• यमन, लब्बैक या हुसैन और हयहात मिन्नज़्ज़िला के नारों से गूंज उठा + वीडियो

आशूरा के दिन यमन में सनआ और सादा की सड़कें लब्बैक या हुसैन और हयहात मिन्नज़्ज़िला के नारों से गूंज उठीं।

अलमसीरा टीवी चैनल की रिपोर्ट के अनुसार यमनी जनता ने राजधानी सनआ और सादा प्रांत सहित अपने देश के विभिन्न शहरों में आशूरा के जूलूस निकाले और लब्बैक या हुसैन और हयहात मिन्नज़्ज़िला के नारे लगाए और बल दिया कि वह अमरीका के आगे कदापि नहीं झुकेगी।

यमनी जनता ने विभिन्न क्षेत्रों में बैनर्ज़ भी लगा रखे थे जिन पर अमरीका के विरुद्ध नारे लिखे हुए थे। यमनी जनता ने बल दिया कि वह पैग़म्बरे इस्लाम के नाती हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के रास्ते को जारी रखेंगे।

यमनी नागरिकों ने आशूरा के जूलूस का आरंभ पवित्र क़ुरआन की तिलावत से किया और इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के मर्सिए पढ़े और इमाम हुसैन पर ढाए जाने वाले अत्याचारों को याद करके श्रद्धांजलि पेश की।

वक्ताओं ने पैग़म्बरे इस्लाम के नाती हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और कर्बला के शहीदों पर होने वाले अत्याचारों तथा यमनी जनता की अत्याचारग्रस्त जनता में बीच संबंधों की ओर संकेत करते हुए इस बिन्दु की ओर प्रकाश डाला कि किस प्रकार से यमनी जनता ने कर्बला की घटना से पाठ सीखा है।

आशूरा के जूलूस में शामिल लोगों ने एक बयान में बल दिया कि 21 सितम्बर 2014 की क्रांति, हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की क्रांति का ही क्रम है और समय के यज़ीद अमरीका, इस्राईल और पिट्ठु अरब सरकारों के हाथों यमनी जनता का बहाया जाने वाला ख़ून, निष्ठावान साथियों के बहाए जाने वाले ख़ून की भांति है। इस बयान में इस पर भी बल दिया कि अमरीका और सऊदी अरब के निरंतर हमलों के आधार यमन पिछले चार वर्षों से एक और कर्बला में बदल चुका है। (AK)

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Sep २०, २०१८ २१:३१ Asia/Kolkata
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