Dec १५, २०१८ २१:०२ Asia/Kolkata

फ़िलिस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार 30 मार्च 2018 से आरंभ होने वाले प्रदर्शनों में अब तक 248 फ़िलिस्तीनी शहीद और 26 हज़ार से अधिक फ़िलिस्तीनी घायल हो चुके हैं। रोचक बात यह है कि शहीद होने वाले फ़िलिस्तीनीयों में 34 बच्चे भी शामिल हैं।

फ़िलिस्तीन के इस्लामी प्रतिरोध संगठन हमास ने अपने गठन की 31वीं वर्षगांठ के अवसर पर एक विज्ञप्ति जारी की जिसमें फ़िलिस्तीनी गुटों के मध्य मतभेद की समाप्ति पर बल दिया है। दिन- प्रतिदिन फ़िलिस्तीनियों के खिलाफ ज़ायोनी शासन के अपराधों में वृद्धि होती जा रही है।

हमास संगठन की 31वीं वर्षगांठ के अवसर पर शुक्रवार को भी फ़िलिस्तीनियों ने प्रदर्शन किया जिस पर ज़ायोनी सैनिकों ने हमला कर दिया। इस हमले में 70 से अधिक फ़िलिस्तीनी घायल हो गये। यह उस स्थिति में है जब सात दिसंबर को होने वाले प्रदर्शनों में घायल होने वाला एक चार वर्षीय बच्चा शहीद हो गया।

फ़िलिस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार 30 मार्च 2018 से आरंभ होने वाले प्रदर्शनों में अब तक 248 फ़िलिस्तीनी शहीद और 26 हज़ार से अधिक फ़िलिस्तीनी घायल हो चुके हैं। रोचक बात यह है कि शहीद होने वाले फ़िलिस्तीनीयों में 34 बच्चे भी शामिल हैं।

ज़ायोनी सैनिकों की हिंसा के मुकाबले में जिस चीज़ की सबसे अधिक आवश्यकता है वह फ़िलिस्तीनी गुटों के मध्य एकता है परंतु जो चीज़ देखने में आ रही है वह फ़िलिस्तीन के हमास और फ़त्ह गुटों में बढ़ती दूरी है।

फ़िलिस्तीनी प्रशासन ने एक विज्ञप्ति जारी करके हमास पर ज़ायोनी शासन के साथ हिंसा करने का आरोप लगाया है।

वास्तव में फ़िलिस्तीनी प्रशासन ने अतिक्रमणकारी ज़ायोनी सैनिकों की कार्यवाहियों के मुकाबले में शहादत प्रेमी कार्यवाहियों को हिंसा का नाम दिया है।

फ़िलिस्तीनी प्रशासन ने सांकेतिक रूप से फ़िलिस्तीनी गुटों के मध्य तनाव के लिए हमास को ज़िम्मेदार बताया है। इन सबके बावजूद हमास ने एक विज्ञप्ति जारी करके फ़िलिस्तीनी गुटों के मध्य मतभेद को समाप्त करने और राष्ट्रीय एकता को मज़बूत करने पर बल दिया है।

इस बात में कोई संदेह नहीं है कि फ़िलिस्तीनी गुटों के मध्य मतभेद वह चीज़ है जिसे इस्राईल चाहता है क्योंकि फ़िलिस्तीनी गुटों के मध्य मतभेद में ही जायोनी शासन के हित नीहित हैं।

इसी कारण जब भी फ़िलिस्तीनी गुटों के मध्य न्यूनतम एकता की संभावना पैदा होती है फिलिस्तीनियों के खिलाफ जायोनी शासन के अपराधों में वृद्धि हो जाती है ताकि एकता की दिशा में रुकावट उत्पन्न की जा सके।

इस्राईल फ़िलिस्तीनी गुटों और इस्लामी जगत में मतभेद की आड़ में अरब देशों के साथ अपने संबंधों को सामान्य बनाने की जुगत में है और यह वह विषय है जिसका उल्लेख हमास की विज्ञप्ति में भी किया गया है।

बहरहाल फ़िलिस्तीनी गुटों के मध्य एकता हर चीज़ से अधिक ज़रूरी है और एकता से ही फ़िलिस्तीनी अपने अधिकारों व उद्देश्यों को प्राप्त कर सकते हैं। MM

 

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