• ईरान पर पुतीन ट्रम्प से सौदेबाज़ी नहीं कर सकते, यह रहे कारण...

रूस के राष्ट्रपति पुतीन और अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हालिया दिनों में हेलसिंकी में मुलाक़ात की है। इस भेंट से पहले ईरान के शुभचिंतकों को आशंका और दुश्मनों को यह आशा थी कि इस भेंट में ईरान को सीरिया से बाहर निकालने पर पुतीन और ट्रम्प के मध्य सौदेबाज़ी हो जाएगी मगर एसा कुछ हुआ नहीं लेकिन सवाल यह है कि क्या ईरान के शुभचिंतकों की यह आशंका और दुश्मनों की यह उम्मीद सही है कि रूस, ईरान पर अमरीका के साथ सौदेबाज़ी कर सकता है?

           हमारे विचार में यह आशंका और आशा गलत है और रूस  इस तरह से कभी ईरान पर किसी भी देश से सौदा नहीं कर सकता। इसके कई कारण हैः

 

  1. सीरिया में ईरान की उपस्थिति रूस के लिए इस्राईल के साथ वार्ता में विशिष्टता लेने का एक साधन भी है और इस तरह से रूस, इस्राईल को अपनी बात मानने पर तैयार कर सकता है।
  2. सीरिया में ईरान की उपस्थिति से रूस को यह अवसर मिलेगा कि वह ईरान की गतिविधियों पर समझौते के तहत नज़र रखे क्योंकि रूस से ईरान की निराशा की दशा में ईरान, मास्को के हितों पर ध्यान दिये बिना, सीरिया में व्यापक रूप से सक्रिय हो सकता है।
  3. रूस को यह भी खतरा है कि अगर सीरिया से ईरान निकल गया तो रूस को इस्लामी जगत में, एक मुसलमान देश में अतिक्रमण करने वाले ईसाई देश के रूप में देखा जा सकता है जिससे उसके खिलाफ इस्लामी जगत में गुस्सा उभर सकता है लेकिन रूस के साथ ईरान की सीरिया में उपस्थिति से इस्लामी जगत में रूस की इस प्रकार की छवि नहीं बनेगी।
  4. सीरिया में ईरान की उपस्थिति से बहुत से अभियानों और कार्यवाहियों की ज़िम्मेदारी, रूस, सीरियाई सेना और ईरान पर डाल कर स्वंय अलग हो सकता है और पश्चिम के आरोपों से स्वंय को दूर करने में सफल हो जाता है यदि ईरान सीरिया में नहीं होगा तो सीरिया में घटने वाली हर घटना की ज़िम्मेदारी का बोझ रूस को अकेले ही उठाना पड़ेगा।
  5. ईरान को ज़मीन पर युद्ध का भरपूर अनुभव है और इसके साथ ही वह लंबे समय तक आतंकवादी गुटों से लड़ता रहा है इस लिए सीरिया में उसकी उपस्थिति के कारण आतंकवादियों के खिलाफ युद्ध में रूस पर बहुत अधिक बोझ नहीं है।
  6. रूस के हित में है कि सीरिया के बारे में जेनेवा और आस्ताना वार्ता के परिणाम आने तक वह ईरान को अपने साथ रखे क्योंकि इस तरह से वह ईरान जैसे एक मज़बूत पक्ष को अपने साथ रख कर वार्ता में प्रभावी भूमिका निभा सकता है।
  7. रूस की नज़र में ईरान और बश्शार असद की सरकार के मध्य निकट संबंध की वजह से, बशार असद पर दबाव डालना उसके लिए ज़्यादा आसान है और यदि ईरान नहीं रहेगा तो फिर सीरिया की सरकार पर इस प्रकार से प्रभावी रूप से दबाव डालना रूस के लिए कठिन होगा।
  8. रूस को यह भी चिंता है कि अगर उसने सीरिया में ईरान को धोखा दिया और उसके साथ गद्दारी की तो फिर ईरान में कथित रूप से पश्चिमवादी कहे जाने वाले धड़े को मज़बूती मिलेगी जिससे पश्चिम और अमरीका के साथ वार्ता और फिर उससे निकट होने का खतरा बढ़ जाएगा।
  9. रूस को अच्छी तरह से मालूम है कि अगर उसने ईरान को सीरिया में धोखा दिया और अमरीका के साथ सौदेबाज़ी कर ली तो यह खबर, उस पर अन्य देशों के भरोसे के लिए घातक साबित होगी और संभावित रूप से इससे तुर्की भी बिदक सकता है जिस के सहयोग से रूस, सीरिया में स्थिरता लाने की कोशिश कर रहा है।
  10. रूस की नज़र में ईरान के साथ सहयोग यूरेशियावाद की रणनीति का एक भाग है, जैसा कि रूसी लेखक एलेक्ज़ेंडर दोगीन ने अपनी किताब यूरेशिया मिशन में लिखा है कि इस पूरी प्रक्रिया में सब से अहम मुद्दा, ईरान व रूस का ध्रुव है  और दोनों देशों के मध्य सहयोग पूरा होना ही प्रक्रिया की सफलता को निश्चित बनाती है।

यह सारे वह कारण हैं जिनके आधार पर यह कहा जा सकता है कि रूस, ईरान के बारे में अमरीका से सौदे बाज़ी नहीं करेगा लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पुतीन, ट्रम्प से यह भी नहीं कह सकते कि वह ईरान की गतिविधियों पर अधिक नज़र रखेंगे और ईरानियों को एसे कामों से दूर रहने को कहेंगे जिनसे इस्राईल के लिए खतरा पैदा होता हो! (Q.A.)

 

Jul १९, २०१८ २०:४५ Asia/Kolkata
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