यूरोपीय संघ ने अपने घिसे- पिटे दावों की पुनरावृत्ति करते हुए एक बार फिर ईरान पर मानवाधिकारों के हनन का आरोप लगाया है।

यूरोपीय संघ की ओर से ईरान में पर्यावरण के क्षेत्र में कुछ कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी और ईरानी जेलों में कुछ आत्म हत्याओं पर चिंता जताई गयी है और साथ ही ईरानी अधिकारियों का आह्वान किया गया है कि वे इस संबंध में छान- बीन करें।

इस प्रकार के दावे ऐसी स्थिति में ईरानोफोबिया में परिवर्तित हो गये हैं जब हम प्रतिदिन विश्व के विभिन्न क्षेत्रों यहां तक स्वयं यूरोप के केन्द्र और अमेरिका में मानवाधिकार के हनन के साक्षी हैं।

अमेरिका ,ब्रिटेन और फ्रांस जैसे कुछ पश्चिमी देश मानवाधिकार का हनन करने वाले देशों की सूचि में सर्वोपरि हैं। दिसंबर 2017 में एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अपनी रिपोर्ट में इस बात का रहस्योदघाटन किया था कि यूरोपीय संघ ने शरणार्थियों का दुरुपयोग किया है और इन देशों ने लीबिया के तटरक्षक बलों के साथ सहयोग किया है और लीबिया में शरणार्थियों के दास बनने का एक मुख्य कारण यही देश हैं। इसी प्रकार इस क्षेत्र में शरणार्थियों की दुर्दशा के कारण यही देश हैं।

अमेरिका में श्यामवर्ण के लोगों के साथ भेदभाव आम बात है। अमेरिकी जेलों में बंद श्यामवर्ण के लोग बहुत ही दयनीय व विषम स्थिति में हैं।

यही नहीं अमेरिका कुछ स्वतंत्र व स्वाधीन राष्ट्रों पर अतिक्रमण करता है जिससे वहां के लोगों को विभिन्न प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अमेरिका ने वर्ष 2001 में आतंकवाद से मुकाबले के बहाने अफ़ग़ानिस्तान पर जो हमला किया था उसे इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है।

ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामनेई ने इस वास्तविकता की ओर संकेत किया था और कहा था कि दुनिया में ऐसी कोई सरकार नहीं है जो मानवाधिकारों का हनन अमेरिका के बराबर करती हो।

वरिष्ठ नेता के अनुसार अमेरिका मानवाधिकार के प्रति विश्वास नहीं रखता है न इंसान के मान, सम्मान व प्रतिष्ठा के प्रति विश्वास रखता है और न ही लोगों की राय का सम्मान करता है। वरिष्ठ नेता ने कहा कि आज़ादी और मानवाधिकार जैसे विषयों के बारे में अमेरिका जितनी भी बात करता है वह आज़ादी और मानवाधिकारों का मज़ाक उड़ाना है।

बहरहाल मानवाधिकार अमेरिका, पश्चिम और राष्ट्रसंघ की शुभचिंता का उपहार नहीं है बल्कि मानवाधिकार पर हर जगह से अधिक अमेरिका में ध्यान दिया जाना चाहिये। MM

 

Mar १३, २०१८ २०:५६ Asia/Kolkata
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