Sep १२, २०१९ १०:०३ Asia/Kolkata
  • मुहम्मद सालेह ख़ज़री
(बीच में)
    मुहम्मद सालेह ख़ज़री (बीच में)

लगभग तीस साल पहले जब फ़िलिस्तीन के हमास संगठन की स्थापना हुई उसी समय से इस संगठन ने सऊदी अरब के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने की पूरी कोशिश की।

हालांकि इस अवधि में इन संबंधों में बड़े उतार चढ़ाव आए मगर अब पहली बार देखने में आ रहा है कि हमास ने रियाज़ सरकार के साथ अपने संबंधों के गहरे संकट के बारे में खुलकर बोलना शुरू कर दिया है।

हमास ने एक बयान में कहा है कि सऊदी सुरक्षा बलों ने 81 साल को डाक्टर मुहम्मद सालेह अलख़ज़री को गिरफ़तार कर लिया है जो दो दशकों से सऊदी अरब के साथ हमास के संबंधों के प्रबंधक के रूप में काम कर रहे थे और वह हमास में ऊंचे पदों पर असीन रहे। हमास ने गिरफ़तारी के बाद पांच महीने से ज़्यादा प्रतीक्षा की कि सऊदी प्रशासन उन्हें छोड़ दे मगर मध्यस्थों की कोशिशें भी पूरी तरह परिणामहीन रहीं। इसके बाद हमास ने मजबूर होकर इस गिरफ़तारी का एलान किया है और सऊदी सरकार से मांग की है कि वह ख़ज़री, उनके बेटे तथा सभी फ़िलिस्तीनियों को जो गिरफ़तार किए गए हैं आज़ाद करे। हमास के विदेशी मीडिया विभाग के प्रभारी राफ़त मुर्रह ने कहा कि हमास सभी अरब व इस्लामी देशों से अच्छे संबंध  चाहता है और सऊदी अरब को विशेष महत्व देता है इसीलिए इस समस्या को बहुत शांत रहकर हल करने की कोशिश करता रहा।

यह लगता है कि अब वह समय नहीं रहा जब सऊदी अरब से फ़िलिस्तीनी प्रतिरोधकर्ताओं को मदद मिला करती थी। इस संदर्भ में बहुत बड़ा बदलाव मुहम्मद बिन समलमान के हाथों में सऊदी अरब के सारे मामले चले जाने के बाद से हुआ है। सऊदी अरब ने हमास ही नहीं सभी फ़िलिस्तीनी संगठनों की हर तरह की मदद रोक दी है।

इस बीच बहुत साफ़ तौर पर यह देखा जा रहा है कि सऊदी अरब इस्राईल से क़रीब होता जा रहा है। अब तो सऊदी अरब के भीतर इस्राईल के पक्ष में प्रचार भी किया जाने लगा है।

ग़ज़्ज़ा स्थित राजनैतिक विशलेषक हम्ज़ा अबू शनब का कहना है कि इस्राईल से दोस्ती बढ़ाने के बारे में अमरीका से मिलने वाले निर्देश के आधार पर सऊदी अरब हमास के आर्थिक स्रोतों को ध्वस्त करने में व्यस्त है। मुर्रह का कहना है कि हमास के उच्च स्तरीय गठबंधन के तेहरान दौरे का भी संभव है क सऊदी अरब की नीतियों पर असर पड़ा हो लेकिन यह दौरा दो महीने पहले हुआ और सऊदी अरब ने पांच महीने पहले से गिरफ़तारियां शुरू कर दी थीं। हमास के संबंध अनेक देशों और सरकारों से हैं और इन संबंधों को फ़िलिस्तीन के लिए वह प्रयोग कर रहा है उसका स्थानीय और क्षेत्रीय विवादों से कोई लेना देना न तो है और न होना चाहिए।

वर्ष 2017 में रियाज़ में अरब व इस्लामी देशों का शिखर सम्मेलन हुआ तो इस अवसर पर अमरीकी राष्ट्रपति ने हमास को आतंकी संगठन कहा। इसके बाद 22 फ़रवरी 2018 को सऊदी अरब के विदेश मंत्री आदिल अलजुबैर ने ब्रसेल्ज़ में यूरोपीय संसद की विदेशी मामलों की कमेटी के सामने कहा कि हमास आतंकी संगठन है, यह बयान सऊदी अरब और हमास के संबंधों के इतिहास में बहुत ख़तरनाक परम्परा के रूप में देखा गया।

वकीलों की संस्था स्काई लाइन ने बताया है कि सऊदी अरब में गिरफ़तार किए गए फ़िलिस्तीनियों की संख्या 60 से अधिक है, इनमें कुछ के पास सऊदी अरब की नागरिकता है जबकि शेष जार्डन के नागरिक हैं, उन सऊदी नागरिकों को भी गिरफ़तार किया गया है जो फ़िलिस्तीनियों के कफ़ील हैं।

टैग्स

कमेंट्स