Sep ०३, २०१८ १८:०४ Asia/Kolkata
  • सीरिया का इदलिब शहर बन गया है क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय राजनीति का केन्द्र, बड़ी ताक़तों की लगी हैं नज़रें

उत्तरी सीरिया का इदलिब प्रांत इस समय राजनैतिक और प्रचारिक हल्क़ों के ध्यान का केन्द्र बना है। कारण यह है कि सीरिया की सेना इस इलाक़े में सैनिक आप्रेशन शुरू करने की तैयारी पूरी कर चुकी है।

इस संदर्भ में कुछ महत्वपूर्ण घटनाएं हुई हैं। इस समय ईरान के विदेश मंत्री मुहम्मद जवाद ज़रीफ़ दमिश्क़ के दौरे पर गए हैं जहां सीरियाई विदेश मंत्री वलीद अलमुअल्लिम तथा अन्य अधिकारियों से उनकी मुलाक़ातें हुई हैं।

सरिया के विदेश मंत्री वलीद अलमुअल्लिम ने बयान दिया है कि ईरान में तुर्की, रूस और ईरान की शिखर बैठक में इदलिब को आज़ाद कराने के विषय पर मुख्य रूप से चर्चा होगी। यह बैठक आगामी 7 सितम्बर को होने वाली है।  

उधर तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोग़ान ने अन्नुस्रा फ़्रंट का समर्थन रोककर यह कह दिया है कि वह आतंकी संगठन है। इससे पहले तुर्की ने इस संगठन से मांग की थी कि वह ख़ुद का भंग करके अपने लड़ाकों से कह दे कि वह हथियार छोड़ दें। मगर अन्नुस्रा फ़्रंट ने तुर्की की यह बात नहीं मानी।

रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोफ़ ने भी बयान दिया है कि सीरिया के उत्तरी इलाक़े इदलिब में जो स्थिति यह अनंतकाल तो जारी नहीं रह सकती। यह ज़रूरी है कि विद्रोही संगठनों और आतंकी संगठनों को एक दूसरे से अलग किया जाए। मास्को में इंटरनैशनल रिलेशन्स सेंटर में भाषण देते हुए लावरोफ़ ने कहा कि इदलिब में बार बार संघर्ष विराम का उल्लंघन किया जा रहा है। यहां से सीरियाई सेना के ठिकानों पर गोलाबारी की जाती है बल्कि सेना के ठिकानों पर बड़े हमले की कोशिशें भी हो रही हैं। यही नहीं इदलिब से हमारी हमीमीम छावनी पर ड्रोन विमानों से हमले करने की भी कोशिश हो चुकी है। अब तक 50 ड्रोन विमानों को गिराया जा चुका है। इस स्थिति पर हमेशा के लिए ख़ामोश नहीं रहा जा सकता। हम तुर्की, सीरिया और ईरान के अधिकारियों से बात कर रहे हैं कि विद्रोही संगठनों और आतंकी संगठनों को एक दूसरे से अलग किया जाए और फिर आतंकी संगठनों के खिलाफ़ इस तरह कार्यवाही की जाए कि आम नागरिक निशाना न बनें। सीरिया में आतंकियों के लिए कोई स्थान नहीं है और सीरियाई सरकार को पूरा अधिकार है कि आतंकियों का सफ़ाया करने के लिए कार्यवाही करे।

ईरान के विदेश मंत्री जवाद ज़रीफ़ की दमिश्क़ यात्रा की बात की जाए तो इदलिब की लड़ाई से पहले होने वाली यह यात्रा बहुत महत्वपूर्ण है। वैसे ईरान, तुर्की और रूस की शिखर बैठक पहले यह यात्रा इसलिए हो रही है कि शिखर की बैठक की तैयारियों को पूरा किया जाए।

दमिश्क़ पहुंचने के बाद जवाद ज़रीफ़ ने भी कहा कि सीरिया इस समय अपनी पूरी धरती को आतंकवाद से साफ़ कर रहा है। अब अन्नुस्रा फ़्रंट तथा अन्य आतंकी संगठनों के लिए ज़रूरी है कि वह सीरिया की धरती छोड़ दें।

ईरान, सीरिया, रूस और तुर्की के अधिकारियों के बयानों का जायज़ा लिया जाए तो यह बात साफ़ हो जाती है कि इदलिब को आतंकियो के क़ब्ज़े से आज़ाद कराने का फ़ैसला लिया जा चुका है और अब कभी भी सैनिक आप्रेशन शुरू हो सकता है। एक महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि इससे पहले एलेप्पो और पूर्वी ग़ूता जैसे इलाक़ों में जब सीरियाई सेना और घटक फ़ोर्सेज़ का आप्रेशन हुआ तो अंतिम विकल्प के रूप में आतंकियों ने हथियार डाले और अपने परिवारों के साथ वहां से निकलकर इदलिब चले गए मगर अब जब इदलिब पर सैनिक आप्रेशन होने जा रहा हो तो आतंकी संगठनों का सफ़ाया तय है क्योंकि इन आतंकियों को सीरिया के भीतर या बाहर कहीं भी नहीं भेजा जा सकता।

जिस समय सीरिया का संकट शुरुआती दौर में था और अलग अलग देशों से आतंकियों और चरमपंथियों को एकत्रित करके सीरिया लाया जा रहा था उस समय हिज़्बुल्लाह लेबनान के प्रमुख सैयद हसन नसरुल्लाह ने आतंकियों से कहा था कि वह किसी धोखे में न रहें उन्हें एक योजना के तहत सीरिया में एकत्रित किया जा रहा है ताकि एक साथ उन सबका सफ़ाया कर दिया जाए। यदि आज इदलिब आप्रेशन को देखा जाए तो यह बही जा सकती है कि सैयद हसन नसरुल्लाह का बयान बिल्कुल सही था। जो लोग धोखे में आ गए और बड़ी ताक़तों तथा उनके क्षेत्रीय घटकों की योजना का हिस्सा बनकर सीरिया में जमा हो गए उनके पास अब मौत के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है।

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