यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रभारी फ़ेड्रीका मोग्रीनी ने कहा कि यूरोपीय संघ अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अपनी भूमिका से पीछे नहीं हटेगा बल्कि इसमें विस्तार करेगा और हमारी प्राथमिकता बहुध्रुवीय अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को मज़बूत करना है।

फ़ेड्रीका मोग्रीनी ने कहा कि यूरोप कभी भी अंतर्राष्ट्रीय पटल से अपने पांव पीछे नहीं खींचेगा। उन्होंने कहा कि बहुपक्षीय सहयोग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए क्योंकि यही यूरोपीय संघ के हितों के लिए उचित होगा।

मोग्रीनी बहुपक्षीय व्यवस्था की जो बात कर रही हैं वह अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प के रवैए पर यूरोप की प्रतिक्रिया है। अमरीका पेरिस जलवायु समझौते से निकल गया, वह मानवाधिकार परिषद से निकल गया, अमरीका ने ईरान के परमाणु समझौते से भी निकल गया। अमरीका ने अपना दूतावास तेल अबीब से बैतुल मुक़द्दस स्थानान्तरित कर दिया। अमरीका ने यूरोपीय देशों से अमरीका को निर्यात की जाने वाली वस्तुओं पर भारी टैक्स लगा दिए। इससे साफ़ ज़ाहिर हो गया कि अमरीका एकपक्षीय और एक ध्रुवीय व्यस्था के लिए प्रयास कर रहा है जहां वह मनमानी कर सके लेकिन यूरोप ने अपनी प्रतिक्रिया से साबित कर दिया कि वह अमरीका को मनमानी करने से रोकेगा। अमरीका ने हाल ही में विश्व व्यापार संगठन से भी निकलने की धमकी दी है। अमरीका का यह रवैया यूरोप के हितों से सीधा टकराव रखता है।

जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल का इस बारे में कहना है कि हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि दो विश्व युद्धों से हमारी बहुपक्षीय व्यवस्था ने बहुत महत्वपूर्ण पाठ लिया था। अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को हमेशा विश्व शांति और सुरक्षा पर केन्द्रित होना चाहिए।

जर्मन विदेश मंत्री हीको मास कह चुके हैं कि नए संकटों के कारण अमरीका पर यूरोप का पुराना विश्वास ध्वस्त हो रहा है तथा अमरीका फ़र्स्ट के नारे का यूरोप की ओर से एउचित जवाब यह है कि यूरोप पूरी तरह एकजुट हो जाए।

इस समय यूरोप इस कोशिश में है कि अंतर्राष्ट्रीय मुद्दो में वह अमरीका के वर्चस्व से बाहर निकले। इसके लिए ठोस नीतियां बनाई गई हैं और अब भी बनाई जा रही हैं। मगर दूसरी ओर अमरीका अपनी कोशिशों में लगा हुआ है। अमरीका यह तो चाहता है कि नैटो के बजट में भागीदारी बढ़ाने जैसे काम यूरोप करे लेकिन अमरीका का वर्चस्व हर हाल में बाक़ी रहे। टीकाकार कहते हैं कि अमरीका की इस इच्छा में विरोधाभास है।

यूरोप के लिए वर्तमान समय एक परीक्षा की घड़ी है। इसमें यूरोप को अपनी क्षमता और एकता का प्रदर्शन करना है। यूरोप इसी तैयारी में है कि ठोस क़दम उठाए लेकिन बहुत से टीकाकार यह मानते हैं कि यूरोप को अब भी आशा है कि शायद अमरीका में कोई बुनियादी बदलाव आ जाए और यूरोप को कोई बड़ा क़दम न उठाना पड़े लेकिन यूरोप की यह सोच सही नहीं है। उसे हर हाल में अपने आप को मजबूत करना होगा और अमरीका पर निर्भरता से ख़ुद को आज़ाद कराना होगा।

Sep ०४, २०१८ १९:५२ Asia/Kolkata
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