जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन ईरान के सामने पेश किये जाने वाले पैकेज को संकलित करने वाले हैं।

यूरोपीय संघ की विदेश नीति आयुक्त फेडरीका मोगरीनी ने घोषणा की है कि इस संघ ने ईरान को पेश किये जाने वाले पैकेज का समर्थन किया है।

उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ के 28 सदस्य देशों के नेताओं ने ईरान के सामने पेश किये जाने वाले पैकेज के पक्ष में मत दिया है। यूरोपीय संघ की ओर से शीघ्र ही यह पैकेज ईरान के सामने पेश किया जाने वाला है।

ईरान के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंधों का मुकाबला करने के लिए यूरोप ने अपने वादे के परिप्रेक्ष्य में इस पैकेज को पारित किया है। परमाणु समझौते में ईरान के हितों को गैरेन्टी प्रदान करने के लिए जून की समाप्ति तक यूरोपीय संघ पैकेज पेश करने वाला था।

जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन ईरान के सामने पेश किये जाने वाले पैकेज को संकलित करने वाले हैं। बुल्गारिया यूरोपीय संघ का एकमात्र वह देश था जिसने आरंभ में इस पैकेज का विरोध किया था परंतु अंत में उसने भी इस पैकेज के पक्ष में मत दिया।

इस समय जो चीज़ ईरान के लिए महत्वपूर्ण है वह परमाणु समझौते में रहकर अपने हितों को प्राप्त करना और यूरोपीय कंपनियों की ओर से स्पष्ट गैरेन्टी का दिया जाना।

इस समय न केवल यूरोप बल्कि रूस और चीन को भी चाहिये कि वर्चस्वाद पर आधारित अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की एक पक्षीय कार्यवाहियों के मुकाबले में अपने दृष्टिकोणों को स्पष्ट करें।

ईरान के उपविदेशमंत्री अब्बास इराक़ची ने कहा है कि ईरान का परमाणु समझौते में बाक़ी रहना यूरोपीय संघ, चीन और रूस के दृष्टिकोणों पर निर्भर है।

यद्यपि डोनाल्ड ट्रम्प इस बहाने से परमाणु समझौते से निकल गये कि इस समझौते से अमेरिका के हित पूरे नहीं होते किन्तु इस समझौते ने अपनी उपयोगिता दर्शा दी।

बहरहाल अगर परमाणु समझौता समाप्त हो जाता है तो निश्चित रूप से यह विभिन्न पहलुओं से यूरोप के लिए बहुत बड़ी पराजय समझा जायेगा और ईरान ने परमाणु समझौते के संबंध में बारमबार अपनी सदभावना व प्रतिबद्धता सिद्ध कर दी है और अब यूरोप की बारी है कि वह अपने व्यवहार से उसके प्रति अपनी प्रतिबद्धता सिद्ध करे। MM

 

 

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Jun ३०, २०१८ १६:४९ Asia/Kolkata
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