• सऊदी अरब में मुफ़्ती की गरदन पर लटकी तलवार, आतंकी संगठन से संपर्क का आरोप

सऊदी अरब की एक विशेष अदालत में सीरियाई मुफ़्ती पर मुक़द्दमा चल रहा है।

शैख़ मुहम्मद बिन सालेह अलमुंजिद नाम के मुफ़्ती सीरियाई नागरिक हैं लेकिन वह सऊदी अरब में पिछले कई सालों से रह रहे हैं। जिस समय सीरिया संकट शुरू हुआ और बश्शार असद की सरकार को गिराने के लिए सऊदी अरब, क़तर और इमारात सहित अनेक क्षेत्रीय देश और अंतर्राष्ट्रीय शक्तियां सब लामबंद हुए उस समय सऊदी अरब ने मुफ़्तियों को खुली छूट और आज़ाद प्लेटफ़ार्म दे दिया। पूर्व सऊदी विदेश मंत्री सऊदुल फ़ैसल ने देश के नेतृत्व की सहमति से विदेशी और सऊदी मुफ़्तियों को अनुमति दे दी कि वह सीरिया की बश्शार असद सरकार के विरुद्ध जिस तरह भी संभव है आम लोगों को भड़काएं। इन मुफ़्तियों में एक मुहम्मद बिन सालेह अलमुंजिद हैं जिन्हें इस समय गंभीर आरोपों का सामना है। अलमुंजिद के बारे में कहा जाता है कि वह चल फिर नहीं सकते इसलिए व्हील चेयर पर बैठकर अदालत में पहुंचे थे। अभियोजन पक्ष ने अलमुंजिद पर आरोप लगाया कि आतंकी संगठन अन्नुस्रा फ़्रंट से उनके संबंध हैं, वह इस संगठन के तत्वों से टेलीफ़ोन पर बातचीत करते रहते हैं और ज़रूरत के हिसाब से उन्हें फ़तवे भी देते हैं। इसी प्रकार सीरिया और इराक़ में लड़ने वाले दूसरे चरमपंथी संगठनों से भी उनका संबंध है।

अलमुंजिद पर यह भी आरोप लगाया गया है कि वह मुस्लिम ब्रदरहुड के समर्थक हैं। इस संगठन का समर्थक होना सऊदी अरब में अपराध है।

क्या कारण है कि जिन मुफ़्तियों को सऊदी सरकार ने पहले खुली छूट दी बल्कि उनकी मदद ली और उनकी मदद से उसने सीरिया और इराक़ में लोगों को उत्तेजित किया। जिनकी मदद से कई आतंकी संगठ बनवाए गए। जो मुफ़्ती सऊदी अरब में वीआईपी हस्तियों की तरह रहते थे और जिनके साथ सुरक्षा गार्ड चलते थे अब उनको इन्हीं गतिविधियों के लिए गंभीर आरोपों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि पहले सऊदी सरकार इन गतिविधियों को ख़ुद भी बढ़ावा देती थी।

अलमुंजिद तथा अन्य मुफ़्तियों को जानने वाले लोगों ने सोशल मीडिया पर अपना विचार व्यक्त किया है कि इन मुफ़्तियों पर जो आरोप लगे हैं वह सब सही हैं लेकिन यह भी सही है कि इन मुफ़्तियों ने सऊदी सरकार के इशारे पर और उसकी इच्छा के अनुसार यह गतिविधियां की हैं। इस समय एकमात्र बदलाव यह हुआ है कि सऊदी अरब-कतर विवाद में इन मुफ़्तियों का रुजहान क़तर की ओर रहा या उन्होंने यह किया कि सऊदी अरब या क़तर में किसी का भी समर्थन न करते हुए निष्पक्ष रहना ज़्यादा बेहतर समझा। सऊदी अरब के वर्तमान नेतृत्व को यह बर्दाश्त नहीं है कि कोई निष्पक्ष रहे। सऊदी नेतृत्व का मानना है कि उनकी नीतियों और फ़ैसलों का समर्थन करना मुफ़्तियों का कर्तव्य है। कुछ मुफ़्ती एसा कर ही रहे हैं। कुछ मुफ़्ती तो यहां तक कह रहे हैं कि सऊदी नरेश टीवी कैमरों के सामने आधे घंटे तक रेप करें तब भी जनता के लिए ज़रूरी है कि नरेश का आज्ञापालन करे।

अलमुंजिद वैसे तो सीरियाई  नागरिक हैं लेकिन उनका जन्म 1961 में रियाज़ में हुआ और वहीं उन्होने किंग फ़हद विश्व विद्यालय से शिक्षा प्राप्त की। उनके बारे में कहा जाता है कि उन्होंने वर्ष 1997में इस्लाम सवाल जवाब नाम से एक वेबसाइट बनाई थी। इससे पहले वह इमामे जमाअत थे।

अलमुंजिद अपने फ़तवों के कारण पहले भी विवादों में रह चुके हैं। एक बार उन्होंने फ़तवा दिया था कि खेल से जुड़े विषयों का विशलेषण हराम है क्योंकि यह समय की बर्बादी है। अलमुंजिद ने मिकी माउस को मार डालने का फ़तवा भी दिया था हालांकि बाद में उन्हें यह फ़तवा वापस लेन पड़ा।

इस समय सऊदी अरब में मुफ़्तियां की आफ़त आई हुई है और एक एक करके उन्हें जेल भेजा जा रहा है। अलमुंजिद के लिए अभियोजन पक्ष ने रविवार की सुनवाई में अदालत से मांग की तलवार से उनकी गरदन उड़ा दी जाए। अब देखना यह है कि अलमुंजिद का अंजाम क्या होता है और आगे किसकी बारी आती है।  

Sep १०, २०१८ १८:०० Asia/Kolkata
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