Dec १७, २०१८ २३:१६ Asia/Kolkata
  • क्या अंसारुल्लाह ने अलहुदैदा बंदरगाह को दुश्मनों के हवाले कर दिया?

स्वीडन वार्ता में यमन की राष्ट्रीय मुक्ति सरकार के सदस्य अब्दुल मलिक अलअजरी ने अपदस्थ सरकार को अलहुदैदा बंदरगाह हवाले किए जाने की अफ़वाहों को निराधार बताते हुए कहा कि दुश्मनों का यह दावा, रणक्षेत्र और राजनैतिक पटल पर अपनी पराजय पर पर्दा डालने का हथकंडा है।

स्पूतनिक समाचार एजेन्सी की रिपोर्ट के अनुसार अब्दुल मलिक अलअजरी ने सोमवार को कहा कि समझौते के अनुच्छेद स्पष्ट हैं और उसमें कदापि दुश्मनों और उनके एजेन्टों के दावे के आधार पर देश की बंदरगाहों को हवाले करने का विषय शामिल नहीं है।

उन्होंने कहा कि समझौते में शामिल अनुच्छेद में त्यागपत्र दे चुकी सरकार के समर्थकों और हमलावरों का अलहुदैदा शहर से पीछे हटना शामिल है और इस समझौते के आधार पर वर्तमान अधिकारी अलहुदैदा शहर के नागरिक मामलों और इसकी सुरक्षा स्थिति के संचालन के ज़िम्मेदार हैं।

यमन शांति वार्ता का चौथा चरण 6 दिसंबर को स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में शुरु हुआ और 13 दिसंबर को हुदैदा में संघर्ष लागू होने पर सहमति के साथ संपन्न हुआ।

स्वीडन में यमन शांति वार्ता ऐसी स्थिति में संपन्न हुयी कि इससे पहले इस देश के संकट के हल के लिए राजनैतिक वार्ताएं सऊदी अरब और उसके घटकों की ओर से रुकावट की वजह से नाकाम रही थीं।

यमन पर 26 मार्च 2015 से सऊदी अरब की अगुवाई वाले गठबंधन के हमले जारी हैं। इन हमलों में अब तक 14000 यमनी हताहत, दसियों हज़ार घायल और दसियों लाख विस्थापित हुए हैं। (AK)

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