• ट्रम्प प्रशासन डील आफ़ सेंचुरी की तैयारी कर रहा है, महमूद अब्बास को पांच अरब डालर की रिश्वत की पेशकश

आजकल डील आफ़ सेंचुरी को लेकर बड़ी कोशिशें हो रही हैं जिसे अमरीकी प्रशासन फ़िलिस्तीनी जनता और रामल्ला स्थित फ़िलिस्तीनी नेतृत्व पर थोप देना चाहता है, इन कोशिशों में फ़िलिस्तीन को दी जाने वाली आर्थिक सहायताओं को रोकना और वाशिंग्टन में फ़िलिस्तीन का कूटनैतिक मिशन बंद करना शामिल है।

इस्राईली अख़बारों में इन दिनों यह ख़बरें बार बार आ रही हैं कि राष्ट्रपति ट्रम्प और उनके दामाद जेर्ड कुशनर डील आफ़ सेंचुरी की विस्तार के साथ घोषणा कर देना चाहते हैं अब फ़िलिस्तीनी उसे स्वीकार करें या न करें इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ेगा। इन अख़बारों के अनुसा कुशनर ने कहा है कि फ़िलिस्तीनियों को दी जाने वाली सारी आर्थिक सहायताएं बंद करना ज़रूरी है क्योंकि उन्होंने अमरीकी प्रशासन की छवि ख़राब की है।

ट्रम्प को इस डील के ब्योरे की घोषणा करने की ज़रूरत नहीं है जिस पर उन्होंने पहले से ही अमल शुरू कर दिया है अतः उन्होंने बैतुल मुक़द्दस को इस्राईल की राजधानी घोषित कर दिया और अमरीकी दूतावास वहीं स्थानान्तरित कर दिया। अनरवा जो फ़िलिस्तीनी शरणार्थियों के स्वदेश वापसी के अधिकार का प्रतीक है उसको दी जाने वाली आर्थिक सहायता रोक दी। इसी तरह बैतुल मुक़द्दस के असपतालों को दी जाने वाली 25 मिलियन डालर की आर्थिक मदद भी बंद कर दी है ताकि इस शहर में रहने वाली अरब आबादी पर दबाव बढ़ जाए।

इस दबाव के सामने फ़िलिस्तीनी राष्ट्र नहीं झुका और न ही उस लालच में आया जो फ़िलिस्तीनी नेतृत्व के सामने वार्ता की मेज़ पर लौटने के लिए 5 अरब डालर के रूप में पेश की गई। क्योंकि उसे वार्ता के लिए तो बुलाया जा रहा है लेकिन इस शर्त के साथ कि बैतुल मुक़द्दस को भूल जाए और फ़िलिस्तीनी शरणार्थियों के स्वदेश वापसी के अधिकार की बात न करे वह भी कब जब ओस्लो समझौते को 25 साल की वर्षगांठ गुज़री है जो अरब इतिहास का सबसे बड़ा धोखा था।

ट्रम्प और उनके दामाद की पृष्ठिभूमि रियल स्टेट व्यापारियों की है उनकी समझ में व्यापारिक सौदे और पैसे के अलावा कुछ भी नहीं आता अतः वह फ़िलिस्तीन मुद्दे के मामले में भी इसी सोच के साथ नीतियां बना रहे हैं। इससे साफ़ ज़ाहिर है कि वह फ़िलिस्तीनी राष्ट्र और प्रतिरोध की भावना से भरी बस्तियों को नहीं समझ सकते। यह राष्ट्र अपनी धरती और अने अधिकार को हरगिज़ भूल नहीं सकता चाहे दुनिया की सारी दौलत उसे दे दी जाए।

ट्रम्प फ़िलिस्तीनियों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता रोक दें, वाशिंग्टन में फ़िलिस्तीन का दूतावास बंद कर दें, फ़िलिस्तीनी राजदूत होसाम ज़मलत और उनके परिवार को बाहर निकाल दें, बैतुल मुक़द्दस के अस्पतालों की आर्थिक सहायता बंद कर दें मगर उन्हें और उनके दामाद कुशनर को यह ज़रूर याद रखना चाहिए कि उन्हें एक भी फ़िलिस्तीनी नहीं मिलेगा जो इस समझौते पर हस्ताक्षर करे या इसके अनुच्छेदों के बारे में बात करे और यदि उनहें कोई मिला भी तो वह अपने अलावा किसी का भी प्रतिनिधि नहीं होगा या उन अमरीकियों और इस्राईलियों का प्रतिनिधि होगा जिनके साथ वह काम करता होगा।

राष्ट्रपति ट्रम्प को मोहरों की ज़रूरत है जो उनसे डिक्टेशन लें और इस्राईल तथा वहां बसे ग़ैर क़ानूनी निवासियों के हथकंडे के रूप में काम करे जैसे पश्चिमी तट की सुरक्षा फ़ोर्सेज़ कर रही हैं जो ख़ुद को फ़िलिस्तीनी कहती हैं हालांकि फ़िलिस्तीनी राष्ट्र पर उन्होंने ख़ुद को थोप रखा है। इस हक़ीक़त का पता इससे भी लगता है कि ट्रम्प ने सभी संस्थाओं और अस्पतालों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता रोक दी है मगर फ़िलिस्तीनी सुरक्षा फ़ोर्सेज़ की आर्थिक सहायता नहीं रोकी है।

महमूद अब्बास अमरीका की इस घटिया हरकत पर जो भी प्रतिक्रिया दिखाएं और अमरीकी अधिकारियों से मुलाक़ातें करने से इंकार कर दें मगर चूंकि उन्होंने इस्राईल से सेक्युरिटी कोआर्डिनेशन जारी रखा है और सुरक्षा फ़ोर्सेज़ के लिए वह आर्थिक सहायता स्वीकार कर रहे हैं अतः इससे उनके हर प्रयास पर पानी फिर जाता है और वह फ़िलिस्तीनी राष्ट्र के माथे पर कलंक के टीके के समान है जिसके प्रतिनिधित्व का वह दावा करते हैं।

साभार रायुल यौम

Sep १७, २०१८ १५:३१ Asia/Kolkata
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