• ट्रम्प विवादः राष्ट्रपति के परमाणु हमला करने के अधिकार की सिनेट में जांच शुरू

अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प पर लगातार उठ रहे सवालों के बीच अब सिनेट ने राष्ट्रपति के परमाणु हमला करने के अधिकार की जांच शुरू कर दी है।

अमरीकी सिनेट विदेशी मामलों की कमेटी की सुनवाई को नाम दिया गया हैः परमाणु हथियारों के प्रयोग का आदेश देने का अधिकार। इस पैनल के चेयरमैन ने राष्ट्रपति ट्रम्प पर पिछले महीने अमरीका को तीसरे विश्व युद्ध की ओर खींचने का आरोप लगाया था।

अगस्त महीने में ट्रम्प ने कहा था कि यदि उत्तरी कोरिया ने अपने परमाणु कार्यक्रम को विस्तार देना बंद न किया तो वह उत्तरी कोरिया पर एसा आक्रोश ढाने का इरादा रखते हैं जो दुनिया ने कभी नहीं देखा होगा।

आख़िरी बार कांग्रेस ने मार्च 1976 में इस विषय पर चार बैठकों में बहस की थी।

कनेटिकट के डेमोक्रेट सिनेटर क्रिस मर्फ़ी ने मंगलवार को होने वाली सुनवाई का कारण बताते हुए कहा कि हमें आशंका है कि राष्ट्रपति अस्थिर हैं, उनके फ़ैसला लेने की प्रक्रिया बहुत काल्पनिक है, वह परमाणु हथियारों से हमला करने का आदेश दे सकते हैं जो कि अमरीका की राष्ट्रीय सुरक्षा के हितों के विपरीत है।

सिनेटर यह भी जानना चाहते हैं कि यदि राष्ट्रपति ने परमाणु हमले का आदेश दिय तो क्या होगा।

अमरीकी स्ट्रैटेजिक कमांड के पूर्व कमांडर राबर्ट केहलर का कहना है कि अतीत में यदि उनके कार्यकाल के दौरान राष्ट्रपति के हमला करने के आदेश मिलते तो वह इस शर्त के साथ कि वह आदेश क़ानूनी होते वह उनका पालन करते।

केहलर ने कहा कि यदि इस आदेश की क़ानूनी हैसियत के बारे में को अस्पष्टता होती तो उसके बारे में क़ानूनी सलाहकारों से राय लेते। उन्होंने बताया कि विशेष परिस्थितियों में मैं यह कह सकता था कि मैं आदेश को व्यवहारिक बनाने के लिए तैयार नहीं हूं। वेसकन्सन के रिपब्लिकन सिनेटर ने पूछ किया फिर क्या होता? तो केहलर ने कहा कि मुझे नहीं मालूम! जिस पर सब हंसने लगे।

कमांडर इनचीफ़ की हैसियत से राष्ट्रपति को परमाणु हमले का आदेश देने का पूरा अधिकार है जो पनडुब्बियों, युद्धक विमानों या अंतरमहाद्वीपीय मिसाइलों के माध्यम से किए जाते हैं। वर्तमान क़ानूनों के तहत अमरीकी राष्ट्रपति द फ़ुटबाल नाम के यंत्र में कोड डाल कर भी परमाणु हमले का आदेश दे सकता है, यह यंत्र हर जगह उनके साथ रहता है।

राष्ट्रपति को इस मामले में किसी से सलाह या स्वीकृति देने की कोई ज़रूरत नहीं है। जबकि पारम्परिक सैनिक शक्ति के लिए कांग्रेस की स्वीकृति ज़रूरी है।

Nov १५, २०१७ ०८:४७ Asia/Kolkata
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