अमरीका ने पिछले कुछ दश्कों के दौरान ईरान को बारंबार हमले की धमकी है, विशेषकर जार्ज बुश के काल में जिन्होंने इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान पर आतंकवाद से संघर्ष के बहाने हमला कर दिया, ईरान पर हमले का विषय बहुत गंभीर था जो ईरान की रक्षा क्षमता को देखते हुए कभी व्यवहारिक नहीं हो सका।

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के काल में भी उन्होंने कई बार कहा कि ईरान के साथ सारे विकल्प मेज़ पर हैं। यद्यपि अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने ईरान के विरुद्ध  कमरतोड़ प्रतिबंध लगाकर ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम को रोकने का भरसक प्रयास किया और साथ ही उन्होंने ईरान को डराने के लिए परमाणु कार्यक्रम से मुक़ाबले के लिए कई बार बार सैन्य हमले की धमकी भी दी।

वाशिंग्टन की सत्ता में ट्रम्प के पहुंचते ही, अमरीकी लहजा एकदम बदल गया और उन्होंने ग़ुडागर्दी की समस्त सीमाएं पार करते हुए ईरान को सैन्य हमले की धमकी दी। उन्होंने परमाणु समझौते से निकलने के एक दिन बाद ईरान को धमकी देते हुए कहा  कि ईरान या तो वार्ता करे या फिर कुछ और ही होगा। उन्होंने कहा कि मैं ईरान को सलाह देता हूं कि वह अपना परमाणु कार्यक्रम दोबारा शुरु न करे, मैं उन्हें सख़्त सलाह देता हूं, यदि उन्होंने एेसा किया तो उसके ख़तरनाक परिणाम सामने आएंगे।

अमरीकी अधिकारियों की धमकी के बीच अमेरिका के रक्षामंत्री जेम्स मैटिज़ ने स्वीकार किया है कि उनके देश के पास ईरान पर सैन्य हमले  की क्षमता नहीं है। उन्होंने संचार माध्यमों की उन ख़बरों को मनगढंत बताया जिनमें यह कहा गया है कि अमेरिका, ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर आक्रमण का कार्यक्रम बना रहा है।

जनरल क़ासिम सुलैमानी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प की हालिया धमकी का जवाब देते हुए कहा कि ईरान के साथ युद्ध, शुरू तो अमरीका करेगा किन्तु उसको समाप्त हम ही करेंगे। (AK)

Jul २८, २०१८ १६:०७ Asia/Kolkata
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