• अमरीका की ब्लैकलिस्ट में सैयद हसन नसरुल्लाह के बेटे का नाम भी शामिल, ग़ज़्ज़ा में मिलने वाली विजय के समय क्यों उठाया गया यह क़दम? क्या होगी सैयद हसन नसरुल्लाह की प्रतिक्रिया?

लेबनान के हिज़्बुल्लाह आंदोलन के प्रमुख सैयद हसन नसरुल्लाह के पुत्र सैयद जवाद नसरुल्लाह को भी अमरीका ने अपनी ब्लैकलिस्ट में शामिल कर लिया है जिसमें उनके पिता सैयद हसन नसरुल्लाह का नाम पिछले बीस साल से मौजूद है।

उनके साथ ही हमास के वरिष्ठ नेता सालेह अलआरूरी और हमास के दो नेताओं ख़लील युसुफ़ महमूद तथा हैसम तबातबाई के नाम भी इस लिस्ट में शामिल किए गए हैं। अमरीकी विदेश मंत्रालय ने घोषणा की है कि जो भी इन लोगों की गिरफ़तारी में मदद करे उसे 50 लाख डालर का इनाम दिया जाएगा।

अमरीकी विदेश मंत्रालय का कहना है कि सैयद जवाद नसरुल्लाह हिज़्बुल्लाह आंदोलन के भीतर बहुत तेज़ी से उभरते हुए नेता हैं उन्होंने फ़िलिस्तीन के पश्चिमी तट के इलाक़े में इस्राईल पर हमले के लिए फ़िलिस्तीनी युवाओं को भर्ती किया है और वह इस मिशन पर काम कर रहे हैं जबकि दूसरे भी को महत्वपूर्ण दायित्व उन्हें सौंपे गए हैं। इससे यही पता चलता है कि सैयद जवाद भी अपने पिता सैयद हसन नसरुल्लाह तथा अपने शहीद भाई सैयद हादी नसरुल्लाह और हिज्बुल्लाह के अन्य शहीदों के मार्ग पर चल रहे हैं।

हमें पूरा यक़ीन है कि अमरीका के ब्लैक लिस्ट में शामिल किए जाने पर इन महान योद्धाओं को तनिक भी भय या चिंता नहीं होगी। अमरीका ने यह क़दम एसे समय उठाया है जब ग़ज़्ज़ा पट्टी के इलाक़े में फ़िलिस्तीनी संगठनों ने बहुत बड़ी विजय हासिल की है। सबसे महत्वपूर्ण विजय इस्राईल युद्ध मंत्री एविग्डर लेबरमैन का त्यागपत्र है, दूसरी महत्वपूर्ण विजय 400 से अधिक मिसाइलों का गज़्ज़ा से ज़ायोनी बस्तियों पर फ़ायर किया जाना है जिसके कारण इस्राईलियों में भय फैल गया और वह अपने घरबार छोड़कर भूमिगत शरण स्थलों में भागे। इस्राईली मिसाइल ढाल व्यवस्था पूरी तरह विफल रही अतः असक़लान और उसदूद जैसी ज़ायोनी बस्तियों पर गंभीर ख़तरा मंडराने लगा। फ़िलिस्तीनी संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि इस्राईली युद्धक विमानों ने ग़ज़्ज़ा पट्टी में किसी भी इमारत पर बमबारी की तो ज़ायोनी बस्तियों पर सटीक निशाना लगाकार मिसाइल बरसाए जाएंगे।

सैयद जवाद नसरुल्लाह के पास अमरीका में कोई संपत्ति नहीं है जिसे अमरीका ज़ब्त कर सके और न ही वह व्यापारी हैं कि अमरीका उनके व्यापार पर अंकुश लगाए वह तो रण क्षेत्र के योद्धा हैं, योद्धा पैदा करते हैं और उन्हें प्रशिक्षण देते हैं। यही स्थिति हमास के लीडर अलआरूरी की है जिन्होंने अपनी उम्र का आधा भाग इस्राईली जेलों में बिताया है और उन्हें वर्ष 2014 में तीन ज़ायोनियों की हत्या पर गर्व है। उन्होंने मुहम्मद अबू ख़ुज़ैर नाम के फ़िलिस्तीनी बच्चे को चरमपंथी ज़ायोनियों के हाथों किडनैप किए जाने और जिंदा जला दिए जाने की हृदय विदारक घटना का इंतेक़ाम लेने के लिए तीन ज़ायोनियों की जान ली थी। फ़िलिस्तीनी बच्चे का एक मात्र गुनाह यह था कि वह फ़िलिस्तीनी था।

जिन साहसी योद्धाओं का अमरीका ने अपनी ब्लैक लिस्ट में शामिल किया है उनकी एकमात्र तमन्ना है अब्बास मूसवी, एमाद मुग़निया, समीर क़िन्तार, ख़लील अलवज़ीर और सलाह ख़लफ़ जैसे शहीदों के कारवां में शामिल होना। जो व्यक्ति अपनी धरती, अपनी आस्था और अपने राष्ट्र की मर्यादा के लिए लड़ता है उसे अमरीका के ब्लैक या रेड लिस्ट में अपना नाम शामिल होने पर कोई चिंता नहीं होती। यही कारण है कि प्रतिरोधक मोर्चा अपना हर युद्ध जीत जाता है और इस्राईलियों को हर युद्ध में पराजय का मुंह देखना पड़ता है।

सैयद हसन नसरुल्लाह जिन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि उनका मासिक ख़र्च 1300 डालर से अधिक नहीं है और जो अपने अधिकतर समर्थकों की तरह बहुत सादा जीवन व्यतीत करते हें और जो छुट्टियां बिताने के लिए यूरोप नहीं जाते और न ही महल में रहते हैं अमरीकी फ़ैसले पर उनकी प्रतिक्रिया यही होगी कि उनके होंटों प मुसकुराहट फैल जाएगी।

आतंकवादी तो वह है जिसने दूसरे देश की धरती पर क़ब्ज़ा किया है और जो गज़्ज़ा पट्टी की नाकाबंदी किए हुए है तथा इस इलाक़े पर समुद्र, वायु और ज़मीन से बमबारी और गोलाबारी करता है। आतंकवादी वह है जिसने दक्षिणी लेबनान पर युद्ध थोपा और क़ाना और ज़ाहिया के इलाक़े में जनसंहार किया, आतंकवादी वह है जिसने गज़्ज़ा पट्टी तीन युद्ध थोपे और जिसने दस हज़ार से अधिक आम नागरिकों को मार डाला जिनमें अधिकतर बच्चे और महिलाएं थीं। आतंकवादी वह है जिसने इराक़ पर हमला किया।

अमरीका की ब्लैक लिस्ट में जिसका नाम उसे इस पर गर्व होना चाहिए, यह तो महानता की पहिचान है। अमरीका के इस क़दम से प्रतिरोधक संगठनों का संकल्प और भी मज़बूत होगा और ग़ैर क़ानूनी इस्राईली क़ब्ज़े का अंत करने की उनकी इच्छाशक्ति और भी मज़बूत होगी।

साभार रायुल यौम

Nov १५, २०१८ १९:४३ Asia/Kolkata
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