्लाई को पूरी तरह बंद करने के बावजूद इन पर क़ब्ज़ा नहीं कर सके।

 

एेसे हालात में शिया बाहुल्य इन दोनों क़स्बों के हज़ारों लोगों को तीन साल तक विद्रोहियों के घेराव में रहने के बाद बाहर निकलने की अनुमति दी गई। फ़ुआ व कफ़रिया के लोगों की स्वतंत्रता रूस और तुर्की के बीच होने वाली सहमति से संभव हुआ है। इदलिब पर सीरियाई सेना की ओर से हमला न किए जाने, सैकड़ों विद्रोहियों को रिहा किए जाने और कई अन्य वादों के बाद इन दो क़स्बों के लोगों का घेराव समाप्त किया गया है।

 

इस बीच अहम बिंदु यह है कि किसी भी स्थान के लोगों के लोगों को उनकी मातृभूमि से ज़बरदस्ती निकालना अंतर्राष्ट्रीय क़ानूनों और अनेक संधियों के अंतर्गत युद्ध अपराध की श्रेणी में आता है। मानवाधिकार के बड़े बड़े दावे करने वाली बड़ी शक्तियों में से किसी ने भी तीन साल तक इन अत्याचारग्रस्त लोगों को मुक्त कराने के लिए कोई क़दम नहीं उठाया और यह उनके दावों पर एक बड़ा सवालिया निशान है। (HN)

टैग्स

Jul १९, २०१८ १९:३० Asia/Kolkata
कमेंट्स