Dec १६, २०१८ २०:५४ Asia/Kolkata
  • तुर्की ने फिर संभाली कमान, ठंडे बस्ते में नहीं जाएगा पत्रकार ख़ाशुक़जी की हत्या का मामला, अर्दोग़ान को शीशे में नहीं उतार पा रहे हैं ट्रम्प और बिन सलमान

सऊदी अरब के वरिष्ठ पत्रकार जमाल ख़ाशुक़जी की हत्या का प्रकरण सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन समलान के साथ ही अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प और इस्राईल के प्रधानमंत्री बिनयामिन नेतनयाहू के लिए भी मुसीबत बन गया है।

तीनों की कोशिश है कि किसी तरह यह मामला मीडिया की सुर्खियों से हट जाए और इस पर चर्चा न हो। लेकिन यह इन तीनों का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि लगभग ढाई महीने का समय बीत जाने के बाद भी यह हत्याकांड मीडिया में मौजूद है और कोई दिन एसा नहीं गुज़रता जब इसकी चर्चा न हो। अरब मीडिया में तो इस पर लगातार डिबेट हो रही है जबकि अमरीका और अन्य पश्चिमी देशों के बड़े मीडिया संस्थान भी इस बिंदु पर विशेष ध्यान दे रहे हैं कि यह मामला ठंडे बस्ते में नहीं जाना चाहिए।

ख़ाशुक़जी हत्याकांड पर चर्चा को सुर्खियों में बनाए रखने में बहुत बड़ा रोल तुर्की का है जबकि अमरीकी कांग्रेस, इंटैलीजेन्स और मीडिया ने भी इस पूरे प्रकरण में बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। तुर्की के राष्ट्रपति को शीशे में उतारने की बड़ी कोशिश सऊदी अरब ने की। तुर्की को आर्थिक प्रलोभन दिया गया, सऊदी अरब ने तुर्की के उत्पादों के लिए अपने बाज़ारों के दरवाज़े पूरी तरह खोलने के संकेत दिए लेकिन यह कोशिश सफल नहीं हुई। सऊदी अरब ने अमरीकी सांसदों को भी ख़रीदने की कोशिश की। अमरीकी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार सऊदी अरब ने कुछ ही दिनों में 26 मिलियन डालर की रक़म ख़र्च की लेकिन नतीजा नहीं मिल सका क्योंकि अमरीकी सिनेट ने सऊदी अरब के ख़िलाफ़ दो प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर दिए।

इस्राईल के प्रधानमंत्री बिनयामिन नेतनयाहू ने बड़ी कोशिश की और अमरीका में मौजूद यहूदी लाबियों को यह समझाने का प्रयास किया कि इस्राईल की सुरक्षा के लिए बिन सलमान का सऊदी अरब की सत्ता में बने रहना बहुत ज़रूरी है। ट्रम्प ने भी इस्राईल की रक्षा की दुहाई दी मगर यह हथकंडे कामयाब नहीं हुए।

रविवार को  तुर्की के विदेश मंत्री मौलूद चावुश ओग़लू ने बयान देकर इस मामले को फिर ताज़ा कर दिया कि सऊदी अरब ने तुर्की से जमाल ख़ाशुक़जी की हत्या के मामले से जुड़ी जानकारियां तो ले लीं लेकिन उसके पास जो गुप्त जानकारियां हैं उनसे पर्दा नहीं हटाया है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव एंटोनियो गोटेरस से मांग की कि इस मामले की विश्वस्नीय जांच करवाएं।

इससे पहले तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोग़ान ने कहा कि यदि तुर्की ने ख़शुक़जी हत्याकांड के मुद्दे को बार बार न उठाया होता तो दुनिया इसे भूल चुकी होती। उन्होंने कहा कि तुर्की की इन्हीं कोशिशों की वजह से अमरीकी कांग्रेस ने यह प्रस्ताव पारित किया कि एक विशेष व्यक्ति इस हत्याकांड का ज़िम्मेदार है। अमरीकी सिनेट ने अपने प्रस्ताव में बिन सलमान को इस हत्या का ज़िम्मेदार माना है।

जमाल ख़ाशुक़जी की हत्या की योजना बनाते समय योजनाकारों ने शायद कभी न सोचा होगा कि इसके इतने ख़तरनाक परिणाम निकलेंगे इसलिए कि यमन पर युद्ध थोपने और वहां 12 हज़ार से अधिक बेगुनाहों का नरसंहार पर इन योजनाकारों के ख़िलाफ़ कोई बड़ी कार्यवाही नहीं हुई अतः उनका दुस्साहस बढ़ गया और इसी जुनून में उन्होंने वह भारी ग़लती कर दी जो संभावित रूप से कई नेताओं का भविष्य अंधकारमय कर देगी।

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