Dec १०, २०१८ २०:५० Asia/Kolkata
  • बहुत तेज़ी से सामान्य हालात की ओर लौट रहा है सीरिया, राष्ट्रपति असद ने कहा कि विदेशी कारक समाप्त हो जाएं तो कुछ महीनों के भीतर हिंसा पर क़ाबू पाया जा सकता है

सीरिया मध्यपूर्व का वह देश है जिसे बड़े भयानक आतंकवाद से जूझना पड़ा है। वर्ष 2011 से इस देश में भयानक खेल शुरू हुआ जिसमें अमरीका, फ़्रांस और ब्रिटेन जैसे पश्चिमी देश और सऊदी अरब, क़तर, इमारात और तुर्की जैसे क्षेत्रीय देश मुख्य सूत्राधार के रूप में काम कर रहे थे।

यह देश सीरिया में बश्शार असद की सरकार गिराने के लिए एकजुट हुए थे लेकिन भीतर ही भीतर इन देशों में से हरेक ने अपना अलग एजेंडा तैयार किया था। यही कारण था कि जब सीरिया संकट लंबा खिंचा और साज़िश अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच पायी तो साज़िशकर्ता देशों में आपसी भिड़ंत शुरू हो गई।

हर देश ने अपना अलग एजेंडा तैयार किया और एजेंडे को पूरा करने क लिए सीरिया के भीतर सक्रिय चरमपंथी संगठनों से संपर्क साधा। क़तर ने अन्नुसरा फ़्रंट की मदद की, सऊदी अरब ने जैशुल इस्लाम की मदद की, अमरीका ने फ़्री सीरियन आर्मी की मदद की और बाद में कुर्द फ़ोर्सेज़ को अपना मोहरा बना लिया। तुर्की ने भी कई संगठनों से समन्वय बना लिया। इसी बीच इन संगठनों में आपसी भिड़ंत भी शुरू हो गई जिसमें भारी संख्या में लड़ाके मारे गए।

सीरिया की जनता, सेना और सरकार का सामना दर्जनों की संख्या में मौजूद आतंकी सगठनों से था और सीरिया ने ईरान, हिज़्बुल्लाह और रूस जैसे घटकों की मदद से सभी क्षेत्रों में आतंकियों को पराजित किया। यही कारण है राष्ट्रपति बश्शार असद ने सोमवार को समाचार पत्र ओमान से बातचीत में कहा कि यदि सीरिया में युद्ध की आग भड़काने वाले बाहरी तत्व और कारक समाप्त हो जाएं तो कुछ महीने के भीतर हम युद्ध पर नियंत्रण पा सकते हैं।

राष्ट्रपति असद ने यह भी कहा कि सीरिया के विरुद्ध लड़ाई 2011 में नहीं शुरू हुई बल्कि यह लड़ाई तो 20 साल पहले ही शुरू हो चुकी थी मगर जैसे जैसे समय बीता इसमें तीव्रता आती गई और जब सोशल मीडिया का ज़माना आ गया तो यह लड़ाई बहुत अधिक व्यापक हो गई। इस समय आतंरिक स्थिति यही है कि देश की जनता सरकार के साथ खड़ी है और यदि बाहरी कारक नियंत्रित हो जाएं तो कुछ महीनों के भीतर ही युद्ध समाप्त किया जा सकता है।

सीरिया की लड़ाई में हर देश ने अपने स्वार्थों को नज़र में रखा जबकि ग़ैर क़ानूनी शासन इस्राईल ने भी सीरिया युद्ध से बड़ी उम्मीदें लगा रखी थीं। इस्राईल जो भूमि का भूखा है वह गोलान हाइट्स के इलाक़े को हड़प लेने की ताक में था जिस पर उसने कई दशकों से ग़ैर क़ानूनी रूप से क़ब्ज़ा कर रखा है लेकिन सारी दुनिया उसे सीरिया का भाग मानती है और हाल ही में संयुक्त राष्ट्र संघ में सीरिया के राजदूत बश्शार जाफ़री ने कहा कि सीरिया इस इलाक़े को वापस लेगा चाहे शांतिपूर्ण मार्ग से या फिर युद्ध के ज़रिए।

तुर्की के बारे में भी कहा जाता है कि सीरिया के कई सीमावर्ती इलाक़ों पर उसकी नज़र थी। अंकारा सरकार यह समझती थी कि यदि सीरिया में बश्शार असद सरकार गिर जाएगी तो नई सरकार कमजोर होगी एसे में उसके लिए कुछ क्षेत्रों पर नियंत्रण पा लेना आसान होगा। तुर्की विशेष रूप से कुर्द इलाक़ों पर क़ब्ज़ा करना चाहता है ताकि कुर्द आंदोलन को पूरी तरह कुचल दे जो तुर्की के भीतर पृथकतवाद की लड़ाई लड़ रहा है।

सऊदी अरब ने यह योजना बनाई थी कि दमिश्क़ पर उसके क़रीबी चरमपंथी संगठनों का क़ब्ज़ा हो गया तो वह लेबनान में अपनी स्थिति मज़बूत कर लेगा।

इतनी भयानक साज़िश के निशाने पर आने के बावजूद सीरिया आज अपनी लड़ाई जीत चुका है और इस समय स्थिति यह है कि राजधानी दमिश्क़ और अन्य इलाक़ों का दौरा करके आने वाले बता रहे हैं कि गृह युद्ध और अंतर्राष्ट्रीय साज़िश ने इस देश को नुक़सान तो बहुत पहुंचाया है लेकिन सीरिया के लोग एक बार फिर अपने काम काज मे लग गए हैं जो अपनी मेहनत के लिए पूरे इलाके में विशेष ख्याति रखते हैं।

आज जार्डन जैसे पड़ोसी देशों के अलग सीरिया की यात्रा कर रहे हैं और वहां से सस्ता सामान ख़रीद रहे हैं। सीरिया में युद्ध के बावजदू प्रयोग की चीज़ों की क़ीमत काफ़ी कम है।

सीरिया बहुत तेज़ गति से अपनी सामान्य स्थिति की ओर लौट रहा है और शायद अब इस्लामी व अरग जगत ही नहीं बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उसका महत्व पहले से अधिक हो जाएगा।  

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