•  ईरान, गले की हड्डी ... अब अमरीका ने सीरिया को लुभाने की कोशिश की...

कहा जा रहा है कि एक उच्च अमरीकी अधिकारी के नेतृत्व में एक अमरीकी प्रतिनिधिमंडल जून के अंतिम दिनों में सीरिया गया था। यह यात्रा, यूएई के एक हवाई जहाज़ से की गयी थी और इस अमरीकी अधिकारी ने सीरिया की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के कार्यालय के प्रमुख अली ममलूक से भेंट की थी।

            लेबनान से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्र अलअखबार ने इस संदर्भ में लिखा है कि अमरीकी प्रतिनिधिमंडल से होने वाली इस भेंट में अली ममलूक के अलावा, खुफिया एजेन्सियों के प्रमुख दीब ज़ैतून और सीरिया के चीफ आफ आर्मी स्टाफ के सहायक  मुवफ्फक़ असअद  भी उपस्थित थे।

     चार घंटों तक चलने वाली इस मुलाक़ात में क्षेत्रीय संकटों पर चर्चा हुई और इस भेंट में अमरीकी उच्चाधिकारी ने सीरिया के सामने कुछ मांगें रखी और कुछ वादे किये।

      अमरीका ने कहा कि वह अत्तनफ, और पूर्वी फुरात सहित पूरे सीरिया से अपने सैनिकों को पूरी तरह से एक कार्यक्रम के तहत निकालने पर तैयार है और इस प्रक्रिया की निगरानी सीरिया और रूस की सेना करेगी लेकिन अमरीका के इस क़दम के बदले दमिश्क़ को अमरीका की कुछ मांगे माननी पड़ेंगी।

 

      अमरीका की पहली मांग यह थी कि ईरान दक्षिणी सीरिया से पूरी तरह से निकल जाए, दूसरी मांग यह थी कि सीरिया लिखित रूप से यह वचन दे कि अपने पूर्वी क्षेत्र में तेल के कुओं में अमरीक कंपनियों को भी हिस्सा मिलेगा और तीसरी मांग यह थी कि सीरिया, अमरीकियों को उन सभी आतंकवादियों के बारे में सूचना देगा जो मारे गये हैं या जीवित बचे हैं और यह कि उनमें कितने विदेशी थे।

     अलअखबार ने लिखा कि सीरिया की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के कार्यालय के प्रमुख अली ममलूम ने अमरीकी प्रतिनिधिमंडल की मांगों का उत्तर इस प्रकार दिया कि पहली बात तो है कि आप सीरिया में अतिक्रमणकारी हैं, ताक़त के बल पर और बिना हमारी अनुमति के हमारे देश में आए हैं और उसी तरह से बाहर भी जा सकते हैं और जब तक अमरीकी हमारे देश से बाहर नहीं निकलते हम आप के साथ एक अतिक्रमणकारी सेना जैसा व्यवहार करेंगे। दूसरी बात यह है कि सीरिया एक अलग थलग रहने वाला देश नहीं है बल्कि एक व्यापक मोर्चे का हिस्सा है। ईरान के बारे में हमारा रुख स्पष्ट है और बश्शार असद ने अपने कई भाषणों में उसे बार बार दोहराया है। हमारा यह रुख है कि तेहरान, हिज़्बुल्लाह और सीरियाई सेना के साथ मिल कर आतंकवादियों से लड़ने वाले बलों के साथ सीरिया के गहरे संबंध हैं और इस तरह के वादे हमारे गठबंधन को प्रभावित नहीं कर सकते। तीसरी बात यह कि युद्ध के बाद हम उन मित्र और घटक देशों के साथ सहयोग को प्राथमिकता देंगे जिन्होंने सीरिया की जनता के खिलाफ साज़िश नहीं की और हम देशों की कंपनियों को सुविधाएं नहीं दे सकते जिनके देशों ने हमारे खिलाफ युद्ध किया और अब भी कर रहे हैं।

     आतंकवादियों के बारे में सूचनाएं दिये जाने के पर अली ममलूक ने कहा कि हम यह काम पहले कर चुके हैं और हम ने यूएई , जार्डन और आस्ट्रेलिया को इस बारे में मालूमात दी है और हम इन सूचनाओं के आप के लिए महत्व से भी अवगत हैं मगर अब हम यह कहते हैं कि अब जब तक आप के साथ हमारे राजनितक संबंध नहीं बन जाते और किसी भी क्षेत्र में आप  अमरीकियों के साथ सहयोग नहीं कर सकते।

अलहमीदान

 

     खबरों में बताया गया है कि अमरीकी प्रतिनिधिमंडल से भेंट के तत्काल बाद सऊदी अरब की खुफिया एजेन्सियों के प्रमुख खालिद अलहमीदान ने भी अली ममलूक को फोन किया और एक बार फिर सऊदी अरब की पुरानी मांग  दोहराते हुए ईरान से संबंध खत्म करने के बदले सीरिया के पुनर्निमाण का खर्चा उठाने का प्रस्ताव दिया।

      अलहमीदान ने इस टेलीफोनी वार्ता में सीधी भेंट का प्रस्ताव भी दिया जिस पर अली ममलूक ने कहा कि हम यहां सीरिया में हैं जो चाहे आकर  हम से मिल सकता है।

बनान के एक सांसद ने बताया है कि सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस ने हालिया दिनों में सीरिया के राष्ट्रपति बश्शार असद को लुभावना प्रस्ताव दिया जिसे राष्ट्रपति बश्शार असद को मानने से इन्कार कर दिया है।

   इस से पहले खबरों में बताया गया था कि  हिज़्बुल्लाह के सांसद नोवाफ ने अलमयादीन टीवी चैनल के साथ एक वार्ता में कहा था कि बिन सलमान ने बश्शार असद को प्रस्ताव दिया था कि अगर वह ईरान और हिज़्बुल्लाह से संबंध तोड़ लें तो सीरिया के पुनर्निमाण में सऊदी अरब निवेश करेगा।

      बिन सलमान ने बश्शार असद को अपने दूत द्वारा यह भी संदेश दिया था कि यदि वह ईरान और हिज़्बुल्लाह से दूरी बना लें तो सऊदी अरब उन्हें पूरी उम्र सीरिया का राष्ट्रपति बनाए रखने का समर्थन करेगा।

     याद रहे सऊदी अरब कई साल पहले भी बश्शार असद को इसी प्रकार का प्रस्ताव दे चुका है। (Q.A.)

  

 

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Aug २८, २०१८ १८:२९ Asia/Kolkata
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