• वह दो घटनाएं , जो इस्राईल को डरा रही हैं!

हालिया दिनों में दो महत्वपूर्ण घटनाएं हुई हैं जिन पर इस्राईली मीडिया बहुत ज़्यादा ध्यान दे रहा है और यह दोनों घटनाएं एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं।

      पहली घटना सैयद हसन नसरुल्लाह का भाषण और दूसरी घटना, ईरानी रक्षा मंत्री की सीरिया यात्रा है।

            सैयद हसन नसरुल्लाह के भाषण पर इस्राईली मीडियो हमेशा असाधारण रूप से ध्यान देता है। इस्राईल के चैनल नंबर 10 पर इस्राईली विशेषज्ञ, हीज़ी सीमानतूफ़ ने एक कार्यक्रम में कहा कि निश्चित रूप से हसन नसरुल्लाह ने अपने भाषण में बड़े आसान शब्दों में हिज़्बुल्लाह और सीरिया में उसके घटकों के सामने खड़े होने वालों को धमकी दी है और इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि इस्राईल, युद्ध के चरण से हारने के चरण में पहुंच चुका है और सैयद हसन नसरुल्लाह ने  कहा है कि अमरीका पर भरोसा नहीं किया जा सकता है और सीरिया या किसी भी अन्य क्षेत्र में अपने हर सहयोगी की पीठ में उसने घुरा घोंपा है और भविष्य में भी अपने घटकों को धोखा देगा।

      यह भी एक हक़ीक़त है कि इस्राईल के 80 प्रतिशत लोग, सैयद हसन नसरुल्लाह की बात पर विश्वास करते हैं और बाकी 20 प्रतिशत अपने नेताओं के बयानों पर भरोसा करते हैं। यह इस्राईल की  तेलहाय यूनिवर्सिटी के सर्वे रिपोर्ट का कहना है। यही वजह है कि इस्राईल के चैनल नंबर 10 पर इस्राईली विशेषज्ञ, हीज़ी सीमानतूफ़ ने बताया कि इस्राईली सैनिकों में मानसिक रोगियों की संख्या बढ़ी है और सन 2017 में लगभग 44 हज़ार इस्राईली सैनिक मनोरोग के केन्द्रों में गये हैं।

 

इस्राईली विशेषज्ञ, हीज़ी सीमानतूफ़ के बयान से एक तरफ तो इस्राईलियों में भय व आतंक फैला है दूसरी तरफ इस से सब को इस बात का पता चलता है कि अरब नेताओं के विपरीत, हसन नसरुल्लाह को इस्राईल की बड़ी अच्छी समझ है।

            इसी तरह इस्राईल में चैनल 12 और 13 का स्वामित्व वाली मीडिया कंपनी कहा कहना है कि सैयद हसन नसरुल्लाह ने इस्राईल और अमरीका को एक साथ धमकी दी है।

     दूसरी घटना जिससे इस्राईलियों में चिंता की लहर दौड़ गयी है, ईरानी रक्षा मंत्री की सीरिया यात्रा है यही वजह है कि इस्राईली मीडिया में इस यात्रा पर बहुत ध्यान दिया गया।

     इस्राईली मीडिया में इस बात पर चिंता देखी गयी है कि ईरान के रक्षा मंत्री ने अपनी दमिश्क यात्रा में सीरिया के साथ संबंध विस्तार पर बल देते हुए बताया है कि ईरान सीरियाई सेना के आधुनिकीकरण और उसे लैस करने में सहयोग करेंगे।

     दर अस्ल इस्राईल की नीति, ईरान व रूस के बीच दूरी पैदा करने पर आधारित है और वह रूस को इस बात पर तैयार करने की कोशिश कर रहा है कि वह ईरान से सीरिया से जाने को कहे मगर दोनों देशों में दूरी बनाने की इस्राईल की कोशिश अब तक नाकाम रही है क्योंकि मास्को ने बार बार यह दोहराया है कि ईरान उसका स्ट्रेटजिक घटक है और अब जिस तरह से अमरीका, फ्रांस और ब्रिटेन, सीरिया के युद्ध को लंबा खींचने के लिए उस पर हमले की तैयारी कर रहे हैं उससे तेहरान और मास्को में निकटता और बढ़ेगी और दोनों देश इदलिब की स्वतंत्रता में  अधिक शक्ति के साथ एक दूसरे को सहयोग देंगे।(Q.A.) (साभार, रायुल यौम लंदन)

 

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Aug २८, २०१८ १६:०५ Asia/Kolkata
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