अलवेफ़ाक ने बल देकर कहा था कि आले ख़लीफा सरकार की कल्पना के विपरीत इस देश की जनता अत्याचारपूर्ण आदेशों से चुप नहीं बैठेगी।

बहरैन के मानवाधिकार केन्द्र ने घोषणा की है कि इस देश की अदालत ने जिन चार व्यक्तियों को मौत की सज़ा सुनाई है उन्हें मिलाकर हालिया वर्षों में मौत की सज़ा दिये जाने वाले व्यक्तियों की संख्या 22 हो गयी है।

बहरैन में सक्रिय मानवाधिकार कार्यकर्ता हुसैन रज़ी ने इस संबंध में कहा है कि इन व्यक्तियों के अलावा तीन अन्य को भी पिछले वर्ष जनवरी महीने में मृत्युदंड दिया गया।

बहरैन के सबसे बड़ी विपक्षी दल जमइते अलवेफ़ाक ने अभी हाल ही में एक विज्ञप्ति जारी करके कहा था कि इस देश की दिखावटी अदालत बहरैनी जनता से प्रतिशोध लेने की चेष्टा में है। इसी प्रकार अलवेफ़ाक ने बल देकर कहा था कि आले ख़लीफा सरकार की कल्पना के विपरीत इस देश की जनता अत्याचारपूर्ण आदेशों से चुप नहीं बैठेगी।

14 फरवरी 2011 से बहरैन में इस देश की तानाशाही सरकार के खिलाफ जनांदोलन जारी है। बहरैनी जनता आज़ादी और न्याय की मांग कर रही है। साथ ही वह भेदभाव को समाप्त किये जाने और लोकतांत्रिक सरकार स्थापित किये जाने की मांग भी कर रही है।

बहरैन की तानाशाही सरकार जनता की मांगों पर ध्यान देने के बजाये विभिन्न प्रकार से उसका दमन कर रही है। आले ख़लीफा सरकार के अधिकारी जहां अपने विरोधियों का दमन करके और उन्हें मृत्युदंड देकर लोगों में भय व आतंक व्याप्त करना चाहते हैं वहीं वे इस प्रकार से अपनी तानाशाही को बाकी रखने की चेष्टा में हैं।

पश्चिमी सरकारें भी फार्स खाड़ी की कुछ अरब सरकारों का जो समर्थन कर रही हैं वह भी इन सरकारों के बाकी रहने और विरोधियों के खिलाफ मृत्युदंड के आदेश जारी रहने का कारण बना है।

बहरैनी के राजनीतिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ इस देश की तानाशाही सरकार के फैसले एसे स्थिति में सामने आ रहे हैं जब 10 हज़ार से अधिक राजनीतिक विरोधी इस देश की जेलों में बंद हैं।

बहरहाल बहरैनी लोगों के दमन के लिए विभिन्न प्रकार की कार्यवाहियों का अंजाम दिया जाना और इन कार्यवाहियों के बावजूद बहरैनी जनांदोलन का बंद न होना इस बात का सूचक है कि मौत की सज़ा सुनाने से भी बहरैनी जनता चुप नहीं बैठेगी और बहरैनी जनता ने बल देकर कहा है कि वैध मांगों की पूर्ति तक उसका शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रहेगा। MM

 

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Nov १४, २०१८ २१:१० Asia/Kolkata
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