आतंकी गुट एमकेओ के एक पूर्व वरिष्ठ सदस्य ने इस बात का रहस्योद्घाटन किया है कि सऊदी अरब इस आतंकी गुट की भरपूर आर्थिक सहायता कर रहा है।

मध्यपूर्व के क्षेत्र में आले सऊद का एक अहम षड्यंत्र, गड़बड़ी पैदा करना है। इसका मुख्य उद्देश्य इस्लामी गणतंत्र ईरान की क्षेत्रीय स्थिति और प्रभाव को कम करना है। मध्यपूर्व की परिस्थितियों से आले सऊद को लगने लगा है कि शक्ति का संतुलन ईरान के हित में होता जा रहा है। इस आधार पर उसने प्रतिस्पर्धा के बजाए फ़ितना फैलाने की नीति अपनाई है। सीरिया, इराक़ व यमन में ईरान के घटकों के ख़िलाफ़ आतंकी गुटों का समर्थन और इसी तरह ईरान विरोधी आतंकी गुट एमकेओ से रिश्ते, सऊदी अरब की इसी नीति के सूचक हैं।

 

पिछले साल ही सऊदी अरब के युवराज मुहम्मद बिन सलमान ने मध्यपूर्व के क्षेत्र से अशांति व हिंसा को ईरान की सीमाओं के अंदर पहुंचाने की बात कही थी। उन्होंने अपनी इस धमकी को व्यवहारिक बनाने के लिए, एमकेओ पर बहुत भरोसा कर रखा है जिसे आतंकी कार्यवाहियां करने में विशेष दक्षता प्राप्त है। एक अहम बिंदु यह भी है कि सऊदी अरब की ओर से एमकेओ गुट का समर्थन कोई नई बात नहीं है और एेसे बहुत से प्रमाण व दस्तावेज़ हैं जो यह सिद्ध करते हैं कि आले सऊद व एमकेओ के रिश्ते बड़े पुराने हैं और रोचक बात यह है कि रियाज़, ईरान पर आतंकवाद के समर्थन का आरोप लगाता है। इसी परिप्रेक्ष्य में सऊदी अरब की मंत्रीपरिषद ने 18 सितम्बर को ईरान पर आतंकवाद के समर्थन का आरोप लगाया और उससे मुक़ाबले के लिए अन्य देशों से सहयोग की अपील की। (HN)

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Sep १९, २०१८ १७:२८ Asia/Kolkata
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