ईरान और गुट पांच धन एक के मध्य होने वाले समझौते को लेकर अमेरिका ईरान पर दबाव डालने की चेष्टा है। साथ ही वह मानवाधिकार के विषय को भी बहाना बनाकर तेहरान पर दबाव बनाने की जुगत में है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने फ्रांसीसी समकक्ष से टेलीफोनी वार्ता में एक बार फिर ईरान पर क्षेत्र में अस्थिरता उत्पन्न करने का आरोप मढ़ा।

वाइट हाउस ने एक विज्ञप्ति जारी करके ईरान पर विस्तृत पैमाने पर मानवाधिकारों के हनन का आरोप लगाया और कहा कि अमेरिकी सरकार इस संबंध में चुप नहीं रहेगी।

शोचनीय बिन्दु यह है कि अमेरिका क्षेत्रीय देशों विशेषकर सऊदी अरब के हाथों अरबों डॉलर का हथियार बेच रहा है और सऊदी अरब अमेरिका सहित पश्चिमी देशों से खरीदे गये हथियारों से यमन की निर्दोष जनता की हत्या कर कर रहा है और सऊदी अरब द्वारा किये जा रहे अपराधों पर अमेरिका अर्थपूर्ण चुप्पी साधे हुए है जबकि सऊदी अरब के पाश्विक हमलों में 13 हज़ार से अधिक यमनी नागरिक मारे जा चुके हैं जिनमें ध्यान योग्य संख्या महिलाओं और बच्चों की है।

दूसरे शब्दों में सऊदी अरब यमन की निर्दोष जनता के खिलाफ किसी भी अपराध में संकोच से काम नहीं ले रहा है और मनमाने ढंग से मानवाधिकारों का हनन कर रहा है।

रोचक बात यह है कि मानवाधिकारों की रक्षा का दम भरने वाले देशों का उसे पूरा समर्थन प्राप्त है और वे सऊदी अरब को हथियार भी दे रहे हैं दूसरे शब्दों में अमेरिका एसी स्थिति में मानवाधिकारों की रक्षा का राग अलाप रहा है जब वह बच्चों का नरसंहार करने वाली सऊदी अरब की सरकार का समर्थन कर रहा है और सऊदी अरब के कृत्यों में उसे मानवाधिकार का हनन नज़र नहीं आ रहा है।

बहरहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय की दृष्टि से अमेरिकी व्यवहार स्वीकार्य नहीं है और अमेरिका हमेशा यह नहीं कर सकता कि जो कुछ उसका दिल चाहे दूसरे देशों पर थोप दे। MM

 

Jan १२, २०१८ २०:०२ Asia/Kolkata
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