• फ़िलिस्तीनी संगठनों ने इस्राईली हमले कैसे रोके?

फ़िलिस्तीनी हर शुक्रवार को वापसी मार्च के नाम से ग़ज़्ज़ा की सीमा पर प्रदर्शन करते हैं। यह प्रदर्शनकारी वास्तव में वह फ़िलिस्तीनी हैं जिनके इलाक़ों पर इस्राईल ने क़ब्ज़ा कर लिया है और उन्हें वहां से बाहर निकाल कर ज़ायोनियों को बसा दिया है।

गत 30 मार्च से तीव्रता के साथ शुरू होने वाले इन प्रदर्शनों ने अतिग्रहणकारी इस्राईल को गहरी चिंता में डाल दिया है और वह प्रदर्शनों को रोक पाने में पूरी तरह विफल हो चुका है। हर शुक्रवार को इस्राईली हमलों में फ़िलिस्तीनी प्रदर्शनकारी शहीद हो रहे हैं। शहीदों की संख्या 210 से अधिक हो चुकी है लेकिन फ़िलिस्तीनियों के प्रदर्शनों में कोई कमी नहीं आई है। इन प्रदर्शनों के कारण सारी दुनिया के सामने यह हक़ीक़त बार बार आ जाती है कि इस्राईल की अपनी कोई धरती नहीं है बल्कि वह फ़िलिस्तीनियों की धरती पर ज़बरदस्ती क़ब्ज़ा करके बैठा है और इन ज़मीनों के मालिक मौजूद हैं जो अपनी इन ज़मीनों पर लौटना चाहते हैं। यही नहीं वह अपनी ज़मीनें पुनः हासिल करने के लिए अपनी जान देने के लिए भी तैयार हैं।

इस स्थिति ने ज़ायोनी सरकार को इस्राईली जनता के सामने बहुत कमज़ोर कर दिया है क्योंकि वह इस पर नियंत्रण नहीं कर पा रही है। इस्राईली मंत्रियों में इस बात पर गहरे मतभेद पैदा हो गए हैं।

इस्राईली सरकार ने ग़ज़्ज़ा पट्टी के सीमावर्ती इलाक़े में बड़ी ख़ामोशी से एक सैनिक आप्रेशन करने का इरादा किया जिसका उद्देश्य संभावित रूप से हमास संगठन के किसी नेता का अपहरण करना या वहां की सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लगाना था मगर फ़िलिस्तीनी संगठनों की सतर्कता ने ज़ायोनी शासन के इस सैन्य आप्रेशन को विफल बना दिया। मेरे विचार में इस विफलता का बहुत गहरा प्रभाव पड़ा है और इसके परिणाम सामने आते रहेंगे। इसलिए कि इस प्रकार की कोई भी कार्यवाही कई आयामों से ठोस तैयारी के बाद की जाती है और इसका विफल हो जाना दर्शाता है कि इस्राईल कई मोर्चों पर एक साथ नाकाम हुआ है।

इसमें इस्राईल की इंटेलीजेन्स विफलता भी है, इसमें निर्णय लेने की प्रक्रिया की कमज़ोरी भी सामने आई है और सबसे बड़ी विफलता यह थी कि जब फ़िलिस्तीनी संगठनों और इस्राईली सेना का टकराव शुरू हुआ तो इस टकराव में ज़ायोनी शासन विजय नहीं हासिल कर सका। यह साबित हो गया कि ज़ायोनी सैनिकों को जो ट्रेनिंग दी जा रही है उसे वह व्यवहारिक चरण में अंजाम देने में सक्षम नहीं हैं। यहीं से इस्राईलियों में अपनी सेना की क्षमता के बारे में संदेह उत्पन्न हो गया है।

