Mar २५, २०१९ १५:४८ Asia/Kolkata
  • गोलान हाइट्स और बैतुल मुक़द्दस हड़पने के चक्कर में क्या तेल अबीब से भी हाथ धो रहा है इस्राईल?

इस्राईली नेताओं और मीडिया में इस समय सबसे गर्म मुद्दा है ग़ज़्ज़ा पट्टी से मिशमिरत के इलाक़े पर फ़ायर किया जाने वाला मिसाइल। इस्राईली राजनैतिक और मीडिया गलियारों का दावा है कि यह मिसाइल ग़ज़्ज़ा पट्टी से फ़ायर किया गया और तेल अबीब के ऊपर से गुज़रता हुआ मिशमिरित बस्ती पर गिरा।

तेल अबीब के उत्तर में स्थित मिशमिरित नाम की बस्ती में 1 हज़ार से कुछ अधिक लोग रहते हैं। इस मिसाइल हमले में छह इस्राईली घायल हुए मगर उनकी चोटें मामूली हैं।

ग़ज़्ज़ा स्थित फ़िलिस्तीनी संगठनों में से किसी ने अब तक इस मिसाइल हमले की ज़िम्मेदारी स्वीकार नहीं की है। कुछ ही दिन पहले गज़्ज़ा से दो मिसाइल फ़ायर किए जाने का भी इस्राईल ने दावा किया था। यह दोनों मिसाइल भी तेल अबीब के पास गिरे थे जिसके जवाब में इस्राईल ने ग़ज़्ज़ा पट्टी में हमास और जेहादे इस्लामी संगठनों के 100 ठिकानों पर हवाई हमले किए थे। इस हमले की भी ज़िम्मेदारी किसी भी फ़िलिस्तीनी संगठन ने नहीं ली थी।

सवाल यह है कि यदि ग़ज़्ज़ा पट्टी से यह मिसाइल हमले हो रहे हैं तो हमला करने वाले फ़िलिस्तीनी संगठन इन हमलों की ज़िम्मेदारी स्वीकार क्यों नहीं कर रहे हैं? कुछ टीकाकार कहते हैं कि फ़िलिस्तीनी संगठनों ने इसलिए ज़िम्मेदारी स्वीकार नहीं की क्योंकि उन्होंने यह हमला किया ही नहीं है बल्कि हमले के इस ड्रामे के पीछे ख़ुद बिनयामिन नेतनयाहू की सरकार का हाथ है। अपनी अमरीका यात्रा को संक्षिप करके तत्काल इस्राईल वापस लौटने का एलान करने वाले नेतनयाहू को आगामी 9 अप्रैल के संसदीय चुनावों में प्रतिद्वंद्वियों से भारी टक्कर मिल रही है और उनके  लिए चुनाव जीत पाना कठिन हो गया है। चुनाव हारने के साथ ही नेतनयाहू के लिए यह ख़तरा भी है कि वह पूर्व प्रधानमंत्री एहूद ओलमर्ट की तरह जेल जा सकते हैं क्योंकि उन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं और सत्ता में न रहने की स्थिति में भ्रष्टाचार की जांच शक्तिशाली रूप से आगे बढ़ेगी अतः नेतनयाहू के लिए अपनी गरदन बचा पाना कठिन हो जाएगा।

नेतनयाहू इस्राईल के भीतर यह धारणा फैला रहे हैं कि वह अमरीका की ट्रम्प सरकार की मदद से वह इस्राईल के लिए कुछ भी करवा सकते हैं जिसमें हमास और जेहादे इस्लामी के ख़तरों का मुक़ाबला भी शामिल है जबकि यदि इस्राईल की सत्ता किसी और के हाथ में जाती है तो उसके इस्राईल के सामने यह ख़तरे और भी गंभीर हो जाएंगे।

वहीं टीकाकारों का एक बड़ा तबक़ा यह मानता है कि मिसाइल हमले फ़िलिस्तीनी संगठनों ने किए हैं और उन्होंने इस हमले में तेल अबीब को पार करके मिशमिरित को निशाना बनाकर यह संदेश दे दिया है कि इस्राईल का कोई भी इलाक़ा सुरक्षित नहीं है। नेतनयाहू सरकार ने अमरीकी सरकार से यह एलान करवा दिया कि सीरिया का गोलान हाइट्स का इलाक़ा इस्राईल की भूमि है साथ ही ट्रम्प सरकार ने तेल अबीब से अमरीकी दूतावास बैतुल मुक़द्दस स्थानान्तरित कर दिया मगर नए नए इलाक़ों को हड़पने में व्यस्त इस्राईली सरकार अपनी राजधानी तेल अबीब को भी सुरक्षित रख पाने में अक्षम है।

कुछ महीने पहले फ़िलिस्तीनी संगठनों से इस्रईल का टकराव हुआ था तो 48 घंटे के भीतर नेतनयाहू को मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुल फ़त्ताह अस्सीसी की मदद लेकर संघर्ष विराम करने पर मजबूर होना पड़ा था क्योंकि दसियों लाख की संख्या में इस्राईलियों को भूमिगत शरण स्थलों में कई कई दिनों तक रखना नेतनयाहू के लिए बहुत महंगा सौदा पड़ा सकता था। इसलिए कि यह वह इस्राईली हैं जो अलग अलग देशों से पलायन करके अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीनी इलाक़ों में लाकर बसाए गए हैं यदि उन्हें अपनी सुरक्षा ख़तरे में नज़र आएगी तो उनकी घर वापसी की प्रक्रिया और भी तेज़ हो जाएगी जो पहले से ही जारी है।

फ़िलिस्तीनी संगठनों ने हालिया समय में इस्राईल के क़ब्ज़े वाले फ़िलिस्तीनी इलाक़ों में बसे फ़िलिस्तीनियों को सक्रिय किया है और इन फ़िलिस्तीनियों ने बड़े साहस का परिचय देते हुए इस्राईलियों पर ज़ोरदार हमले किए हैं। हालिया उदाहरण बहादुर फ़िलिस्तीनी शहीद अबू लैला का है। 18 साल के इस युवा ने चाक़ू से इस्राईली सैनिक पर हमला किया उसकी बंदूक़ छीनी और ज़ायोनियों सैनिकों पर फ़ायरिंग कर दी हमले में कम से कम चार ज़ायोनी हताहत हो गए। बाद में इस्राईली सैनिकों ने एक झड़प में अबू लैला को शहीद कर दिया। गज़्ज़ा पट्टी से होने वाले मिसाइल हमलों से अबू लैला जैसे फ़िलिस्तीनी जियालों के हौसले और भी बढ़ेंगे। शों से पलायन करके इस्

इसका साफ़ मतलब यह है कि सीरिया के इलाक़े गोलान हाइट्स और पवित्र नगर बैतुल मुक़द्दस को हड़पने की कोशिश में नेतनयाहू के लिए तेल अबीब और हैफ़ा को संभाल पाना कठिन हो गया है।

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