Dec १५, २०१८ १६:३१ Asia/Kolkata
  • फ़िलिस्तीन के पटल पर बहुत बड़ा धमाका, सुलग उठा पश्चिमी तट का इलाक़ा, अन्य सरकारों को सुरक्षा का आश्वासन देने वाले नेतनयाहू की अपनी सुरक्षा पर लग गया सवालिया निशान!

फ़िलिस्तीन में पश्चिमी तट के इलाक़े में फ़िलिस्तीनी संघर्षकर्ताओं के बढ़ते हमले से जिनमें कम से कम तीन ज़ायोनी मारे गए और दस घायल हो गए यह नतीजा निकलता है कि इस्राईली प्रधानमंत्री बिनयामिन नेतनयाहू जो मध्यपूर्व में कुछ अरब सरकारों तथा अफ़्रीक़ा के कुछ देशों को यह विश्वास दिलाने में लगे हैं कि इस्राईल उनकी रबिनयामिन नेतनयाहू जो मध्यपूर्व में कुछ अरब सरकारों तथा अफ़्रीक़ा के कुछ देशों को यह विश्वास दिलाने में लगे हैं कि इसक्षा करने में सक्षम है, तथा उन्हें सुरक्षा अनुभवों से लाभ पहुंचा सकता है

और उनके सिंहासन की रक्षा कर सकता है, अब ख़ुद इस्राईलियों की रक्षा करने में असमर्थ हो गए हैं और उन्हें शांति व स्थिरता का वातावरण उपलब्ध करा पाना उनके बस के बाहर है।

नेतनयाहू की रक्षा व सुरक्षा शक्ति जिस पर वह अरब दोस्तों के सामने बहुत इतराते रहते हैं पश्चिमी तट के इलाक़े में इस्लामी प्रतिरोध मोर्चे से संबंधित जियालों के साहस के सामने क्षीण हो चुकी है। इस क्रम की शुरुआत शहीद अशरफ़ नआलूवा ने की जिन्होंने बुरकान नामक औद्योगिक काम्पलेक्स में ज़बरदस्त हमला किया, इसके बाद सालेह अलबरगूसी ने औफ़रा के इलाक़े में इस्राईलियों को निशाना बनाया और तीसरा हमला उनके तीसरे साथी ने औफ़रा के ही इलाक़े में अंजाम दिया और हमला करके भाग निकला। इन जियालों ने साबित कर दिया कि इस्राईल की सुरक्षा शक्ति एसी नहीं है जिस पर नेतनयाहू गर्व कर सकें।

नआलूवा को पकड़ने के लिए इस्राईल ने अपनी इंटैलीजेन्स और सुरक्षा एजेंसियां लगा दीं जो 66 दिनों तक दिन रात नआलूवा की तलाश में कोने कोने फिरती रहीं साथ ही उन्होंने स्थनीय मुख़बिरों की भी मदद ली मगर वह नआलूवा को ढूंढ न सकीं। बहुत संभावित है कि फ़िलिस्तीनी सुरक्षा बलों जो इस्राईल के साथ सहयोग करते हैं इस फ़िलिस्तीनी युवा के छिपने की जगह के बारे में इस्राईली सैनिकों को बता दिया हो।

शहीद नआलूवा ने हथियार नहीं डाले और उस घर में आख़िरी सांस तक लड़ते रहे जो उन्हें उनके साथियों ने उपलब्ध कराया था। यह वह लोग हैं जिन्होंने अपने अल्लाह के समक्ष संकल्प लिया है कि कि शहादत को गले लगाएंगे और स्वर्ग में अपनी जगह बनाएंगे अतः उन्हें वह मिल गया जिसकी वह कामना करते थे।

पश्चिमी तट और ग़ज़्ज़ा पट्टी के इलाक़ों को एकजुट करने के लिए मिस्र की मध्यस्था सहित सारे प्रयास विफल साबित हुए थे मगर इस्राईली क़ब्ज़े के मुक़ाबले में प्रतिरोध की भावना ने इन दोनों इलाक़ों के लिए लोगों को एकजुट कर दिया जो बड़े बड़े भाषणों नहीं बल्कि ठोस अमल की सीख देती है।

फ़िलिस्तीन में पश्चिमी तट का इलाक़ा विक्राल हाथी की भांति है जिसकी हरकत बहुत मंद होती है लेकिन जब यह उठ खड़ा होता है तो सामने जो कुछ नज़र आता है कि उसे ढा देता है और फिर इस पर क़ाबू पाना संभव नहीं होता। या उसका उदाहरण असली अरबी ऊंट से दिया जा सकता है जो बहुत संयमी होता है हर प्रकार की कठिनाई यहां तक कि अपमान भी सहन करता है लेकिन जब वह इंतेक़ाम लेना शुरू करता है तो इस इंतेक़ाम की कोई सीमा नहीं रहती।

इस समय पश्चिमी तट के इलाक़े में जो कुछ नज़र आ रहा है वह इस्राईल के हाथों लंबे समय तक अपमान सहने के बाद की प्रतिशोधात्मक कार्यवाही है। यह ठोस और शक्तिशाली प्रतिक्रिया है जो उन्हें सचेत कर रही है जिन्होंने फ़िलिस्तीनी राष्ट्र के अधिकारों के साथ सौदा किया और जिन्होंने इस्राईल को अपना मित्र और सहयोगी समझा।

