Dec १३, २०१८ २०:३५ Asia/Kolkata
  • आ गए इस्राईल के बुरे दिन, ग़ज़्ज़ा में पिटने के बाद अब रामल्लाह में पड़ा तमांचा, हमास ने क्या पश्चिमी तट के इलाक़े में पहुंचा दिए हैं हथियार?

गुरुवार का दिन फ़िलिस्तीन के पटल पर बड़ी महत्वपूर्ण घटनाओं का दिन साबित हुआ। सुबह को ख़बर मिली कि इस्राईली सैनिकों ने तीन अलग अलग हमलों में तीन फ़िलिस्तीनियों को शहीद और कुछ को गिरफ़तार कर लिया।

इस्राईली सैनिकों ने अशरफ़ नआलूवा नामक फ़िलिस्तीनी को नाबलुस नगर के पूर्व में शरणार्थी शिविर के पास से शहीद किया। नआलूवा ने एक हमले में कम से कम दो इस्राईलियों को मार गिराया था और इस्राईली सैनिक दो महीने से इस युवा की तलाश में थे।

इस्राईली सैनिकों ने रामल्लाह नगर के उत्तर में सर्दा शहर में फ़ायरिंग करके सालेह उमर अलबरगूसी नामक युवा को भी शहीद कर दिया। इस्राईली सैनिकों को संदेह था कि अलबरगूसी ने इससे पहले इस्राईलियों पर हमला किया था।

बैतुल मुक़द्दस में भी इस्राईली सैनिकों ने एक फ़िलिस्तीनी युवा को शहीद किया।

इस्राईली सैनिकों के हाथों फ़िलिस्तीनियों की शहादत के बारे में इस्राईली अधिकारी चर्चा कर रहे थे और अपनी कामयाब योजना पर तारीफ़ें लूट रहे थे कि इसी बीच एक फ़िलिस्तीनी युवा ने पश्चिमी तट के इलाक़े में एक बस स्टाप के पास हमला करके तीन इस्राईलियों को मार गिरया। फ़िलिस्तीनी युवा ने अपनी गाड़ी से रामल्ला के पूर्व में स्थित एक ज़ायोनी बस्ती के निकट बने बस स्टाप के पास अपनी गाड़ी रोकी और वहां मौजूद ज़ायोनियों पर फ़ायरिंग कर दी। इस हमले में कोई ज़ायोनी घायल भी हो गए हैं।

हमास संगठन का कहना है कि पश्चिमी तट के इलाक़े में प्रतिरोध की चिंगारी सुलग रही है और इसे हरगिज़ समाप्त नहीं किया जा सकता।

इस्राईल को हाल में ग़ज़्ज़ा में सैनिक आप्रेशन में नाकामी का सामना करना पड़ा था लेकिन पश्चिमी तट के इलाक़े में जो घटनाएं हुई हैं वह इस्राईल के लिए बहुत बड़ी मुसीबत बन गई हैं। इसलिए कि इस्राईल फ़िलिस्तीनी प्रशासन की मदद से इस कोशिश में लगा हुआ है कि इस इलाक़े में किसी भी प्रकार का फ़िलिस्तीनी प्रतिरोध उत्पन्न न हो मगर फ़िलिस्तीनी संगठनों की कोशिश है कि पश्चिमी तट के इलाक़े इस्राईल के ख़िलाफ़ प्रतिरोध तेज़ किया जाए। इस इलाक़े में इस्राईलियों पर हथियारों से हमला होना बहुत बड़ी घटना है क्योंकि इस्राईल की कोशिश होती है कि इस इलाक़े में फ़िलिस्तीनियों को किसी भी तरह हथियार न मिलने पाए। इस इलाक़े में फ़िलिस्तीनी सुरक्षा बलों से इस्राईली सेना और इंटैलीजेन्स के बीच वर्षों से समन्वय है कि फ़िलिस्तीनी संगठनों को किसी भी प्रकार की सशस्त्र गतिविधियां करने का मौक़ा न मिले। मगर इस इलाक़े में जो घटनाएं हो रही हैं उनसे इस्राईल के सारे समीकरण बिगड़ते महसूस हो रहे हैं।

गुरुवार की घटना से पहले भी दो महत्वपूर्ण घटनाएं हुईं जिनसे इस्राईली सुरक्षा बलों में भय व्याप्त हो गया है। एक घटना तो वही है जो अशरफ़ नआलूवा ने अंजाम दी थी। इस फ़िलिस्तीनी युवा ने पश्चिमी तट के इलाक़े में उत्तरी क्षेत्र सलफ़ीत के क़रीब बुरकान नामक औद्योगकि काम्पलेक्स के भीतर अंजाम दी थी। इस हमले में दो इस्राईली मारे गए थे और तीसरा घायल हो गया था।

दूसरी घटना दो दिन पहले ओफ़रा के इलाक़े में हुई जब कुथ हथियारबंद लोगों ने इस्राईलियों के एक समूह पर हमला कर दिया। इस हमले में सात इस्राईली घायल हुए और हमला करने वाले फ़िलिस्तीनी युवा आराम से वहां से भाग निकले।

इस्राईलियों को सबसे बड़ा डर यह है कि पश्चिमी तट के इलाक़े में भी चाक़ू से हमले के बजाए अब बंदूकों का प्रयोग किया जा रहा है और दूसरी बात यह है कि हमले बड़ी सटीक योजना से अंजाम दिए जाते हैं। ओफ़रा में जिस स्थान पर हमला किया गया उसके क़रीब ही इस्राईली सैनिक मौजूद थे लेकिन हमलावरों को उनका कोई डर नहीं था।

बिल्कुल साफ़ है कि हमास संगठन पश्चिमी तट के इलाक़े में महत्वपूर्ण स्ट्रैटेजी पर काम कर रहा है। इस इलाके में इस्राईलियों पर हमले तेज़ हुए तो निश्चित रूप से ग़ज़्ज़ा पट्टी पर दबाव कम होगा, दूसरे यह कि इन इलाक़ों में ग़ैर क़ानूनी रूप से बसे इस्राईलियों को बाहर निकाला जा सकेगा और तीसरे फ़िलिस्तीनी प्रशासन के उन सुरक्षा बलों को भी बाहर निकाला जा सकेगा जिन्होंने इस्राईली सेना के साथ कोआर्डिनेशन बना रखा है।

इस्राईल के चीफ़ आफ़ आर्मी स्टाफ़ ग़ाज़ी ईज़ेनकोट ने मंत्रिमंडल को चेतावनी दी है कि हमास ने पश्चिमी तट के इलाक़े में काम शुरू कर दिया है और सितम्बर से अब तक कम से कम 10 हमले उसने किए हैं जो कि एक बड़ी संख्या है।

जहां सऊदी अरब, इमारात और क़तर जैसे देश इस्राईली अधिकारियों के लिए अपने दरवाज़े खोल रहे हैं और इस्राईल से दोस्ती के लिए मरे जा रहे हैं वहीं फ़िलिस्तीन में इस्राईल के ख़िलाफ़ फ़िलिस्तीनी प्रतिरोध का लावा पक रहा है। अब इस्राईल से फ़िलिस्तीनियों की लड़ाई का मैदान नाबलुस, अलख़लील, जेनिन, तूलकर्म रामल्ला तथा पश्चिमी तट के अन्य शहर और गांव होंगे और यह इस्राईल से दोस्ती करने की अरब सरकारों की कोशिश पर फ़िलिस्तीनियों का बेहतरीन जवाब होगा।

साभार रायुल यौम

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