अमरीकी वर्चस्ववाद जिसमें ट्रम्प सरकार के दौर में असाधारण रूप से वृद्धि हुई है, अब नये आयामों के साथ सामने आ रहा है और अमरीका अब यह उस स्थान पर पहुंचने की कोशिश कर रहा है जहां से वह दुनिया के हर देश को आदेश देना अपना अधिकार समझे।

इस सिलसिले में एक मिसाल, अमरीका की ओर से अन्य देशों को सुरक्षा व रक्षा के क्षेत्र में सलाह व आदेश देना है।  तुर्की को रूस से एस 400 एन्टी मिसाइल सिस्टम न खरीदने की सलाह और लोभ देने के बाद अब भारत के साथ भी अमरीका ने यही व्यवहार अपनाया है और उससे भी मांग की है कि वह रूस के एस 400 एन्टी मिसाइल न खरीदे ! यही नहीं अमरीका ने धमकी भी दी है कि यदि भारत ने उसकी मांग नहीं मानी तो वह भारत पर प्रतिबंध भी लगा सकता है। पेंटागन के वरिष्ठ अधिकारी, रैंडल शिरीवर का कहना है कि इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि भारत को प्रतिबंधों के कानून से अलग रखा जाएगा,  भारत को चाहिए कि वह वैकल्पिक मार्ग तलाश करें और हम भी कोशिश करेंगे की उसकी रक्षा ज़रूरतों को पूरा करें। 

अमरीका ने हालिया वर्षों में भारत के साथ अपने संबंध बढ़ाने का भरसक प्रयास किया है क्योंकि वह भारत को इस क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने का प्रभावशाली साधन समझता है और इसके साथ ही अमरीका की यह भी कोशिश है कि भारत के हथियारों के बाज़ार में अपनी पोज़ीशन मज़बूत कर ले और दुनिया के इस महत्वपूर्ण बाज़ार से रूस को बाहर निकाल दे। यही वजह है कि रूसी विदेशमंत्री सरगई लावरोव ने कहा है कि रूस के खिलाफ अमरीका के प्रतिबंधों का मक़सद रूस को विश्व के ऊर्जा व हथियारों के बाज़ार से बाहर निकालना है। दरअस्ल अमरीका, रूस  को इन क्षेत्रों में अपना प्रतिस्पर्धी समझता है। इसी लिए उसने रूस पर प्रतिबंध लगाए हैं ताकि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में उस की उपस्थिति को सीमित किया जा सके। अमरीका की नज़र में अगर भारत ने रूस  से एस-400 एन्टी मिसाइल सिस्टम खरीद लिया तो फिर अमरीका व भारत के मध्य सैन्य सहयोग के लिए समस्या उत्पन्न हो जाएगी। अमरीका के प्रतिबंधों के कानून के अनुसार रूस के साथ रक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण समझौते करने वाले देशों पर भी प्रतिबंध लगाया जा सकता है।

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Aug ३०, २०१८ १६:२२ Asia/Kolkata
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