• छह महत्वपूर्ण घटनाओं से मिलता है इशारा की इदलिब में शुरू हो रही है अत्यंत जटिल लड़ाई, जान बोल्टन विध्वंसक हमले की बात कहकर क्या संदेश देना चाहते हैं?

पश्चिमी एशिया के इलाक़े में ईदुल अज़हा की छुट्टियां पूरी हुई हैं और अमरीका तथा यूरोप में गर्मियों की छुट्टियां ख़त्म हो गई हैं तो अब मध्यपूर्व में सैनिक टकराव के लक्षण फिर दिखाई देने लगे हैं।

यह लड़ाई सीरिया में इदलिब के इलाक़े में होने वाली है। इदलिब को विद्रोही संगठनों और आतंकियों के क़ब्ज़े से वापस लेने के लिए सीरियाई सेना की तैयारी अभूतपूर्व रूप से जारी है। दूसरी ओर अमरीका के नेतृत्व में विरोधी गठबंधन सीरिया और घटकों के इस आप्रेशन को नाकाम बनाने की कोशिश में है। अमरीकी अधिकारी दो साल तक चुप रहने के बाद अब एक बार फिर पुराना राग अलापने लगे हैं कि राष्ट्रपति बश्शार असद को सीरिया की सत्ता से हटाना ज़रूरी है। अमरीकियों की सात साल से जारी यह कोशिश नाकाम रही और उन्हें भी मानना पड़ा है कि बश्शार असद को सत्ता से हटाना उनके बस की बात नहीं है।

आने वाले सप्ताहों में इस इलाक़े में बड़ा टकराव शुरू हो सकता और इसका इशारा छह महत्वपूर्ण घटनाओं से मिलता है।

  1. अमरीकी मैगज़ीन ब्लूमबर्ग ने चार विश्वस्त सूत्रों के हवाले से लिखा है कि अमरीका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जान बोलटन ने जेनेवा में अपने रूसी समकक्ष जनरल निकोलाय बार्तोशेफ़ से मुलाक़ात में यह धमकी दी है कि यदि रासायनिक हथियारों का प्रयोग हुआ तो अमरीका सीरिया के भीतर कुछ लक्ष्यों को पूरी तरह तबाह कर देगा।
  2. रूस के रक्षा मंत्रालय ने एक बयान जारी करके चेतावनी दी है कि अमरीका, ब्रिटेन और फ़्रांस सीरिया पर मिसाइल हमले की कोशिश में हैं जिसका उद्देश्य चरमपंथी संगठनों को एलेप्पो और हमा पर हमले के लिए प्रोत्साहित करना है ताकि इन शहरों पर चरमपंथियों का पुनः क़ब्ज़ा हो जाए।
  3. अमरीकी डिस्ट्रायर दि सलीवैन्स जो 56 टाम हाक मिसाइलों से लैस है वह फार्स खाड़ी के क्षेत्र में पहुंच गया है और क़तर में अमरीका की वायु छावनी में बड़े बमबार विमान पहुंचा दिए गए हैं जो हवा से ज़मीन पर मार करने वाले मिसाइलों से लैस हैं। यह सूचना रूसी रक्षा मंत्रालय के बयान में दी गई है।
  4. रूसी प्रशासन के बयानों में यह बात कही जा रही है कि अमरीका इस कोशिश में है कि जब इदलिब का आप्रेशन सीरियाई सेना और उसके घटकों की ओर से शुरू किया जाए तो उसी दौरान कोई रासायनिक हमला करवा दिया जाए। सीरिया में विद्रोही संगठनों और सरकार के बीच समझौते के लिए काम करने वाली रूसी टीम के प्रवक्ता इगोर कोनाशीन्कोफ़ ने बताया कि जिसरूश्शुग़ूर शहर के क़रीब एक गांव में क्लोरीन गैस पहुंचाई गई है।
  5. ईरान के रक्षा मंत्री जनरल अमीर हातेमी रविवार को दमिश्क़ पहुंचे और उनके साथ ईरान के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल भी इस यात्रा पर गया है। ईरानी रक्षा मंत्री की मुलाक़ात सीरियाई रक्षा मंत्री एमाद अय्यूब तथा राष्ट्रपति बश्शार असद से हुई है।
  6. आतंकी संगठन अन्नुस्रा फ़्रंट के सरग़ना अबू मुहम्मद जौलानी ने लटाकिया के उपनगरीय इलाक़ों में अपने तत्वों से मुलाक़ात के दौरान कहा कि दमिश्क़ सरकार के विरुद्ध जेहाद शुरू कर दिया जाए। दूसरी ओर उन बाग़ी नेताओं की बड़े पैमाने पर टारगेट किलिंग की गई है जो सरकार के साथ संधि के लिए प्रयास कर रहे थे। यह विचार रखने वाले 500 से अधिक लोगं को गिरफ़तार कर लिय गया है।

