Dec १३, २०१८ २०:१७ Asia/Kolkata

वास्तव में सऊदी अरब लाल सागर के तटवर्ती देशों को अपने प्रतिस्पर्धियों की ओर जाने से रोकना चाहता है।

सऊदी अरब ने लाल सागर के तटवर्ती देशों के लिए एक परिषद गठित किये जाने की सूचना दी है। लाल सागर व्यापारिक और आर्थिक दृष्टि से अपने तटवर्ती देशों के लिए विशेष महत्व रखता है।

उसके महत्वपूर्ण होने का एक कारण यह है कि वह भूमध्य सागर में स्वेज़ नहर और बाबुल मन्दब के माध्यम से अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जुड़ता है। इसके अलावा विश्व व्यापार का 15 प्रतिशत भाग लाल सागर के मार्ग से होता है।

इन्हीं बातों के दृष्टिगत 12 दिसंबर को सऊदी अरब में पहली कांफ्रेन्स हुई जिसमें अरब और अफ्रीक़ी देशों के विदेशमंत्रियों ने भाग लिया।

इस कांफ्रेन्स को आयोजित करने का सऊदी अरब का सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य क्षेत्रीय देशों विशेषकर तुर्की से प्रतिस्पर्धा है।

सूडान लाल सागर का एक तटवर्ती देश है और अभी हाल ही में लाल सागर में स्थित "सवाकिन" द्वीप में विकास योजना को उसने तुर्की के हवाले कर दिया है। वास्तव में सऊदी अरब लाल सागर के तटवर्ती देशों को अपने प्रतिस्पर्धियों की ओर जाने से रोकना चाहता है।

चूंकि लालसागर के अधिकांश तटवर्ती देश आर्थिक दृष्टि से सऊदी अरब से जुड़े हैं इसलिए आले सऊद एक व्यवस्था बनाकार और परिषद का गठन करके लाल सागर में तुर्की जैसे देशों के प्रभाव को रोकना चाहता है।

इस संबंध में एक दूसरा महत्वपूर्ण विषय यह है कि सऊदी अरब लाल सागर के तटवर्ती देशों की एक परिषद गठित करके इस सागर में कत़र के भी बढ़ते प्रभाव को रोकना चाहता है। क़तर ने हालिया दो दशकों विशेषकर पिछले 18 महीनों के दौरान इस सागर के तटवर्ती देशों में काफी निवेश किया है और अब सऊदी अरब अपने प्रयासों से इस निवेश को रोकने की चेष्टा में है।

इस संबंध में तीसरा महत्वपूर्ण बिन्दु यह है कि सऊदी अरब लाल सागर के तटवर्ती देशों के संबंध में जिस परिषद का गठन करना चाहता है उसका संबंध सऊदी अरब द्वारा इस्राईल के साथ संबंधों के सामान्य बनाये जाने से भी है क्योंकि लाल सागर में इस्राईल की भी पहुंच है।

क़तर के "अलअरबी अलजदीद" समाचार पत्र ने इस बात के दृष्टिगत लिखा है कि लाल सागर के तटवर्ती देशों की परिषद का गठित किया जाना इस्राईल और सऊदी अरब के संबंधों के सामान्य बनाये जाने की दिशा में गोपनीय कदम हो सकता है।

दूसरे शब्दों में लाल सागर के संबंध में 12 दिसंबर को सऊदी अरब की अगुवाई में जो कांफ्रेन्स हुई आधिकारिक रूप से इस्राईल उसमें मौजूद नहीं था परंतु इस संबंध में सऊदी अरब के कदम का वह स्वागत करता है।

बहरहाल जानकार हल्कों का मानना है कि सऊदी अरब के इस कदम को लाल सागर में इस्राईली पैठ को मजबूत बनाये जाने की दिशा में एक कदम के रूप में भी देखा जाना चाहिये। MM

 

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