सऊदी किंग सलमान बिन अब्दुल अज़ीज़ के छोटे भाई अहमद बिन अब्दुल अज़ीज़ क्या अब स्वदेश नहीं लौटेंगे या सऊदी अरब वापसी पर उन्हें मौत की सज़ा का सामना करना पड़ सकता है?

हाल ही में लंदन में आले सऊद शासन के अपराधों का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए किंग सलमान के भाई ने उनसे कहा था, मेरे भाई (किंग सलमान) और भतीजे युरवाज मोहम्मद बिन सलमान) के अपाराधों के लिए पूरे आले सऊद परिवार को अपराधी ठहराना सही नहीं होगा।

प्रिंस अहमद के इस बयान के बाद यहीं अंदाज़ा लगाया जा रहा है कि अब वह वापस रियाज़ नहीं लौटना चाहेंगे, क्योंकि सऊदी अरब वापस लौटने पर उन्हें या तो जेल में डाल दिया जाएगा या सरकार के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ने का आरोप लगाकर उनका सिर क़लम कर दिया जाएगा।

यमन में जारी सऊदी अरब के युद्ध अपराधों के ख़िलाफ़ लंदन में लोग प्रदर्शन कर रहे थे और नारे लगा रहे थे, "अपराधी परिवार आले सऊद मुर्दाबाद", वहां से गुज़र रहे प्रिंस अहमद ने प्रदर्शनकारियों को टोका और कहा, आप लोग आले सऊद परिवार को क्यों बुरा भला कह रहे हैं? इन अपराधों से पूरे आले सऊद परिवार का क्या लेना देना है? इसके लिए कुछ ही लोग ज़िम्मेदार हैं, इसलिए पूरे परिवार पर आरोप नहीं लगाएं।

प्रदर्शनकारियों पलटकर सऊदी प्रिंस से पूछ लिया कि फिर कौन ज़िम्मेदार है? इस पर सऊदी किंग के भाई प्रिंस अहमद ने कहा, "किंग और उनका बेटा युवराज और देश के अन्य अधिकारी।

कुछ ही घंटों में प्रिंस का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके तुरंत बाद सऊदी अरब की सरकारी न्यूज़ एजेंसी एसपीए ने प्रिंस के बयान को ख़ारिज करते हुए इसे अनुचित क़रार दे दिया।

हालांकि सऊदी प्रिंस के एक निटक सूत्र ने मिडिल ईस्ट आई वेबसाइस से बात करते हुए कहा है कि प्रिंस अपने बयान पर क़ायम हैं।

ऐसा पहली बार हुआ है कि आले सऊद परिवार के किसी प्रिंस या इतने वरिष्ठ सदस्य ने परिवार की चुप्पी साधे रहने वाली परम्परा को तोड़कर सच बयान किया हो। प्रिंस ने सार्वजनिक रूप से ख़ुद को और आले सऊद परिवार को किंग सलमान और युवराज मोहम्मद बिन सलमान की क्षेत्र में विनाशकारी नीतियों से अलग कर लिया। अब अगर वह सऊदी अरब नहीं लौटने की घोषणा करते हैं तो यह किंग सलमान के शासन के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।

किंग सलमान के भाई प्रिंस अहमद के इस बयान से यह स्पष्ट हो जाता है कि यमन के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ने के फ़ैसले से आले सऊद परिवार सहमत नहीं था, बल्कि यह क़दम सिर्फ़ सऊदी अरब के अनुभवी युवराज की युद्ध की सनक के चलते उठाया गया है, जिससे तेल से समृद्ध यह अरब देश एक बड़ी दलदल में फंस गया है।

सऊदी सूत्रों का मानना है कि मार्च 2015 से यमन के ख़िलाफ़ जारी यह युद्ध मोहम्मद बिन सलमान ने सत्ता पर अपनी पकड़ बनाने और परिवार में विरोधी आवाज़ों को कुचलने के लिए शुरू किया था।

हालांकि यमन युद्ध जिसे सऊदी अरब के अनुभवि रक्षा मंत्री एवं युवराज मोहम्मद बिन सलमान ने एक तर निवाला समझकर गले में उतारना चाहा था, अब उनके गले की हड्डी बन गया है।

यमन युद्ध में साढ़े तीन साल बीत जाने के बाद भी सऊदी अरब को किसी तरह की कोई सफलता प्राप्त नहीं हुई है, बल्कि अब ख़ुद आले सऊद परिवार में इसका मुखर विरोध शुरू हो गया है। msm

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Sep ०८, २०१८ १५:५७ Asia/Kolkata
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