यूरोपीय आयोग ने गुरूवार को घोषणा की है कि यूरोपीय संघ के सदस्य देश, 15 मार्च 2017 से यूरोप से यूनान की ओर से शरणार्थियों को स्थानांतरित करने का क्रम आरंभ करेंगे।

यूरोपीय संघ के पलायनकर्ता आयुक्त दिमित्रीस आवरामूपुलिस ने भी कहा है कि यूनान के इस क़दम का यूरोपीय संघ समर्थन करता है। यूरोपीय आयोग की ओर से पेश की गयी इस योजना के आधार पर यूरोपीय संघ के सदस्य देश मार्च 2017 से शरण की मांग करने वाले हर शरणार्थी को जो यूनान से यूरोप में प्रविष्ट हुए हैं, यूनान लौटा देंगे।

यूरोपीय अधिकारियों के अनुसार, इस योजना का लक्ष्य, डब्लिन संधि का क्रियान्वयन है। डब्लिन संधि में इस बात पर बल दिया गया था कि शरणार्थियों को शरण देने के बारे में यूरोपीय संघ की नीति क्या होगी।

इस संधि के आधार पर शरण का आवेदन देने वालों को सबसे पहले यूरोप के उस शांत देश में जहां वह सबसे पहले प्रविष्ट हुए शरण का आवेदन देना होगा और उन्हें देशों के चयन का अधिकार नहीं होगा। यूरोपीय आयोग भी शरण देने वालों को यूनान लौटाने को इस विषय को औचित्य के रूप में पेश कर रहा है।

यूरोपीय संघ के सदस्य देशों में डब्लिन संधि के क्रियान्वयन को लेकर मतभेद पाये जाते हैं। शरणार्थी संकट के निपटने को लेकर यूरोपीय देशों के सदस्यों में काफ़ी मतभेद पाया जाता है और वे कई गुट में विभाजित हो गये हैं। पहले गुट में जर्मनी, फ़्रांस, इटली, स्पेन और यूनान सहित यूरोप के कुछ बड़े देश शामिल हैं जो यह कहते हैं कि शरणार्थी संकट से निपटने के लिए यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के मध्य कोटा निर्धारित कर दिया जाए।

जर्मन चांसलर एंंगेला मर्केल, शरणार्थी संकट के विस्तृत होने से पहले ते द्वार खुला रखने की मुख्य समर्थक रही थीं किन्तु बाद में वह अपने दृष्टिकोण से पलट गयीं और यूरोप में शरणार्थियों के प्रवेश को सीमित करने की वकालत करने लगीं। 

दूसरी ओर ब्रिटेन के साथ यूरोप के पूर्वी देश जैसे हंग्री, स्कोवाकिया, चेक गणराज्य, पोलैंड जैसे यूरोपीय संघ के कुछ सदस्य कोटा व्यवस्था के विरोधी हैं। बहरहाल यूरोप की विषम आर्थिक स्थिति के दृष्टिगत कोई भी देश शरणार्थियों को शरण देने को तैयार नहीं है और संयुक्त राष्ट्रसंघ को ही हस्तक्षेप करके इस मुद्दे को हल करने का प्रयास करना चाहिए। (AK)

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Dec ०९, २०१६ १७:०९ Asia/Kolkata
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