Mar २६, २०१९ १४:१७ Asia/Kolkata

सऊदी अरब ने 26 मार्च 2015 को यमन पर हमला आरंभ किया था जिसका अब पांचवां साल आरंभ हो रहा है।

सऊदी अरब ने जब निर्धन देश यमन पर हमला आरंभ किया था तो उसने यह सोचा था कि दो से तीन सप्ताह में वह इस हमले से अपने लक्ष्यों को साध लेगा। यमन पर हमले से उसका मूल लक्ष्य अंसारुल्लाह को सत्ता से दूरके हाशिये पर डाल देना था।

इस ग़ैर कानूनी युद्ध को आरंभ हुए चार साल का समय बीत गया है परंतु अंसारुल्लाह आंदोलन न केवल सितंबर 2014 से पहले की स्थिति में वापस आया बल्कि दिन प्रतिदिन उसकी शक्ति में वृद्धि होती गयी यहां तक कि वह इस समय यमन की शक्ति का केन्द्रीय बिन्दु बन गया है।

इसके अलावा यमन पर अपने पाश्विक हमलों के आरंभ करने के बाद सऊदी अरब ने घोषणा की थी कि वह यमन के त्यागपत्र दे चुके राष्ट्रपति मंसूर हादी को दोबारा सत्ता में पहुंचाना चाहता है परंतु यमन युद्ध को आरंभ हुए चार साल का समय बीत आ गया और मंसूर हादी सऊदी अरब में मौजूद हैं और आज तक वह सना वापस न आ सके।

दूसरे शब्दों में सऊदी अरब यमन में अपनी कठपुतली सरकार न बना सका और यमन के अधिकांश लोग यमनी जनता पर होने वाले अत्याचार व अपराध में मंसूर हादी को भागीदार मान रहे हैं।

 

यमन के स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता यूसुफ़ अलहाज़िरी ने यमन युद्ध के चार साल की समाप्ति पर कहा है कि गत चार साल युद्ध के दौरान 12 हज़ार लोग मारे गये हैं जबकि लगभग 26 हज़ार घायल हुए हैं।

साथ ही उन्होंने कहा है कि बाहर उपचार के लिए जाने में असमर्थ 32 हज़ार बीमार अपनी जान से हाथ धो चुके हैं। दूसरे शब्दों में परोक्ष और अपरोक्ष रूप से सऊदी अरब के पाश्विक हमलों में कम से कम 44 हज़ार यमनी मारे जा चुके हैं। मारे जाने वालों में 6 हज़ार 361 महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।

सऊदी अरब के पाश्विक हमलों का एक दुष्परिणाम यह रहा है कि यमन के विभिन्न क्षेत्रों में बीमारियां फैल गयी हैं। प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार लगभग 14 लाख यमनी विभिन्न प्रकार की बीमारियों से ग्रस्त हैं और इनमें से लगभग 3 हज़ार अपनी जान से हाथ धो चुके हैं।

यही नहीं सऊदी अरब के पाश्विक हमलों के कारण तीस लाख यमनी बेघर भी हुए हैं।

बहरहाल यमन की दो करोड़ चालिस लाख की जनसंख्या में से लगभग दो करोड़ 20 लाख लोगों को मानवीय सहायता की आवश्यकता है जिनमें लगभग 30 लाख बच्चों को कुपोषण का सामना है।

यही नहीं इनमें से चार लाख यमनी बच्चों को भारी कुपोषण के कारण मौत के खतरे का सामना है। बहरहाल बहुत से व्यक्तियों और संगठनों ने घोषणा की है कि यमन त्रासदी हालिया दशक की विश्व की सबसे बड़ी मानव त्रासदी है। MM

 

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