• निकसन की राह पर चल रहे हैं ट्रम्प?

अमरीकी न्यायपालिका के साथ राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प का विवाद विस्फोटक बिंदु के क़रीब पहुंच रहा है। अमरीका के राष्ट्रपति चुनाव में रूस के कथित हस्तक्षेप के बारे में जांच कर रहे विशेष जांचकर्ता राबर्ट मुलेर ने ट्रम्प से मुलाक़ात और पूछताछ की मांग की है और वाइट हाउस में ट्रम्प के सलाहकार उन्हें यही मशविरा दे रहे हैं कि मुलेर से मुलाक़ात न करें। टीकाकार कहते हैं कि ट्रम्प के पास अब दो ही रास्ता है।

यदि ट्रम्प को अदालत ने तलब न किया तो मामला ख़त्म हो जाएगा लेकिन अगर अदालत ने ट्रम्प को पेश होने का आदेश दे दिया तो इसका फ़ैसला अमरीकी कांग्रेस के हाथ में होगा कि और उसे समीक्षा करनी होगी कि ट्रम्प को अदालत में पेश किया जाए या नहीं। यह भी संभावना है कि यह मामला अमरीकी सुप्रीम कोर्ट को सौंप दिया जाए।

ट्रम्प के सलाहकारों ने हालिया दिनों कहा है कि ट्रम्प को मुलेर से मुलाक़ात नहीं करनी चाहिए क्योंकि इस मुलाक़ात में संभव है कि ट्रम्प के मुंह से एसी बातें निकल जाएं जो बाद में उनके ख़िलाफ़ अदालत में इसतेमाल कर ली जाएं। ट्रम्प के दो वकीलों ने मीडिया को बताया कि उन्होंने ट्रम्प से कहा है कि वह मुलेर से न ख़ुद मिलें और न ही वाइट हाउस के किसी अधिकारी को मिलने दें।

वर्ष 2016 में चुनाव प्रचार अभियान के दौरान हिलैरी क्लिंटन के गुप्त इमेल का मुद्दा प्रकाश में आया और वहीं से अमरीकी चुनाव में रूस के हस्तक्षेप का मुद्दा गर्मा गया। चुनाव के कुछ ही दिन बाद सीआईए ने आरोप लगाया कि रूस की सरकार ने अमरीका के चुनावों में हस्तक्षेप करके परिणामों को प्रभावित किया और ट्रम्प की विजय में भूमिका निभाई।

वर्ष 2017 के अंतिम हफ़्तों में अमरीका के दोनों प्रमुख दलों के बीच मुलेर को इस प्रकरण की जांच की ज़िम्मेदारी सौंपने पर सहमति बनी।

ट्रम्प के वकीलों को यह डर है कि ट्रम्प बातचीत में कोई एसी बात भी कह सकते हैं जो उनके नुक़सान में जाए क्योंकि ट्रम्प बातचीत में विरोधाभासी बातें कर जाते हैं और ट्रम्प पर झूठ बोलने और जांच को भटकाने का मुक़द्दमा बन सकता है।

जहां तक रूस के हस्तक्षेप की बात है तो चुनाव के समय अमरीका के चुनावी वातावरण को तीन मंचों में विभाजित किया जा सकता है। एक मंच ट्रम्प और उनके क़रीबी लोगों का था। इस मंच से जुड़े लोगों का कहना है कि चुनावों में रूस के हस्तक्षेप की बात करना हास्यास्पद है, अमरीकी मीडिया का एक भाग इस प्रकार के झूठ फैला रहा है जबकि अमरीकी न्यायपालिका और एफ़बीआई भी ट्रम्प से दुशमनी निकाल रही हैं।

दूसरा मंच ट्रम्प के विरोधियों का है जिसका कहना है कि ट्रम्प की विजय चुनावों में रूस के हस्तक्षेप कारण हुई है। इस मंच से डेमोक्रेटिक पार्टी के लोग जुड़े हुए हैं। कांग्रेस में दर्जनों की संख्या में सांसदों का कहना है कि ट्रम्प पर महाभियोग चलाना चाहिए।

58 सांसदों का कहना है कि ट्रम्प पर महाभियोग चलाना चाहिए और अपने कार्यकाल के पहले साल में ट्रम्प ने जो कुछ किया है उसमें अनेक काम एसे हैं जो अपराध समझे जाते हैं।

तीसरा मंच कांग्रेस के विशेषज्ञों का है। इस गुट का कहना है कि अमरीका के आंतरिक मामलों में रूस के हस्तक्षेप की जांच होनी चाहिए। इस गुट का कहना है कि आरोप प्रत्यारोप के इस माहौल में कुछ भी स्पष्ट रूप से समझ में नहीं आ रहा है अतः ज़रूरी है कि इस मामले की जांच करा ली जाए।

यह भी याद रखना चाहिए कि वर्ष 1974 में वाटरगेट मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि राष्ट्रपति रिचर्ड निकसन संसद की बात मानते हुए अदालत में पेश हों। यदि ट्रम्प के साथ भी यही हुआ तो अंजाम भी उन्हीं के जैसा हो सकता है।

साभार अलवक्त  

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Feb ०८, २०१८ १९:११ Asia/Kolkata
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