• रूस के विरुद्ध अभूतपूर्व मानसिक युद्ध

रूस के विदेश मंत्री सेर्गेई लावरोफ़ ने कहा है कि रूस के विरुद्ध अभूतपूर्व सूचना व मानसिक युद्ध के कारण हमारे प्रयास, रूसी नागरिकों की सहायता और उनके विरुद्ध सीमितताओं को समाप्त करने पर केंद्रित हो गए हैं।

लावरोफ़ का यह बयान, रूस के विरुद्ध पश्चिम के मानसिक व सूचना युद्ध पर माॅस्को की चिंता का परिचायक है। यूक्रेन का संकट बढ़ने और पश्चिम से टकराव के बाद दोनों पक्षों के संबंध में कड़वाहट आ गई है। पश्चिमी देशों ने रूस पर अनेक प्रतिबंध लगा दिए हैं। अलबत्ता रूस से पश्चिम की लड़ाई केवल प्रतिबंधों तक सीमित नहीं है। अमरीका के नेतृत्व में पश्चिम ने रूसी अधिकारियों विशेष कर राष्ट्रपति विलादिमीर पुतीन के विरुद्ध मनोवैज्ञानिक युद्ध छेड़ दिया है। पश्चिमी नेताओं व संचार माध्यमों ने रूस को अपमानित करने के साथ ही यह ज़ाहिर करने की भी कोशिश की है कि रूस, विश्व शांति के लिए एक बड़ा ख़तरा है। अक्तूबर 2014 में अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने रूस और उसकी नीतियों को इबोला के ख़तरनाक वायरस और आतंकी गुट दाइश के समान बताया था।

इसी प्रकार सीरिया के मामले में भी रूस, पश्चिम के निशाने पर है। जब से रूस ने सीरिया में आतंकी गुट दाइश के ठिकानों पर हवाई हमले शुरू किए हैं तभी से कुछ पश्चिमी व अरब देश, रूस को सीरिया में तबाही और लोगों के जनसंहार का दोषी ठहराने की कोशिश कर रहे हैं। लगता है कि पश्चिमी व अरब देश, आतंकवाद को परवान चढ़ाने और सीरिया में आतंकी गुटों की हर प्रकार की मदद करने में अपनी भूमिका को भूल गए हैं। पश्चिमी देश, अपने कुप्रचारों में रूस को एक एेसे देश के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं जो पूर्वी यूरोप की अखंडता का सम्मान नहीं करता और किसी भी रूप में भरोसे योग्य नहीं है लेकिन सच्चाई यह है कि पश्चिम, रूस को यूक्रेन के संकट का दोषी और सीरिया में जनसंहार जारी रहने का कारक इस लिए दर्शाने की कोशिश कर रहा है ताकि वह यूक्रेन व सीरिया में स्वयं अपनी विस्तारवादी व हस्तक्षेपपूर्ण नीतियों का औचित्य पेश कर सके। (HN)

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Feb २१, २०१६ १९:१४ Asia/Kolkata
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