Dec १७, २०१८ १८:५० Asia/Kolkata
  • सऊदी अरब की ख़तरनाक साज़िश के सूत्रधार ने खोले राज़, किस तरह क़तर को हड़पने की थी योजना?

क़तर के अलजज़ीरा टीवी चैनल ने अरबी भाषा में एक कार्यक्रम पेश किया है जिसमें यह बताया गया है कि सऊदी अरब, इमारात और बहरैन ने मिलकर किस तरह क़तर के ख़िलाफ़ साज़िश रची थी?

इस समय यह कार्यक्रम दिखाए जाने का कारण यह है कि यही तीन देश एक बार फिर क़तर की नाकाबंदी कर चुके हैं अलबत्ता इस बार मिस्र भी इन तीनों देशों के साथ है।

यह वर्ष 1996 के बात है जब क़तर क़तर के वर्तमान शासक शैख़ तमीम बिन हमद के पित्ता शैख़ हमद बिन ख़लीफ़ा आले सानी सत्ता में थे। वह अपने पिता को सत्ता से हटाकर ख़ुद सत्ता में पहुंच गए थे। शैख़ हमद को सत्ता से हटाने के लिए सऊदी अरब, इमारात और बहरैन ने योजना तैयार की और सैनिक हमले की तैयारी कर ली गई। इसके लिए दूसरे देशों से किराए के सैनिकों को लाया गया और इन सैनिकों का नेतृत्व फ़्रांसीसी कमांडर पाल बारील ने किया था।

अलजज़ीरा टीवी चैनल के पत्रकार तामिर अलमिसहाल ने पाल बारील से विस्तार से बात की। वह पहली बार मीडिया से बातचीत के लिए तैयार हुए।

बारील ने बताया कि इमारात ने उन्हें भरपूर सपोर्ट किया। उन्हें और उनकी पूरी टीम को अबू धाबी के इंटरकान्टीनेन्टल होटल में ठहराया गया जहां पहले से भारी मात्रा में हथियार जमा कर दिए गए थे। बारील और उनकी टीम के लोगों को इमारात के पासपोर्ट दिए गए और पासपोर्ट इमारात के वर्तमान क्राउन प्रिंस ने दिए जो उस समय चीफ़ आफ़ आर्मी स्टाफ़ थे।

बारील ने बताया कि वह अपने 40 प्रशिक्षित कमांडोज़ के साथ आप्रेशन की तैयारी पूरी कर ली। बारील ने बताया कि भारी हथियार मिस्र से लाए गए थे और क़तर से भाग कर इमारात में शरण लेने वाले कमांडरों और सैनिकों को प्रशिक्षण दिया गया। सऊदी अरब ने क़बायली लड़ाकों को एकत्रित किया था। बारील को बहरैन में एक ठिकाना दिया गया जहां से वह दोहा में होने वाली गतिविधियों की जानकारी एकत्रित करते थे।

बारील ने बताया कि वर्ष 1996 में उन्होंने एक जासूसी आप्रेशन में भाग लिया और इस आप्रशेन के तहत वह समुद्र के मार्ग से दोहा पहुंच गए और उन स्थानों को तसवीरें लीं जिन्हें निशाना बनाया जाना था। इनमें सुरक्षा केन्द्र, शासक के महल और टेलीवीज़न की इमारत जैसे स्थान शामिल थे।

बारील ने अलजज़ीरा टीवी चैनल से अपनी बातचीत में पहली बार वह तसवीरें भी दिखाईं जो उन्होंने हमले के लिए उसम समय खींची थीं।

बारील ने बताया कि चाड के तीन हज़ार सैनिक लाए गए थे और इसकी अनुमति चाड के तत्कालीन राष्ट्रपति इदरीस ने दी थी जिन्हें इसके बदले 20 मिलियन डालर की रक़म दी गई थी। इस पूरे आप्रेशन के लिए लगभग 100 मिलियन डालर ख़र्च किए गए थे।

बारील का कहना है कि इस आप्रेशन के लिए तैयारी पूरी हो चुकी थी लेकिन अचानक इसमें यह रुकावट आई कि तत्कालीन फ़्रांसीसी राष्ट्रपति जैक शीराक ने उन्हें फ़ोन करके कहा कि किसी भी तरह की मूर्खता मत करो और इस आप्रेशन से तत्काल अलग हो जाओ।

इस बातचीत के बाद बारील ने शैख़ हमद बिन ख़लीफ़ा के पिता शैख़ ख़लीफ़ा को यह बताया कि आप्रेशन में कम से कम 1000 लोग मारे जाएंगे तो उन्होंने कहा कि फिर यह आप्रशेन करना ठीक नहीं होगा और वह पीछे हट गए जिसके बाद सऊदी अरब, इमारात और बहरैन बहुत तिलमिलाए मगर कुछ कर न सके। क्योंकि शैख़ ख़लीफ़ा की आड़ लेकर वह यह सारा हंगामा करना चाह रहे थे।

बारील ने बताया कि यदि आप्रेशन हो जाता तो क़तर में जनसंहार होता और उस समय के अमीर शैख़ हमद बिन ख़लीफ़ तथा विदेश मंत्री शैख़ हमद बिन जासिम की भी हत्या कर दी जाती। इसके अलावा भी सत्ता में बैठै कई लोगों को मारा जाना तय था।

वर्तमान समय में सऊदी अरब इमारात, बहरैन और मिस्र मिलकर क़तर के ख़िलाफ़ भयानक साज़िश कर रहे हैं। इस देश की घेराबंदी की जा चुकी है मगर क़तर को ईरान और तुर्की का समर्थन प्राप्त है साथ ही दुनिया के अन्य देश भी क़तर का साथ दे रहे हैं। अब यह देखना है कि इस समय इन चार देशों ने क़तर के ख़िलाफ़ जो भयानक साज़िश रची है उसके रहस्य कितने साल बाद खुलते हैं?

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