पाकिस्तान के विदेशमंत्री ने अमेरिकी रक्षामंत्री की हालिया इस्लामाबाद यात्रा के बाद कहा है कि अब इस्लामाबाद और वाशिंग्टन के संबंध पहले जैसे नहीं हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि इस्लामाबाद अब बीजींग और मोस्को की ओर ध्यान देगा।

इस्लामाबाद अब रूस और चीन की ओर जो ध्यान दे रहा है उसके कई कारण हैं। इस संबंध में पहला कारण यह है कि अमेरिका ने अपने व्यवहार से दर्शा दिया है कि क्षेत्र में उसने पाकिस्तान के बजाये भारत का चयन किया है।

यह एसी स्थिति में है जब अमेरिका ने वर्ष 2001 में अफगानिस्तान पर हमले में पाकिस्तान को अपने ग़ैर नैटो घटक का नाम दिया था।

पाकिस्तान अमेरिका के बजाये अब रूस और चीन की ओर जो अधिक ध्यान दे रहा है उसका एक कारण यह है कि अमेरिका अफगानिस्तान में अपनी विफलता के लिए पाकिस्तान को ज़िम्मेदार समझता है और अमेरिकी राजनेता और सैनिक कमांडर पाकिस्तान की सरकार और सेना पर यह आरोप लगाते हैं कि वह अफगानिस्तान में उनके साथ सहकारिता नहीं कर रही है और इस आरोप के साथ उन्होंने वर्ष 2006 से पाकिस्तान के कबाएली क्षेत्रों में हमले आरंभ कर दिये हैं जो इस्लामाबाद और वाशिंग्टन के संबंधों में तनाव का कारण बना है।

इस्लामाबाद और वाशिंग्टन के संबंधों में जो कड़वाहट आ गयी है उसका एक कारण अमेरिका द्वारा अफगानिस्तान के संबंध में पाकिस्तान की आपत्ति की उपेक्षा है।

अफगानिस्तान में भारत के बढ़ते प्रभाव पर पाकिस्तान को आपत्ति है क्योंकि वह अफगानिस्तान को अपना घर आंगन समझता है इसलिए वह अफगानिस्तान में भारत की सैनिक और ग़ैर सैनिक उपस्थिति का विरोधी है और उसकी इस आपत्ति की अमेरिका और अफग़ान सरकार की ओर से अनदेखी की जाती है।

पाकिस्तान में राजनीतिक मामलों में एक विशेषज्ञ टेड पो कहते हैं" अगर पाकिस्तान अमेरिका का वास्तविक घटक होता तो वह आतंकवादियों का समर्थन जारी न रखता और अफगानिस्तान में वाशिंग्टन के खिलाफ काम न करता। इस आधार पर इस्लामाबाद अमेरिका के भरोसे के लाएक नहीं है।" mm

 

 

Dec ०७, २०१७ २०:१२ Asia/Kolkata
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