• दरिंदगी का पर्दाफ़ाश होने से डरी म्यांमारी सेना ने पत्रकारों को पकड़ा है,

म्यांमार की सेना की बर्बरता की जांच करने वाले पत्रकारों की गिरफ़तारी के मुद्दे पर नई बहस शुरू हो गई है।

रोयटर्ज़ का कहना है कि म्यांमार की सेना और बुद्धिस्टों के हाथों रोहिंग्या मुसलमानों के नरसंहार की ख़बरें सार्वजनिक करने वाले पत्रकारों को म्यामार में गिरफ़तार कर लिया गया है।

ज्ञात रहे कि दो पत्रकारों वा लोन और कीवसोए ओ को देश के सरकारी रहस्य क़ानून के उल्लंघन के आरोप में गिरफ़तार किया गया था और अब उन पर यही मुक़द्दमा चलाया जा रहा है।

रोयटर्ज़ का कहना है कि पत्रकारों ने पिछले साल राख़ीन में दस रोहिंग्या मुसलमानों के नरसंहार के साक्ष्य पेश कर दिए थे। उन्हें आशा थी कि इन साक्ष्यों से लोगों का ध्यान इस बड़े संकट की ओर केन्द्रित होगा।

समाचार एजेंसी के एडिटर इनचीफ़ का कहना है कि जब वा लोन और कीवसोए ओ को गिरफ़तार किया गया तो हमारी प्राथमिकता उनकी रक्षा करना था। लेकिन जब हमें क़ानूनी स्थिति समझ में आई तो हमने दोनों पत्रकारों और उनके रिश्तेदारों से परामर्श करके फ़ैसला किया कि इन दिनों गांव में होने वाली घटना का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करना हमारी ज़िम्मेदारी है।

यह सारा मामला एसे समय सामने आया है जब प्रत्यक्ष दर्शियों के बयानों के आधार पर आरोपों का सिलसिला जारी है।

म्यांमार की सेना बार बार दावा करती है कि वह चरमपंथियों के ख़िलाफ़ कार्यवाही कर रही है लेकिन मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि हज़ारों की संख्या में बेगुनाह नागरिकों का नरसंहार किया गया है।

रोयटर्ज़ के दोनों पत्रकारों ने बड़े साहस का परिचय देते हुए रिपोर्टिंग की और बहुत सारे साक्ष्य एकत्रित कर लिए। दोनों पत्रकारों को गत 12 दिसम्बर को पुलिस के साथ मुलाक़ात और उससे दस्तावेज़ हासिल करने के बाद गिरफ़तार कर लिया गया।

रोयटर्ज़ का कहना है कि दोनों पत्रकार बौद्ध ग्रामीणों और सुरक्षा कर्मियों के इंटरव्यू और तसवीरों द्वारा दस रोहिंग्या नागरिकों के नरसंहार के सुबूत जमा कर रहे थे और दोनों ने यह सारी जानकारी एकत्रित कर ली थी कि वहां क्या  हुआ था।

 

Feb ०९, २०१८ १५:३० Asia/Kolkata
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