पश्चिमी तट के साहसी युवा केवल इस्राईली अत्याचार का बदला नहीं ले रहे हैं बल्कि वह महमूद अब्बास के फ़िलिस्तीनी प्रशासन को भी सबक़ सिखा रहे हैं जिसने फ़िलिस्तीनियों के नाम पर ख़ुद को पेश किया लेकिन इस्रईली संस्थाओं के साथ सहयोग कर रहा है।

हालिया दिनों जो भी प्रतिरोधक कार्यवाहियां हुईं उनमें एक चीज़ समान रूप से नज़र आती है वह यह है कि हमलों में इस्राईलियों तथा उनकी रक्षा करने वाले इस्राईली सैनिको को निशाना बनाया जा रहा है। यह इस्राईलियों और उनके नेताओं को कड़ा संदेश है कि फ़िलिस्तीन की धरती पर जिस पर उन्होंने गैर क़ानूनी रूप से क़ब्ज़ा कर रखा है वह सुकून से रह नहीं पाएंगे क्योंकि उनका अस्तित्व ग़ैर क़ानूनी है अतः समस्त इस्राईलियों को यहां से जाना पड़ेगा और यदि वह अपनी जान बचाना चाहते हैं तो तत्काल फ़िलिस्तीनी इलाक़ों से वापस चले जाएं।

हमास जिसने हालिया तीनों हमलों की ज़िम्मेदारी स्वीकार की है एक बयान में कहा है कि इस संगठन की प्रतिरोधक कार्यवाहियों की शुरूआत को 31 साल पूरे होने के अवसर पर यह हमले किए गए हैं। हमास ने अपने बयान में कहा है कि अतिग्रहणकारी इस्राईल पश्चिमी तट के इलाक़े में शांति और स्थिरता का सपना न देखे। यह इलाक़े सुलगती हुई चिंगारी की तरह है जो सभी ग़ैर क़ानूनी इस्रईली बस्तियों को राख कर देगा।

फ़िलिस्तीन में यह तथ्य देखने में आया है कि यदि कभी भी प्रतिरोध रुका है तो तत्काल दोबारा शुरू हो गया और जब दोबारा शुरू हुआ तो पहले से अधिक शक्तिशाली बनकर सामने आया है और उसने अतिग्रहणकारी इस्राईली शासन की जड़ें हिला दीं और इस्राईल को इसकी भारी क़ीमत चुकानी पड़ी। इस्लामी प्रतिरोध को न तो नेतनयाहू की धमकियों का डर है और न नई ज़ायोनी कालोनियों के निर्माण का कोई भय है इसलिए कि इस विचारधारा का यह विश्वास है कि पूरा का पूरा फ़िलिस्तीन फ़िलिस्तीनियों के हाथ में लौटेगा और इसके लिए बहुत अधिक प्रतीक्षा भी नहीं करनी पड़ेगी।

बहुत से अकाट्य तथ्य हैं जिन्हें इस्राईल और अमरीका हमेशा छिपाने की कोशिश करते हैं। एक तथ्य यही है कि फ़िलिस्तीनी राष्ट्र कभी भी हथियार नहीं डालता बल्कि साज़िश करने वालों पर मेज़ उलट देता है और सारे समीकरणों को बदल देता है।

बड़े बदलाव की शुरूआत हालिया वर्षों के चार युद्धों में इस्राईल की खुली पाजय से हो चुकी है। इसमें हालिया लड़ाई भी शामिल है जो 48 घंटे ही चली और इतनी ही देर में इस्राईल के पसीने छूट गए क्योंकि फ़िलिस्तीनी संगठनों ने बड़े सटीक रूप से अपने लक्ष्य को भेदने वाली मिसाइलों का प्रदर्शन कर दिया। हमें यक़ीन है कि यदि नेतनयाहू ने मिस्र की मदद लेकर तत्काल संघर्ष विराम न करवा लिया होता तो उन्हें और भी बहुत कुछ देखने को मिलता जिस पर वही नहीं पूरा इस्राईल चकित रह जाता।

हिज़्बुल्लाह लेबनान के प्रमख सैयद हसन नसरुल्लाह ने हालिया महीनों इस्राईलियों को नसीहत की कि वह फ़िलिस्तीनी इलाक़ों को छोड़कर चले  जाएं ताकि आने वाले युद्ध में ईंधन न बन जाएं। यह नसीहत बिल्कुल सही थी और शायद अब ज़ायोनियों को पास अधिक समय नहीं बचा है। ईरान की अलक़ुद्स फ़ोर्स के कमांडर जनरल कासिम सुलैमानी ने इस्राईलियों को नसीहत की कि वह तैरना सीख लें क्योंकि उनके पास भूमध्य सागर के रास्ते से भागने के अलावा कोई और रास्ता नहीं होगा। अब हमें प्रतीक्षा है कि हमास की सैनिक शाखा के प्रमुख मुहम्मद ज़ैफ़ इस्राईलियों को क्या नसीहत करते हैं।

इस्राईलियों ने शांति का हर मौक़ा गवां दिया बस वह फ़िलिस्तीनी इलाक़ों में अपनी बस्तियों के निर्माण की जिद पर अड़े रहे उन्होंने फ़िलिस्तीनियों को धोखा दिया लेकिन अब उनके सारे अनुमान ग़लत साबित हुए हैं और अब समय आ गया है कि वह अपनी ग़लतियों की क़ीमत चुकाएं।

अब्दुल बारी अतवान

अरब जगत क विख्यात लेखक व टीकाकार

 

 

 

 

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