• यमनी बच्चों के नरसंहार के बाद सऊदी गठबंधन ने मानी ग़लती, क्या अब युद्ध रोकने की तैयारी कर रहे हैं बिन सलमान?

यह बात अच्छी है कि सऊदी अरब का गठन यमन पर चार साल से जारी हमलों में लगातार आम नागरिकों की हत्या के बाद अब यह मान रहा है कि एक महीने पहले सअदा प्रांत के उत्तरी नगर में बच्चों को ले जाने वाली बस पर बमबारी करके उसे युद्धक विमानों ने ग़लती की थी।

इस हमले में 51 बेगुनाह लोग मारे गए थे जिनमें 41 बच्चे थे। गठबंधन का यह भी दावा है कि इस ग़लती के ज़िम्मेदारों को सज़ा दी जाएगी तथा पीड़ित परिवारों को हर्जाना अदा किया जाएगा। मगर चिंता का विषय यह है कि सऊदी अरब के इस प्रकार के बयान हम कई बार पहले भी सुन चके हैं। जब भी सऊदी अरब ने यमन में नरसंहार किया उसके बाद इसी प्रकार के बयान आए ताकि जनमत का आक्रोश किसी सीमा तक शांति हो जाए।

अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार परिषद ने जो बयान जारी किया है उसमें साफ़ कहा गया है कि सअदा के उत्तर में किया जाने वाला नरसंहार युद्ध अपराध की श्रेणी में आता है। यही बात दूसरी भी कई अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं ने कही है। मगर सबसे महत्वपूर्ण बयान जिसने हमारे विचार में सऊदी अरब को शुरुआती इंकार से पीछे हटने पर मजबूर किया वह अमरीका का था। अमरीकी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हीथर नुएर्ट ने इस बयान में कहा था कि अमरीकी सरकार अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की ओर से आने वाली रिपोर्टों को गंभीरता से ले रहा है जिनमें यमन में युद्ध अपराध की बात कही जा रही है और इस युद्ध अपराध में दूसरे पक्षों के साथ सऊदी अरब भी शामिल है। प्रवक्ता ने कहा कि रिपोर्टों में अंतर्राष्ट्रीय क़ानूनों के हनन की जो बात कही जा रही है वह अमरीकी सरकार के लिए चिंता का विषय है।

अमरीकी सरकार की चिंता ही वास्तव में सऊदी शासन को चिंतित कर रही है क्योंकि अमरीका ही सऊदी अरब को आधुनिक युद्धक विमान और मिसाइल दे रहा है जिन्हें सऊदी अरब यमन युद्ध में प्रयोग कर रहा है और हज़ारों की संख्या में उन बेगुनाह यमनी नागरिकों को मार रहा है जो दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष करते हैं और जो महामारी से जूझ रहे हैं।

सऊदी अरब और इमारात के युद्धक विमानों जिनके बारे में इन देशों का दावा है कि वह युद्ध के सभी  नियमों का पालन करते हैं और केवल सैनिक लक्ष्यों को निशाना बनाते हैं पिछले लगभग चार साल में बार बार विवाह समारोहों, शोक समारोहों, स्कूलों, अस्पतालों, पानी के कारख़ानों और बाज़ारों को निशाना बनाकर आम नागरिकों बच्चों और महिलाओं का नरसंहार किया है।

सअदा में बच्चों का नरसंहार करने के बाद सऊदी गठबंधन के प्रवक्ता तुर्की अलमालेकी ने प्रेस कान्फ़्रेन्स में जो बयान दिया उसे सुनकर हम और हमारे जैसे लोग कांप उठे। प्रवक्ता ने कहा कि बच्चों की बस पर बमबारी भी वैध सैनिक कार्यवाही मानी जाएगी और यह कार्यवाही अंतर्राष्ट्रीय क़ानूनों के दायरे में आती है क्योंकि इस हमले में वह लोग मारे गए हैं जिन्होंने दक्षिणी सऊदी अरब के जाज़ान शहर पर किए गए बैलेस्टिक मिसाइल हमले की योजना बनाई और फिर उस योजना पर अमल किया।

हमारी समझ में यह नहीं आता कि जनरल मालेकी अब क्या कहेंगे जब उनके उच्च नेतृत्व ने इस हमले पर खेद जताया है और पीड़ितों को सांत्वना दी है तथा हर्जाना अदा करने के लिए कमेटी बनाने की बात कही है। वह मानवाधिकार परिषद की रिपोर्ट पर क्या प्रतिक्रिय देंगे जिसमें कहा गया है कि यह हमला युद्ध अपराध की श्रेणी में शामिल हो सकता है?

स्कूली बच्चे जिनके शवों के टुकड़े सारी दुनिया ने देखे और जो अपनी स्कूल बस में जा रहे थे कैसे मिसाइल फ़ायर कर सकते हैं बल्कि वह तो इतने छोटे बच्चे हैं कि किसी और शहर पर पत्थर भी  नहीं मार सकते।

मानवाधिकार परिषद की रिपोर्ट बिल्कुल सही है और विशेषज्ञों ने साक्ष्यों को अपनी आंख से देखकर इसे तैयार किया है। उन्होंने यमन पर सऊदी अरब के युद्ध को खुला हुआ अतिक्रमण कहा है। यह रिपोर्ट इस गठबंधन के लिए वार्निंग होनी चाहिए और उसे तत्काल इस युद्ध को बंद करने की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए।

साभार रायुल यौम

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Sep ०३, २०१८ १६:५६ Asia/Kolkata
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