• इदलिब आप्रेशन की उल्टी गिनती और इस्राईल के ताज़ा हमले का राज़

सीरिया के इदलिब प्रांत को आतंकवादियों से साफ़ करने की सीरियाई सेना की कार्यवाही अभी शुरु भी नहीं हुई है कि ज़ायोनी शासन के युद्धक विमानों ने वादिए उयून हमा पर बमबारी कर दी।

सीरिया संकट के आरंभ से अब तक इस्राईल, सीरिया पर आतंकवादियों के समर्थन में कई बार हमले कर चुका है। अब सवाल यह पैदा होता है कि इस्राईल ने ही सबसे पहले हमला क्यों किया?

सीरिया के मामले में संयुक्त राष्ट्र संघ के विशेष दूत स्टीफ़न डि मिस्तूरा ने सीरिया में आतंकवादियों के गढ़ इदलिब में सेना के आप्रेशन शुरु करने के समय की जैसे ही घोषणा की और कहा कि 10 सितम्बर को सीरिया की सेना की ओर से दी गयी समयावधि समाप्त हो जाएगी, ज़ायोनी शासन ने हमा के वादिए उयून पर मीज़ाइलों की बारिश कर दी, ज़ायोनी शासन का यह मीज़ाइल हमला वास्तव में इदलिब में सीरियाई सेना की ओर से आप्रेशन शुरु किए जाने पर रोष है। ज़ायोनी शासन ने इसी के साथ सीरिया में मौजूद 70 हज़ार आतंकवादियों से अपने समर्थन की खुल्लम खुल्ला घोषणा कर दी।

इस बात की अनदेखी करते हुए कि इस्राईल की इस चेतावनी को सीरिया सरकार और उसके घटकों ने किस सीमा तक लिया या उन पर कितना प्रभाव पड़ा, यहां पर हम इदलिब आप्रेशन के कुछ बिन्दुओं पर प्रकाश डालने जा रहे हैं:

1-  यद्यपि सीरिया के मामले में संयुक्त राष्ट्र संघ के विशेष दूत स्टीफ़न डि मिस्तूरा की ओर से घोषित की गयी तारीख़ केवल सुनी सुनाई है किन्तु वास्तव में इस आप्रेशन में हो रही देरी का मुख्य कारण तेहरान में शुक्रवार को ईरान, रूस और तुर्की का शिखर सम्मेलन है जिसमें इदलिब और सीरिया में आतंकवादियों के भविष्य के मुद्दे पर विचार विमर्श किया जाएगा। यह बात स्पष्ट है कि चाहे देर सवेर से इदलिब में सैन्य आप्रेशन तो होना ही है और सीरिया सरकार और उसके घटकों ने आतंकवादियों के अंतिम गढ़ इदलिब को जीतने का संकल्प कर लिया है।

2- इदलिब में सैन्य आप्रेशन शुरु होने से पहले, रीफ़े लाज़ेक़िया, उत्तरी हमा और पश्चिमी हलब जैसे क्षेत्रों में अब भी आतंकवादी मौजूद हैं जिनको खदेड़ना आवश्यक है। यदि हालिया दिनों में सीरिया के विभिन्न क्षेत्रों में बिखरा हुआ सैन्य आप्रेशन अंजाम दिया गया किन्तु ऐसा प्रतीत हो रहा है कि भविष्य में इन क्षेत्रों से आतंकियों को खदेड़ने का विषय पूरी गंभीरता से अंजाम दिया जाएगा और ज़ायोनी शासन के हालिया मीज़ाइल हमला भी इस मामले से जुड़ा हुआ है।

3- पिछले कुछ दिनों में भूमध्य सागर में सीरियाई तट पर रूसी सेना के व्यापक वायु और समुद्री सैन्य अभ्यास के कुछ संदेश है जो सीरिया पर हर प्रकार के मीज़ाइल हमले से मुक़ाबले की तत्परता की घोषणा है। उधर तुर्की ने भी हय्यते तहरीरे शाम नामक आतंकवादी गुट का समर्थन न करने की घोषणा कर दी है, इसी के साथ ईरान के रक्षा और विदेशमंत्रियों के सीरिया दौरे से यह पता चलता है कि आतंकवाद से संघर्ष में सीरिया और उसके घटक देश पूरी तरह से दमिश्क़ सरकार के साथ हैं, इससे यह परिणाम भी निकाला जा सकता है कि इदलिब की स्वतंत्रता निश्चित है और यह भी कहा जा सकता है कि इदलिब की स्वतंत्रता का सपना निकट भविष्य में साकार होने वाला है।

4- इदलिब को लेकर हालिया दिनों में डि मिस्तूरा की कुछ कार्यवाहियां, वास्तव में संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से सीरिया और इदलिब की जनता के लिए चिंता से पहले, अमरीका और पश्चिमी देशों के हितों की रक्षा दिखाई देती है क्योंकि इदलिब आप्रेशन इससे पहले की सीरियाई जनता के लिए ख़तरा बने, पश्चिमी देशों की ओर आतंकवादियों की एक लहर उठ जाएगी जो सीरियाई सेना के हाथों अपनी पराजय के बाद यूरोप का रुख़ करेंगे और अब यूरोपीय देशों को अपने कल के बिगड़े हुए बेटों और आज के दुश्मनों को अपनी धरती पर स्वीकार करना पड़ेगा।

सीरिया के मामले में संयुक्त राष्ट्र संघ के विशेष दूत स्टीफ़न डि मिस्तूरा ने इदलिब में मौजूद आतंकवादियों की संख्या 10 हज़ार बताई है और उन्होंने इदलिब आप्रेशन को रोकने के लिए क्या कुछ नहीं किया और इदलिब की कार्यवाही को ख़ून का दरिया बहाने का नाम दिया।

5- इदलिब में सेना की कार्यवाही को विलंबित करने के प्रयास का अर्थ,  अमरीका को मौक़ा देना है। अमरीका समय लेकर उत्तरी सीरिया में निषेध क्षेत्र बनाकर, एक ओर इस सीरिया में आतंकवादियों को बचाने का प्रयास करेगा और दूसरी ओर उत्तरी सीरिया के संपन्न क्षेत्रों में अपने हितों की रक्षा करेगा। इससे पहले अमरीका, फ़्रांस और ब्रिटेन का इदलिब में असद सरकार द्वारा रासायनिक हथियारों के प्रयोग के बहाने पर दिए गये बयानो को इसी परिधि में देखना चाहिए।

इदलिब आप्रेशन का सबसे महत्वपूर्ण बिन्दु यह है कि यहां पर मौजूद आतंकवादी आम नागरिकों को मानवीय ढाल के रूप में प्रयोग कर रहे हैं और यह भी संभावना व्यक्त की जा रही है कि आतंकवादियों का यह इरादा है कि वह विजयी लोगों के हवाले खंडहर क्षेत्र करें। बहरहाल इदलिब में आतंकवादियों की उलटी गिनती शुरु हो चुकी है जैसा कि हलब में हुआ या जैसा कि इराक़ के मूसिल शहर में हुआ, युद्ध लंबा खिंचा और गलियों और कूचों तथा सड़कों और घरों से युद्ध लड़ा गया। यही वजह है कि सीरिया सरकार और उसके घटकों ने बहुत सही सटीक कार्यक्रम बनाए हैं और यह कि ज़ायोनी शासन के हालिया हमलों का उस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। (AK)

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Sep ०६, २०१८ १६:५८ Asia/Kolkata
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