• क्या तुर्की विश्व व्यवस्था में करेगा बड़ा उलट फेर? क्या भारत की तरफ बढ़ सकता है यह देश?

अरब जगत के प्रसिद्ध पत्रकार अब्दुल बारी अतवान ने तुर्की और अमरीका के संबंधों के वर्तमान और भविष्य तथा उसके परिणाम का जायाज़ा लिया है।

यह बड़ी स्वाभाविक बात थी कि तुर्की, रूस से एस-400 एन्टी मिसाइल सिस्टम खरीदने का इरादा छोड़ने पर अमरीका से एफ-35 युद्धक विमान लेने का अमरीकी प्रतिनिधिमंडल का प्रस्ताव अस्वीकार कर दे क्योंकि तुर्की, ईरान और पाकिस्तान की राह पर चल कर मिसाइल के क्षेत्र में आगे बढ़ने और अपने पैरों पर खड़े होने का प्रयास कर रहा है।  

वाशिंग्टन की परेशानी की यह वजह नहीं है कि तुर्की एस-400 जैसे आधुनिक मिसाइल सिस्टम का मालिक बन जाएगा, उसकी परेशानी की वजह यह भी नहीं है कि तुर्की नेटो की ओर से मुंह फेर र अब ईरान, चीन और भारत की ओर बढ़ रहा है और उत्तर की ओर अर्थात मास्को की  तरफ भी देख रहा है बल्कि उसे दुख इस बात का है कि इस तरह से तुर्की को अन्करा में इस प्रकार की मिसाइल बनाने की तकनीक भी मिल जाएगी।

वर्तमान अमरीकी सरकार का तो यह हाल है कि ट्रम्प जी, तलवार लेकर चारों ओर घुमा रहे हैं, एक तरफ चीन व रूस के खिलाफ आर्थिक मोर्चा खोल रखा है तो दूसरी ओर ईरान पर प्रतिबंध लगा रहे हैं और शायद भविष्य में तुर्की और यहां तक कि युरोपीय संघ को भी उनके प्रतिबंधों का सामना करना पड़े।

अमरीका को इस गठजोड़ की बेहद चिंता है

 

तुर्की का नेटो से निकलना या निकाला जाना तय है इसी लिए वह अब पूरब की ओर बढ़ रहा है जहां ईरान, पाकिस्तान और शायद इराक़ और सीरिया से गहरे संबंध बना ले इसके साथ ही वह ईरान , रूस और पाकिस्तान की मदद से परमाणु तकनीक के क्षेत्र में भी आगे बढ़ने की सोच सकता है  भारत भी पूरब का एक महत्वपूर्ण देश है तुर्की उससे भी हाथ मिला सकता है और जिस तरह के संकेत हैं उनसे यही लगता है कि तुर्की यह सब करके रहेगा।

तुर्की के लिए एफ-35 का प्रस्ताल लुभावना बिल्कुल नहीं है क्योंकि वह उसी तरह की क्षमता रखने वाला सुखोई-57 रूस से बिना किसी शर्त के ले सकता है जबकि अमरीका शर्त के साथ उसे युद्धक विमान बेचना चाह रहा है।

एस-400 मिसाइल सिस्टम

 

अस्ल में जब सऊदी अरब और तुर्की जैसे वाशिंग्टन के घटक, रूस से एस-400 मिसाइल सिस्टम खरीदने की बात करते हैं और यमन तथा अन्य कई मोर्चों पर विफल होने वाले पेट्रियाट एन्टी मिसाइल सिस्टम से मुंह फेर लेते हैं तो इसका मतलब यह है कि अमरीका का सैन्य उद्योग खतरे में है।

पेट्रियाट एन्टी मिसाइल सिस्टम

हम ने पहले भी कहा है और अब भी कहते हैं कि तुर्की की सही जगह, पूरब और इस्लामी जगत तथा रूस है। उसकी भलाई इसी में है कि वह पूरी तरह से या फिर काफी हद तक, अमरीका और नेटो से दूरी बना ले विशेषकर अमरीका की ओर से उसकी अर्थ व्यवस्था और उसकी करेन्सी लीरा के खिलाफ हालिया साज़िश के बाद उसे यह फैसला कर ही लेना चाहिए क्योंकि तुर्की सीरिया युद्ध में सिर्फ और सिर्फ अमरीका और उसके अरब दोस्तों की वजह से कूदा था  और अब वह सब उसे अकेला ही नहीं छोड़ चुके हैं बल्कि उसके खिलाफ भी उठ खड़े हुए हैं तो क्या हम खेल के इस मैदान में तुर्की को टीम बदलते देखेंगे? (Q.A.) ( साभारः रायुल यौम)

 

Aug ३०, २०१८ २०:३५ Asia/Kolkata
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