Jan १४, २०१९ २०:४४ Asia/Kolkata
  • इस्राईलियों को हिज़्बुल्लाह के प्रमुख के भाषणों से ज़्यादा उनकी ख़ामोशी से लगता है डर, इस्राईली क्यों सैयद हसन नसरुल्लाह की बीमारी की अटकलें लगा रहे हैं?

जब हिज़्बुल्लाह के प्रमुख सैयद हसन नसरुल्लाह बयान देते हैं तो इस्राईलियों के दिल कांप जाते हैं और वह उनके भाषण के एक एक शब्द की समीक्षा शुरू कर देते हैं और जब वह ख़ामोश रहते हैं तो इस्राईलियों की चिंता और भी बढ़ जाती है और वह ख़ामोशी के बारे में गहराई से सोचने लगते हैं।

जब सैयद हसन नसरुल्लाह जैसी हस्ती मौन धारण करती है तो यह भी एक स्टैंड होता है बल्कि शायद आने वाले महत्वपूर्ण समय के लिए तैयारी का चिन्ह होता है।

हम इस्राईल के इंटैलीजेन्स मंत्री यस्राईल काट्स तथा अन्य अधिकारियों के बयानों से इसी निष्कर्ष पर पहुंच सकते हैं। वैसे इस ख़ामोशी के बारे में इस्राईली मीडिया और अधिकारियों ने जो भी अटकलें लगाई हैं वह सब बेबुनियाद मालूम पड़ती हैं।

इस्राईली इंटैलीजेन्स मंत्री काट्स ने कहा कि सैयद हसन नसरुल्लाह की ख़ामोशी और उनका कहीं नज़र न आना दरअस्ल इस वजह से है कि इस्राईल ने लेबनान की सीमा पर हिज़्बुल्लाह द्वारा बनाई गई सुरंगों को ध्वस्त कर दिया और इससे हिज़्बुल्लाह के प्रमुख को गहरा झटका लगा है। इस्राईल ने आधुनिक तकनीक का प्रयोग करके इन सुरंगों का पता  लगाया और उन्हें ध्वस्त कर दिया क्योंकि इन सुरंगों से ज़ायोनी बस्तियों के लिए ख़तरा पैदा हो गया था।

हम इन अटकलों को बेबुनियाद इस लिए कह रहे हैं क्योंकि इनमें कोई तर्क और साक्ष्य पेश नहीं किया जा रहा है। सुरंगें ध्वस्त करने के ड्रामे से तो इस्राईल में बसने वाले लोग भी संतुष्ट नहीं हो पाए। इस्राईली मीडिया ने ख़ुद कहा कि यह बिनयामिन नेतनयाहू का ड्रामा था वह अपने और अपनी पत्नी के ऊपर लगे भ्रष्टाचार  आरोपों से लोगों का ध्यान हटाना चाहते थे। कुछ  लोगों ने तो यहां तक मांग की कि इस मामले में नेतनयाहू के ख़िलाफ़ मुक़द्दमा  चलाया जाना चाहिए।

नेतनयाहू इसी मुद्दे को लेकर संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद में पहुंच गए मगर वह हिज़्बुल्लाह या उसके प्रमुख के खिलाफ़ एक निंदा प्रस्ताव तक पारित नहीं करवा पाए। इसलिए कि उन्होंने साक्ष्य का नाम देकर जो कुछ पेश किया उसे सीमा पर तैनात अंतर्राष्ट्रीय पर्यवेक्षकों के बयानों ने ग़लत साबित कर दिया। दूसरी बात यह है कि ग़ज़्ज़ा की सीमा पर भी तो इस्राईल ने हमास द्वारा बनाई गई सुरंगों का पता लगा लिया था। क्या इससे हमास को कोई झटका लगा? और क्या हमास के नेता इस झटके की वजह से ख़ामोश हो गए?

सैयद हसन नसरुल्लाह की ख़ामोशी की वजह शायद यह है कि वह इस्राईल के इस ड्रामे को इतना महत्वहीन समझते हैं कि इस पर कोई प्रतिक्रिया देना उन्हें उचित नहीं लगा। इसलिए कि यदि वह प्रतिक्रिया देंगे तो कुछ लोगों को लगेगा कि इस्राईल के दावों में कुछ दम है। या शायद सैयद हसन नसरुल्लाह ने अपने ख़ामोशी से शत्रु को परेशान करने और उसको भारी मानसिक दबाव में डालने का इरादा किया है।

कुछ इस्राईली गलियारें सैयद हसन नसरुल्लाह की बीमारी की अफ़वाहें फैला रहे हैं। इस तरह वह सैयद हसन नसरुल्लाह पर दबाव बनाना चाहते हैं कि वह सामने आकर भाषण दें। मगर सैयद हसन नसरुल्लाह और उनके क़रीबी लोग इस प्रकार की चालों को बहुत अच्छी तरह समझते हैं और कभी भी एसे किसी जाल में नहीं फंसते।

हम सब को पूरा भरोसा है कि सैयद हसन नसरुल्लाह सामने आएंगे और उचित समय पर सामने आएंगे और जो भाषण देंगे उसमें बहुत कुछ नई और चौंकाने वाली चीज़ें होंगी जिससे इस्राईलियों की चिंता और व्याकुलता और भी बढ़ जाएगी। बस हमें इंतेज़ार करना चाहिए।

साभार रायुल यौम

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