Jan १४, २०१९ १८:५२ Asia/Kolkata
  • तुर्की और अमरीका फिर आमने सामने, ट्रम्प की धमकीः तुर्की की अर्थ व्यवस्था को तबाह कर देंगे, तुर्की का जवाबः अमरीका की आरज़ू पूरी नहीं होने देंगे!

तुर्की और अमरीका एक बार फिर आमने सामने हैं। कारण हैं कुर्द संगठन। कुर्द आबादी ईरान, इराक़, सीरिया और तुर्की में बसी हुई है। तुर्की के कुर्द अलग देश के लिए लड़ रहे हैं और तुर्की उन्हें आतंकवादी कहता है।

तुर्की को लगता है कि यदि सीरिया के कुर्द मज़बूत हो गए और उन्हें सामरिक शक्ति हासिल हो गई तो तुर्की के भीतर चलने वाला कुर्दों का आंदोलन भी मज़बूत होगा।

अमरीका ने सीरियाई कुर्दों की मदद की। सीरिया में संकट के वर्षों में अमरीका ने सीरियन डेमोक्रेटिक फ़ोर्स के नाम से एक हथियारबंद गुट तैयार कर दिया जो कुर्दों का संगठन है। अमरीका चाहता है कि इन कुर्दों को सीरिया और तुर्की दोनों के ख़िलाफ़ प्रयोग करे मगर सीरिया इस लड़ाई में सफल रहा और उसने विद्रोही संगठनों को सैनिक कार्यवाही या राजनैतिक समझौते के तहत कंट्रोल कर लिया।  कुर्दों से सीरियाई सरकार की किसी हद तक सहमति हो गई है और सीरियाई सरकार इस मामले को राजनैतिक प्रक्रिया द्वारा हल करने की दिशा में बढ़ रही है। इस बीच तुर्की की समस्या अपनी जगह पर बाक़ी है। अमरीका अलग अलग बहानों से उन कुर्दों की भी मदद कर रहा है जो तुर्की का बंटवारा करके अलग देश बनाना चाहते हैं। तुर्की ने एलान कर दिया है कि वह कुर्दों की शक्ति क्षीण करने लिए उन पर सीरिया के भीतर भी हमला कर सकता है।

इस समय अमरीका और तुर्की के बीच यही मुद्दा गहरा मतभेद और तनाव का कारण बना है। अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने धमकी दी है कि यदि तुर्की ने कुर्दों पर हमला किया तो अमरीका तुर्की की अर्थ व्यवस्था को ध्वस्त कर देगा। ट्रम्प ने कहा कि वह सीरिया के भीतर कुर्दों के लिए बीस मील का एक सुरक्षित ज़ोन बनाना चाहते हैं मगर उन्होंने यह नहीं बताया कि इस ज़ोन की स्थापना कौन करेगा? और इसका ख़र्च कौन वहन करेगा?

तुर्क राष्ट्रपति के प्रवक्ता इब्राहीम कालिन ने कहा कि आतंकवादी तो वाशिंग्टन के घटक नहीं हो सकते, हम यह सहन नहीं करेंगे। प्रवक्ता ने कहा कि तुर्की को इस बात की प्रतीक्षा है कि अमरीका दोनों देशों  स्ट्रैटेजिक संबंधों के अनुसार काम करे। हम कुर्दों के ख़िलाफ़ नहीं हम उनका समर्थन करते हैं मगर हम आतंकियों पर हमला ज़रूर करेंगे।

तुर्क राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोग़ान की योजना यह है कि सीरिया के भीतर फ़ुरात नदी के पूर्वी इलाक़े में कुर्दों की शक्ति को पूरी तरह ध्वस्त कर दें।

अमरीका के राष्ट्रीय  सुरक्षा सलाहकार जान बोलटन ने बयान दिया था कि अमरीका सीरिया से अपनी सेना इसी शर्त पर बाहर निकालेगा कि तुर्की वादा करे कि वह कुर्दों की रक्षा करेगा।

