• मोहर्रम के महीने में बहरैन में आले ख़लीफ़ा सरकार के अत्याचारों में वृद्धि

मोहर्रम का महीना शुरू होते ही बहरैन में आले ख़लीफ़ा शासन के इस देश के बहुसंख्यक शिया मुसलमानों पर अत्याचार बढ़ गए हैं।

बहरैनी सुरक्षा बलों ने गली-कूचों और इमामबाड़ों के बाहर लगने वाले अज़ादारी के प्रतीकों को नष्ट करना शुरू कर दिया है और अलमों को फाड़ डाला है।

हालांकि आले ख़लीफ़ा शासन के यह अत्याचार कोई नई बात नहीं है, बल्कि 2011 के बाद से इसमें अत्यधिक वृद्धि देखने में आई है, लेकिन मोहर्रम के महीने में अन्य महीनों को तुलना में यह अत्याचार अभूतपूर्व रूप से बढ़ जाते हैं।

बहरैन में धार्मिक हिंसा की जड़ें बहुत गहरी हैं और बहुत ही सिस्टमैटिक तरीक़े से सरकारी सतह पर इसे अंजाम दिया जा रहा है।

फ़ार्स खाड़ी के इस छोटे से अरब देश में धार्मिक हिंसा का एक कारण यह है कि आले ख़लीफ़ा परिवार अल्प संख्यक वर्ग से है, जबकि देश की बहुसंख्यक आबादी शिया मुसलमानों की है, दूसरे यह कि यह परिवार मूल रूप से बहरैनी नहीं है, बल्कि यह मूल रूस से सऊदी अरब का है। यही कारण है कि तानाशाही परिवार ने देश की डेमोग्राफ़ी बदलने का काफ़ी प्रयास किया है और दूसरे देशों से सुन्नी मुसलमानों को लाकर यहां बसाया है। इसके बावजूद शिया मुसलमानों की आबादी अधिक है, जो देश की कुल आबादी का 65 फ़ीसद हैं।

बहरैन में शिया मुसलमानों के ख़िलाफ़ आले ख़लीफ़ा परिवार के अत्याचारों का एक कारण इस परिवार का वहाबी विचारधार से प्रभावित होना है।

क़ानूनी मामलों के विशेषज्ञ सैय्यद यूसुफ़ अल-मुहाफ़ेज़ा का कहना है कि शिया मुसलमानों के साथ भेदभाव और साम्प्रदायिक हिंसा एक ऐसा सच है जिसका इनकार नहीं किया जा सकता, बल्कि यह एक ऐसी वास्तविकता है कि जिसकी गवाही इस देश के सुन्नी मुसलमान तक देते हैं।

वहाबी विचारधारा के कारण आले ख़लीफ़ा परिवार का आले सऊद परिवार से काफ़ी निकट संबंध है। आले सऊद परिवार भी सऊदी अरब में शिया मुसलमानों पर अत्याचार करता है और इस अरब देश में भी उनके साथ बड़े पैमाने पर भेदभाव किया जाता है।

 

Sep १२, २०१८ १८:२० Asia/Kolkata
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