यह भी ख़बरें हैं कि इदलिब में 40 बच्चों का अपहरण कर लिया गया है जिन्हें रासायनिक हमलों के ड्रामें में प्रयोग किया जा सकता है।

इदलिब और उसके आस पास के इलाक़ों में हज़ारों लड़ाके पूरी तरह तैयार हो गए हैं और उनके पास आधुनिक हथियार भी हैं। इन लड़ाकों का कहना है कि वह पहले तो इदलिब पर होने वाले हमले को नाकाम बनाएंगे और फिर एलेप्पो तथा हमा को वापस लेने की कार्यवाही शुरू करेंगे।

अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प बड़ी जटिल आंतरिक समस्याओं में घिर गए हैं क्योंकि उनके क़रीबी साथी ने जांचकर्ता मुलेर से सहयोग का फ़ैसला कर लिया है। ट्रम्प के पूर्व वकील माइक कोहेन ने ट्रम्प के यौन स्कैंडल और वित्तीय गड़बड़ियों के बारे में सारी जानकारियां मुलेर को दे दी हैं। इसलिए यदि सीरिया युद्ध की आग इस अवसर पर भड़क उठती है तो अमरीकी जनमत का ध्यान अपनी ओर से हटाने में ट्रम्प को कामयाबी मिल जाने की संभावना है। इस  तरह हो सकता है कि ट्रम्प की पार्टी को नवम्बर महीने में होने वाले कांग्रेस के चुनावों में भी कुछ फ़ायदा मिल जाए।

जहां तक रासायनिक हमलों का सवाल है तो सीरियाई सेना को एसा कोई हमला करने की ज़रूरत ही नहीं है। जबकि रासायनिक हमलों का ड्रामा रचना अमरीका और यूरोपीय देशों का एसा हथकंडा है जिसे वह इससे पहले भी प्रयोग कर चुके हैं।

साफ़ बात यह है कि अमरीका यह चाहता ही नहीं कि सीरिया का युद्ध समाप्त है और इस युद्ध में सीरिया रूस और ईरान के गठबंधन को विजय मिल जाए तथा इस देश का पुनरनिर्माण और शरणार्थियों की वापसी शुरू हो। इसीलिए अमरीका कोशिश कर रहा है कि इदलिब पर सीरियाई सेना के हमले को विफल बना दे। अमरीका चाहता है कि इदलिब का इलाक़ा चरमपंथियों के नियंत्रण में बना रहे ताकि वह सीरियाई सरकार और घटकों के लिए सिर दर्द के रूप में बाक़ी रहे और इसके माध्यम से वह सीरिया को परेशान करता रहे।

गत 14 अप्रैल को अमरीका, ब्रिटेन और फ्रांस ने जो हमला किया था यदि उसी प्रकार का हमला वह इदलिब की लड़ाई के दौरान भी करते हैं तो इस बात की आशंका है कि व्यापक युद्ध छिड़ जाए। इसलिए कि इस बात यह तीनों देश अधिक बड़ा हमला करके सीरिया को नुक़सान पहुंचाना चाहते हैं।

रूस के रक्षा मंत्रालय ने अपने बयान में जिस प्रकार का स्वर दिखाया है उसे साफ़ लगता है कि इस बार रूस ख़ामोश नही रहेगा जो इदलिब आप्रेशन में सीरियाई सेना का समर्थन कर रहा है। दूसरी ओर चीन भी यही चाहता है कि इदलिब की लड़ाई ख़त्म है और इस इलाक़े को चरमपंथियों के क़ब्ज़े से आज़ाद कराया जाए ताकि उइगोर लड़ाके भी ख़त्म है जिनकी संख्या इदलिब में 5 हज़ार तक बताई जाती है। चीन का डर है कि यह लोग चीन वापस जाकर वहां अशांति फैला सकते हैं।

इदलिब की लड़ाई सीरिया संकट में बहुत महत्वपूर्ण मोड़ है शायद इस लड़ाई का नतीजा मध्यपूर्व का नया ख़ाका तैयार करने में प्रभावी होगा।

सीरिया के मामले में रूस अपनी सफलताओं को आसानी से मिटने नहीं देगा। यदि इदलिब में आतंकियों ने हथियार न डाले और शांति समझौता न किया तो निश्चित रूप से यहां भयानक लड़ाई होगी।

अब्दुल बारी अतवान

अरब जगत के विख्यात लेखक व टीकाकार

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Aug २७, २०१८ १६:५२ Asia/Kolkata
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