इस समय अमरीका तुर्की को उसकी अर्थ व्यवस्था ध्वस्त कर देने की धमकी दे रहा है क्योंकि अमरीका को यह पता है कि तुर्की की वर्तमान सरकार आर्थिक क्षेत्र में बड़ी सफलताओं की वजह से लगातार सत्ता में बनी हुई है और उसके प्रयासों से तुर्की दुनिया की 17वीं आर्थिक शक्ति बन गया है अब अगर तुर्की की अर्थ व्यवस्था पर दबाव पड़ता है तो तुर्की के लिए समस्या उत्पन्न होगी और सरकार के लिए अपनी लोकप्रियता बचाना कठिन हो जाएगा। वहीं दूसरी ओर तुर्की को यह पता है कि मध्यपूर्व में अमरीका के पांव उखड़ रहे हैं और दूसरी बात यह है कि कुर्दों के मामले को तुर्की अपनी अखंडता का मुद्दा समझता है जिस पर वह किसी भी स्थिति में कोई समझौत करने के लिए तैयार नहीं है।

तुर्की के साथ सबसे बड़ी समस्या यह है कि उसने दूसरे पर पत्थर मारते समय यह नहीं सोचा के उसका अपना घर भी शीशे का है। तुर्की में कुर्दों का अलगाववादी मिशन कई दशकों से चलता आ रहा है। मगर जब सीरिया का संकट शुरू हुआ तो तुर्की ने इस संकट को अस्तित्व देने और बढ़ाने में भरपूर भूमिका निभाई। दुनिया भर से आतंकवादी तत्व तुर्की आते और वहां से सीरिया और इराक़ में घुस जाते थे। सीरियाई सरकार के विरुद्ध लड़ने वाले आतंकियों को जहां अमरीका, फ़्रांस, ब्रिटेन से हथियार  मिलते थे वहीं दाइश का मुक़ाबला करने के नाम पर कुर्दों को भी हथियार दिए गए। कूबानी का संकट जिस समय शुरू हुआ तो कुर्दों की मदद कई देशों ने की। मगर अब कुर्दों का मामला तुर्की के लिए बहुत गंभीर रूप धारण कर चुका है।

कुर्दों की यदि बात की जाए तो उनकी समस्या यह है कि वह अब तक कई बार भयानक और विनाशकारी ग़लती कर चुके हैं। उन्हें कभी इस्राईल ने और कभी अमरीका  ने मदद का झूठा वादा करके उन्हें खुद उनके देश के ख़िलाफ़ इसतेमाल किया और फिर अकेला छोड़ दिया। हालिया समय में जब अमरीकी राष्ट्रपति ने सीरिया से अपने सैनिकों को बाहर निकालने की घोषणा की तो कुर्द नेताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमरीका ने हमारी पीठ में छुरा घोंपा है। कुर्दों की समस्या यही है कि उन्होंने अमरीका की मदद पर भरोसा किया हालांकि सीरिया की बश्शार असद सरकार ने तीन लाख से अधिक कुर्दों की नागरिकता की समस्या को हल किया। उन्हें कोई भी देश अपना नगारिक मानने के लिए तैयार नहीं था। सीरिया ने इन कुर्दों को नागरिकता प्रदान की मगर यह कुर्द बाद में बदले हुए हालात में सीरियाई सरकार के ही विरुद्ध अमरीका के हाथों प्रयोग होने लगे। वैसे अब कुर्दों को अक़्ल आई है और उन्होंने दमिश़्क़ सरकार से बातचीत शुरू की है और आशा जताई जा रही है कि कुर्दों का मामला राजनैतिक प्रक्रिया के तहत सीरियाई सरकार हल करने के लिए तैयार हो गई है। मगर इस बीच कुर्दों के मामले में अमरीका और तुर्की के बीच ठन गई है। अब देखना यह है कि यह मामला कहां तक आगे जाता है?

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