यमनी गुटों के मध्य 6 सितंबर को जनेवा में होने वाली वार्ता क्यों विलंबित हो गयी ?

संयुक्त राष्ट्रसंघ ने घोषणा की है कि यमनी गुटों के मध्य जो वार्ता 6 सितंबर से जनेवा में आरंभ होने वाली थी वह विलंबित हो गयी है।

यमन के खिलाफ सऊदी अरब और उसके घटकों का हमला आरंभ हुए 42 महीने का समय बीत रहा है।

इस मध्य राष्ट्रसंघ ने एक खिलाड़ी के रूप में यमनी गुटों के बीच एक मध्यस्थ की भूमिका निभाने का प्रयास किया है। राष्ट्रसंघ ने यमन के मामलों में एक विशेष दूत नियुक्त करके यमनी गुटों के मध्य वार्ता कराने की भूमि उपलब्ध करने का प्रयास किया है।

यमनी गुटों के मध्य वार्ता का अंतिम दौर कुवैत में हुआ था जो अगस्त में 100 दिनों के बाद किसी परिणाम के बिना समाप्त हो गया।

महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि यमनी गुटों के मध्य 6 सितंबर को जनेवा में होने वाली वार्ता क्यों विलंबित हो गयी जबकि यमनी जनता को इस समय विषम व चिंताजनक परिस्थितियों का सामना है और राष्ट्रसंघ के महासचिव के कथनानुसार स्वयं यमन को समय के सबसे बड़े मानवीय संकट का सामना है।

इस सवाल के जवाब में जानकार हल्कों का कहना है कि वार्ता के विलंबित होने का महत्वपूर्ण कारण सऊदी गठबंधन के उल्लंघन से संबंधित है क्योंकि यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन की राजनीतिक परिषद ने घोषणा की थी कि उसका प्रतिनिधिमंडल जनेवा में होने वाली वार्ता में भाग लेगा।

इस संबंध में एक रोचक बात यह है कि सऊदी गठबंधन उस विमान को उड़ने की अनुमति नहीं दे रहा है जो तय यह था कि ओमान से सना हवाई अड्डे पर उतरेगा और अंसारुल्लाह के प्रतिनिधिमंडल को लेकर जनेवा जायेगा।

इससे बिल्कुल साफ है कि वार्ता के विलंबित होने का मुख्य कारण सऊदी अरब है। इससे पहले भी जो वार्ता होने वाली थी उसे भी रोकवाने के लिए सऊदी अरब ने यही शैली अपनाई थी।

सऊदी अरब और उसके घटक यमनी बच्चों और महिलाओं को लगातार लक्ष्य बना रहे हैं और इसी वजह से उन पर जनमत का दबाव है फिर भी वह यमनी गुटों के मध्य वार्ता के इच्छुक नहीं हैं क्योंकि वार्ता न होने को वे अपने हित में समझ रहे हैं।

बहरहाल कहा जा सकता है कि यमन संकट का समाधान केवल राजनीतिक मार्गों से किया जा सकता है और उसका कोई सैन्य समाधान नहीं है। MM

 

 

Sep ०६, २०१८ २०:४७ Asia/Kolkata
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