• विदेशी समाचार पत्रों ने भी माना, दुनिया में शीया मुसलमानों का हो रहा है जातीय सफ़ाया

हफ़िंग्टन पोस्ट ने लिखा कि बहरैन और कुछ अन्य देशों में शीया मुसलमान दमन और जातीय सफ़ाए का सामना कर रहे हैं।

हफ़िंग्टन पोस्ट ने अपने ताज़ा संस्करण में लिखा कि बहरैन की शीया आबादी 70 प्रतिशत है और इन लोगों को बहरैनी शासन उनके मूल अधिकारों से वंचित रखे हुए है और उनकी तनिक भी राजनैतिक शक्ति नहीं है।

 

हफ़िंग्टन पोस्ट में विला शाहीन ने अपने लेख में लिखा कि शीया मुसलमानों के जातीय सफ़ाए को स्वीकार करने का समय आ गया है क्योंकि शीया मुसलमान बहरैन सहित कुछ देशों में जातीय सफ़ाए और दमन का शिकार हैं। यह लेख 17 अप्रैल 2017 को प्रकाशित हुआ।

 

हफ़िंग्टन पोस्ट ने सीरिया और कफ़रिया के शीया मुसलमानों पर हुए आतंकी हमले की ओर संकेत करते हुए लिखा कि विश्व समुदाय ने इस अपराध की अनदेखी कर दी जिस प्रकार यमन के विरुद्ध सऊदी अरब के युद्ध की अनदेखी कर दी गयी।

 

शाहीन ने सीरिया, पाकिस्तान, यमन, इराक़, नाइजीरिया, बहरैन और सऊदी अरब में शीया मुसलमानों के जनसंहार की अनदेखी किए जाने की निंदा करते हुए कहा कि राजनैतिक तनाव के बढ़ने के भय से मीडिया इस प्रकार के मामलों को छेड़ते समय सावधानी से काम करता है किन्तु अब आग में जलाए जाने वाले और अपनी रक्षा करने वाले शीया मुसलमानों को उनका अधिकार देने और उनकी बात दुनिया के सामने पेश करने का समय आ गया है। (AK)

 

Apr २०, २०१७ १६:२१ Asia/Kolkata
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