डोनल्ड ट्रम्प के राष्ट्रपति काल में अमरीका की एकपक्षीय व ग़ुंडागर्दी नीतियां व कार्यवाहियां इस बात का कारण बनी हैं कि बहुत से देश यहां तक कि अमरीका के घटक देश भी उसके शत्रुतापूर्ण क़दमों का मुक़ाबला करने के लिए डाॅलर रहित आर्थिक व्यवस्था के गठन और व्यापारिक लेन-देन से डाॅलर को हटाने और उसके स्थान पर अन्य मुद्रओं या अपनी राष्ट्रीय मुद्रा को इस्तेमाल करने की दिशा में कोशिशें शुरू कर दें।

अमरीका के दबाव का मुक़ाबला करने विशेष कर परमाणु समझौते के संबंध में उसकी धौंस धांधली को रोकने के लिए जर्मनी के विदेशमंत्री हाइको मास द्वारा डाॅलर रहित आर्थिक व्यवस्था के गठन की आवश्यकता पर बल दिए जाने के बाद अब कनाडा भी इस विचार के समर्थकों में शामिल हो गया है। इस संबंध में कनाडा की विदेश मंत्री क्रिस्टिया फ़्रीलैंड ने परमाणु समझौते का समर्थन करते हुए डाॅलर रहित भुगतान व्यवस्था का समर्थन किया है। उन्होंने जर्मनी के इस सुझाव का स्वागत करते हुए कहा है कि उनके विचार में डाॅलर रहित आर्थिक व्यवस्था के ढांचे के सुझाव पर गहराई से ग़ौर करना चाहिए। यह सुझाव आशाजनक प्रतीत होता है लेकिन यह विषय कनाडा से अधिक यूरोपीय कंपनियों के लिए अहम है।

 

अमरीका की ओर से विभिन्न समझौतों से बाहर निकलने, अंतर्राष्ट्रीय क़ानूनों के उल्लंघन और अन्य देशों यहां तक कि अपने घटक देशों तक पर प्रतिबंध लगाने पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और अमरीका दिन प्रति दिन अधिक अलग-थलग पड़ता जा रहा है। वास्तविकता यह है कि अमरीका कई बार मुख्य अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा के रूप में डाॅलर से ग़लत फ़ायदा उठा चुका है और उसने इसे अन्य देशों पर दबाव का साधन बनाया है। अब अन्य देश यहां तक कि अमरीका के घटक भी अन्य मुद्राओं को इस्तेमाल करने की राह पर बढ़ रहे हैं। अगर यही स्थिति जारी रही तो डाॅलर का प्रयोग कम हो जाएगा और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में उसकी स्थिति अधिक कमज़ोर हो जाएगी। निश्चित रूप से डोनल्ड ट्रम्प की नीतियां व कार्यवाहियां इस संबंध में सबसे अधिक प्रभावी रही हैं और बहुत सी सरकारें इस नतीजे पर पहुंच चुकी हैं कि उन्हें अमरीका व डाॅलर पर अपनी निर्भरता को कम करना चाहिए। (HN)

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Sep ०२, २०१८ १८:२४ Asia/Kolkata
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