अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को कुद्स को जायोनी शासन की राजधानी घोषित कर दी। उनकी इस घोषणा की पूरी दुनिया में भर्त्सना की जा रही है।

यूरोपीय संघ की विदेश नीति आयुक्त फेडरिका मोग्रीनी ने ट्रम्प के इस क़दम की भर्त्सना की और उनके एकपक्षीय निर्णय को विश्व की शांति व सुरक्षा के लिए हानिकारक बताया और कहा कि उनकी इस घोषणा से फिलिस्तीन समस्या के समाधान के लिए किये जाने वाले बेकार हो जायेंगे।

ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरीज़ा ने भी ट्रम्प के इस फैसले की भर्त्सना की और उसे ग़ैर रचनात्मक बताया है। रोचक बात यह है कि जायोनी शासन के अलावा पूरी दुनिया में कोई भी सरकार ट्रम्प की घोषणा से सहमत नहीं है। बहुत से अधिकारी और विशेषज्ञ डोनाल्ड ट्रम्प को असंतुलित व्यक्ति मानते हैं।

डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा कुद्स को इस्राईल की राजधानी घोषित करने से ब्रसल्ज़ और वाशिंग्टन के मध्य वह मतभेद के एक नये विषय में परिवर्तित हो गया है।

ब्रसल्ज़ के अनुसार ट्रम्प ने जो नीति अपनाई है उसके कारण अमेरिका की शक्ति में वृद्धि होने के बजाये वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक से अधिक अलग- थलग पड़ जायेगा।

ईरान ने ट्रम्प के इस फैसल की भर्तस्ना करते हुए कहा है कि अब अमेरिका की निष्पक्षता के बारे में उस पक्ष की भ्रांतियां दूर हो जानी चाहिये जो अब तक मध्यपूर्व की तथाकथित शांति वार्ता प्रक्रिया में अमेरिका को निष्पक्ष मध्यस्थ समझते थे।

इस बात में कोई संदेह नहीं है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की इस घोषणा से उन समस्त अटकलों का अंत हो गया है कि जो कुछ धड़ों का यह मानना था कि इस्राईल के साथ तथाकथित शांतिवार्ता का परिणाम निकलेगा।

बहरहाल फिलिस्तीन इस्लामी जगत का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है और ट्रम्प के इस कदम की भर्त्सना के अलावा इस संबंध में गम्भीर क़दम उठाये जाने और यह दर्शाये जाने की ज़रूरत है कि कुद्स को जायोनी शासन की राजधानी घोषित करने का अर्थ समस्त मुसलमानों के अधिकारों का अतिक्रमण है और इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। MM

 

 

Dec ०७, २०१७ २०:०४ Asia/Kolkata
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