दूसरी ओर फ़िलिस्तीनी प्रतिरोधक संगठनों ने हर आयाम से अपनी शक्ति का लोहा मनवाया। वह पूरी तरह जागरूक है और जनता की रक्षा के दायित्व पर वह पूरी तरह अमल कर रहे हैं। फ़िलिस्तीनी संगठनों ने यह भी साबित कर दिया है कि इस्राईल के हर हमले का जवाब देने का साहस उनमें हैं और जो नया समीकरण उन्होंने उत्पन्न किया है उसे स्थापित करने और मज़बूत बनाने की उनमें क्षमता है।

फ़िलिस्तीनी संगठनों ने यह भी साबित कर दिया कि उनके पास युद्ध को सूझबूझ के साथ संचालित करने और मोर्चों को सटीक योजना के तहत संभालने की उनमें क्षमता है। उन्हें पता है कि कब हमला तेज़ करना है और कब तीव्रता में कमी लानी है? किस हमले के जवाब में किस स्थान को निशाना बनाना है?

फ़िलिस्तीनी संगठनों ने इस्राईली हमले के बाद कोर्नेट मिसाइल से अहराश के इलाक़े में इस्राईली सैनिकों की बस को बड़े सटीक रूप से निशाना बनाया। यह फ़िलिस्तीनी संगठनों के मिसाइल शक्ति में उन्नति का चिन्ह है। गज़्ज़ा पट्टी में उत्तर से लेकर दक्षिण तक सभी फ़िलिस्तीनी संगठनों ने पूर्ण समन्वय के साथ इस्राईल पर हमले किए इसमें भी महत्वपूर्ण संदेश निहित है।

फ़िलिस्तीनी संगठनों की रक्षा शक्ति में तीव्र प्रगति देखकर इस्राईली हल्क़े बुरी तरह बौखला गए हैं अब वह ग़ज्ज़ा में कोई भी सैनिक आप्रेशन करने से पहले हज़ार बार सोचेंगे। फ़िलिस्तीनियों ने यह संदेश दे दिया है कि यदि युद्ध छिड़ गया तो वह और भी व्यापक व घातक रूप से इस्राईल को निशाना बनाने में सक्षम हैं।

जो कुछ हुआ उससे यह साबित हुआ कि फ़िलिस्तीनी संगठनों ने इस्राईल की शक्ति और रणनीति का पूरी तरह अनुमान है और वह इस्राईली सैन्य शक्ति के बारे में बिल्कुल सही परिकल्पना रखते हैं। इससे उनकी इंटैलीजेन्स क्षमता भी सामने आती है।

इस मुक़ाबले में साबित हुआ कि फ़िलिस्तीनी संगठनों के पास इस्राईली हमलों का जवाब देने के लिए सबसे कारगर हथियार मिसाइल हैं और इस्राईल मिसाइलों को रोक पाने में अक्षम है। इस्राईली मिसाइल ढाल व्यवस्था आयरन डोम फ़िलिस्तीनी मिसाइलों को रोक पाने में नाकाम रही शायद बीस प्रतिशत मिसाइल ही आयरन डोम ने रोके होंगे।

फ़िलिस्तीनी संगठनों की कार्यवाही से यह भी साबित हुआ कि वह बहुत कम समय में इस्राईल पर हमले के लिए तैयार हैं। उनको दिन या रात किसी भी समय हमला करने में कोई दिक़्क़त नहीं है।

हालिया टकराव के बाद अब विशेषज्ञ यह कह रहे हैं कि इस्राईल के पास ग़ज़्ज़ा से निपटने के लिए कोई स्पष्ट रणनीति नहीं है। इस टकराव में इस्राईल की इंटैलीजेन्स क्षमता भी कमज़ोर दिखाई पड़ी और आप्रेशनल दक्षता भी बार बार नाकाम हुई। फ़िलिस्तीनी संगठनों ने अतीत की लड़ाइयों से अनुभव हासिल किया और उसी के आधार पर अपनी रणनीति बदली जिसका नतीजा यह मिला कि फ़िलिस्तीनी संगठनों को एक साथ कई मोर्चों पर सफलताएं मिली हैं।

रामी अबू ज़ुबैदा

फ़िलिस्तीनी टीकाकार

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Nov १५, २०१८ १८:५१ Asia/Kolkata
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