अफ़ग़ानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने कहा है कि अमेरिका अपने हितों को साधने के लिए अफ़ग़ानिस्तान में युद्धोन्मादी कार्यवाहियां करता है।

इसी प्रकार हामिद करज़ई ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिकी सैनिक छावनियों में वृद्धि का लक्ष्य, क्षेत्र को नियंत्रित करना है। यह पहली बार नहीं है जब हामिद करज़ई अपने देश में अशांति जारी रहने के लिए अमेरिका को ज़िम्मेदार बता रहे हैं।

अमेरिकी सैनिक 16 वर्षों से अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद हैं और अमेरिका अफ़ग़ानिस्तान में अशांति जारी रखकर कई लक्ष्यों को साधने की चेष्टा में है। पहला लक्ष्य यह है कि अमेरिका अफ़ग़ानिस्तान में अशांति जारी रहने के बहाने अपनी उपस्थिति का औचित्य दर्शाना चाहता है।

अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों के बने रहने का दूसरा लक्ष्य यह है कि वहां अशांति जारी रहने से ब्रिटेन सहित अमेरिका के दूसरे घटकों को वहां के प्राकृतिक स्रोतों की लूट- खसोट आसान होगी।

अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों के बने रहने का तीसरा लक्ष्य है कि अमेरिका धीरे- धीरे हिंसा को पूरे अफग़ानिस्तान में फैलाना चाहता है। साथ ही अमेरिका केन्द्रीय एशिया के देशों में आतंकवादियों को स्थानांतरित करना चाहता है।

तालेबान और आतंकवादी गुट दाइश से अमेरिका का कड़ाई से पेश न आना अफगानिस्तान और पूरे क्षेत्र में अमेरिका के दीर्घकालीन लक्ष्यों का सूचक है।

अमेरिका का प्रतिनिधित्व करते हुए ये गुट अफगानिस्तान और पूरे क्षेत्र में अशांति को फैलाने में संलग्न हैं ताकि अमेरिका आम जनमत को दिग्भ्रमित करके अफगानिस्तान और क्षेत्र में अपने सुरक्षा और आर्थिक कार्यक्रमों को व्यवहारिक बनाये।

अफ़ग़ान मामलों के एक विशेषज्ञ सईदी कहते हैं कि अमेरिका और दूसरे पश्चिमी देश अफगानिस्तान के पुनरनिर्माण के लिए वहां नहीं गये हैं बल्कि हर एक का एक विशेष लक्ष्य है और वे अफगानिस्तान और क्षेत्र में अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने की चेष्टा में हैं।

बहरहाल अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने अमेरिका के साथ सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर न करके दर्शा दिया कि वह अमेरिकी लक्ष्यों व कार्यक्रमों से पूर्णरूप से अवगत हैं क्योंकि अमेरिका इस समझौते पर हस्ताक्षर करके भी अफगानिस्तान में शांति व सुरक्षा की बहाली की दिशा में कुछ न करता। MM

 

Feb ०८, २०१८ १९:४१ Asia/Kolkata
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