Apr २५, २०१९ १७:०२ Asia/Kolkata
  • सऊदी अरब में शिया मुसलमानों का सरकारी नरसंहार, क्यों 34 से अधिक लोगों की एक साथ गर्दन उड़ा दी गई, कौन थे यह लोग?

सऊदी अरब में एक ही दिन में 34 से अधिक शिया मुसलमान कार्यकर्ताओं के नरसंहार की जहां दुनिया भर में कड़ी निंदा हो रही है, वहीं ट्रम्प प्रशासन, आले सऊद प्रशासन के इस जघन्य अपराध पर पूर्ण रूस से चुप्पी साधे हुए है।

मंगलवार को सऊदी अधिकारियों ने एक बयान जारी करके एलान किया था कि देश में 37 क़ैदियों की सामूहिक रूप से गर्दन मार दी गई है।

इन क़ैदियों के ख़िलाफ़ सामूहिक रूप से कई ऐसे निराधार आरोप लगाए गए थे, जिन्हें कभी अदालत में साबित नहीं किया गया या उनमें से कई के ख़िलाफ़ तो अदातन में मुक़दमा ही नहीं चलाया गया।

इन पर आरोप था कि उन्होंने देश में शिया इस्लाम का प्रचार प्रसार किया है, जासूसी की है और आतंकवादी कार्यवाहियों की साज़िश रची है।

लेकिस कृप्या करके यहां कोई यह सवाल नहीं करे कि क्या इन 37 लोगों में सऊदी पत्रकार ख़ाशुक़जी की हत्या में शामिल वह 15 आरोपी भी शामिल थे, जिन्हें क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने पत्रकार की हत्या का सीधा आदेश दिया था, जिसके बाद इस्तांबुल स्थित सऊदी कांउसलेट में ख़ाशुक़जी के टुकड़े टुकड़े कर दिए गए थे।

जिन क़ैदियों का सऊदी अरब में सरकारी रूप से नहसंहार किया गया है, उनमें से किसी के ख़िलाफ भी खुली अदालतन में मुक़दमा नहीं चलाया गया, जहां उसे दोषी ठहराया गया हो।

एमनेस्टी इंटरनेशनल का कहना है कि इस साल केवल 4 महीनों के दौरान अब तक सऊदी अरब में 104 लोगों की गर्दन मारी जा चुकी है, जबकि 2018 में 149 लोगों का सिर क़लम किया गया था।

सऊदी अरब में जिन 37 लोगों की गर्दन मारी गई है, उनमें से कम से कम 34 शिया मुसलमान हैं। इनमें धर्मगुरु, मानवाधिकार कार्यकर्ता, पत्रकार, विद्वान और वे युवक भी शामिल हैं, जो गिरफ़्तारी के वक़्त नाबालिग़ थे और केवल उन्हें विरोध प्रदर्शनों के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था।

सऊदी सरकार द्वारा किए गए इस जनसंहार को शिया समुदाय पर एक बड़ा हमला माना जा रहा है।

सऊदी न्यायिक व्यवस्था का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि जब एक वकील वलीद अबुल ख़ैर महिला कार्यकर्ता लुजैन अल-हसलौल के ख़िलाफ़ सरकार की आलोचना करने के कारण, आतंकवादी गधिविधियों के आरोप में आतंकवाद के मामलों से विशेष अदालत में मुक़दमा चलाया जाता है।

यहां तक कि एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वाच पर सऊदी सरकार ने इसलिए आतंकवादियों से संपथि का आरोप लगा दिया, क्योंकि इन संगठनों ने सामूहिक रूप से राजनीतिक क़ैदियों को मौत की सज़ा दिए जाने पर आपत्ति जताई है और सऊदी शासन की आतंकवाद की परिभाषा पर सवाल खड़ा किया है।

सऊदी शासन आतंकवाद जैसे गंभीर आरोपों में राजनीतिक क़ैदियों को ऐसी स्थिति में सामूहिक रूप से मौत की सज़ा दे रहा है, जब ख़ुद उस पर दुनिया भर में कट्टरपंथी वहाबी विचारधार को फैलाने और तकफ़ीरी आतंकवाद को बढ़ावा देने के आरोप में है।

सऊदी अरब के इस सरकारी आतंकवाद से सबसे अधिक प्रभावित, इस देश का अल्पसंख्यक शिया समुदाय हो रहा है।

सऊदी अरब में शिया मुसलमानों को बुनियादी अधिकार प्राप्त नहीं हैं और उन्हें इस देश में धार्मिक अल्पसंख्यकों का दर्जा तक नहीं दिया गया है। हर क़दम पर उनके साथ भेदभाव किया जाता है और इस तरह से सामूहिक मौत की सज़ाएं देकर पूरे समुदाय को भयभीत करने का प्रयास किया जा रहा है।

बुधवार को लेबनान के इस्लामी प्रतिरोधी आंदोलन हिज़्बुल्लाह ने मौत की सज़ा दिए जाने वाले 37 क़ैदियों के परिजनों के साथ संवेदना प्रकट की है।

हिज़्बुल्लाह ने एक बयान जारी करके सऊदी सरकार के इस जघन्य अपराध की कड़ी निंदा की है और कहा है कि इन निर्दोष नागरिकों का केवल इसलिए सिर क़लम कर दिया गया, क्योंकि उन्होंने अपने अधिकारों के लिए आवाज़ उठाई थी। msm

 

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