गोलान हाइट्स लगभग 1200 वर्गकिलोमीटर का क्षेत्र है और इस पर अवैध कब्ज़े के बाद इस्राईल ने उसे अवैध अधिकृत क्षेत्र में मिला लिया। विश्व समुदाय ने कभी भी इस्राईल के इस कब्ज़े को मान्यता प्रदान नहीं की

शुक्रवार को राष्ट्रसंघ की महासभा ने गोलान हाइट्स प्रस्ताव पारित किया।

इस प्रस्ताव के पक्ष में 151 देशों ने वोट दिया जबकि केवल अमेरिका और जायोनी शासन ने इसके पक्ष में वोट नहीं दिया है। इस प्रस्ताव के अनुसार गोलान हाइट्स क्षेत्र सीरिया का है और इस क्षेत्र में जायोनी शासन की समस्त कार्यवाहियां ग़ैर कानूनी हैं।

इस्राईल ने वर्ष 1967 में सीरिया की गोलान की पहाड़ियों पर कब्ज़ा कर लिया था। गोलान हाइट्स लगभग 1200 वर्गकिलोमीटर का क्षेत्र है और इस पर अवैध कब्ज़े के बाद इस्राईल ने उसे अवैध अधिकृत क्षेत्र में मिला लिया। विश्व समुदाय ने कभी भी इस्राईल के इस कब्ज़े को मान्यता प्रदान नहीं की।

गोलान हाइट्स सीरिया के दक्षिण पश्चिम में है और चूंकि यह स्ट्रैटेजिक क्षेत्र है इसलिए यह सदैव इस्राईल के ध्यान का कारण रहा है। गोलान हाइट्स लेबनान, जार्डन, सीरिया और फिलिस्तीन के मध्य स्थित है और वहां रह कर इन देशों पर नज़र रखी जा सकती है और यह एक अन्य कारण है जिसकी वजह से इस्राईल इसके कब्ज़े पर आग्रह कर रहा है।

गोलान हाइट्स पर अपने अवैध कब्ज़े को मज़बूती प्रदान करने के लिए जायोनी शासन विभिन्न चाले चलता रहता है उनमें से एक वहां की जनसंख्या के ताने बाने को परिवर्तित करना है।

जानकार हल्कों का मानना है कि सीरिया में जो आतंरिक संकट उत्पन्न किया गया उसका एक कारण यह था कि सीरिया कमज़ोर होकर गोलान हाइट्स पर अपने दावे को छोड़ दे और इस्राईल की विस्तारवादी नीतियों को स्वीकार कर ले परंतु सीरिया ने हमेशा कहा है कि गोलान उसका अटूट अंग है।

वास्तविकता यह है कि सीरिया में जारी लड़ाई और अशांति समाप्ति के निकट है और वहां से आतंकवादी गुटों का लगभग सफाया हो गया है जबकि अमेरिका और इस्राईल की रणनीति यह है कि कुनैतरा सहित सीरिया के कुछ प्रांतों व क्षेत्रों में आतंकवादी बने रहें क्योंकि कुनैतरा प्रांत गोलान हाइट्स का एक भाग है और अमेरिका और इस्राईल गोलान हाइट्स का विलय अतिग्रहित क्षेत्रों में करने के लिए बहुत प्रयास कर रहे हैं परंतु राष्ट्रसंघ की महासभा में पारित होने वाले प्रस्ताव का इस्राईल के लिए स्पष्ट है कि गोलान हाइट्स एक अतिग्रहित क्षेत्र है और उस पर इस्राईल का कब्ज़ा अवैध और राष्ट्रसंघ तथा अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ है। MM

 

Nov १७, २०१८ १८:१७ Asia/Kolkata
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